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ईरान: महसा अमीनी के पिता ने कहा- बेटी को देखना चाहता था, लेकिन अंदर नहीं जाने दिया

Byadmin

Sep 24, 2022


माहशा

इमेज स्रोत, Mahsa Amini family

22 साल की महसा अमीनी की मौत के बाद ईरान में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. उनके पिता ने अधिकारियों पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है.

बीबीसी फ़ारसी सेवा के साथ एक इंटरव्यू में महसा अमीनी के पिता अमज़द अमीनी ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तक नहीं दी गई. उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि उनकी बेटी की तबीयत ठीक नहीं थी.

उन्होंने कहा कि चश्मदीदों ने उनके परिवार को बताया है कि महसा को पुलिस कस्टडी में पीटा गया था. हालांकि अधिकारियों ने इससे इनकार किया है.

महसा को कथित तौर पर हिजाब पहनने के नियम के उल्लंघन के लिए हिरासत में लिया गया था. ईरान के कुर्दिस्तान प्रांत के शहर साक़िज़ की रहने वाले कुर्दी महिला महसा अमीनी ने शुक्रवार को तेहरान में एक अस्पताल में दम तोड़ दिया. वो तीन दिनों तक कोमा में रही थीं.

स्वास्थ्य से जुड़े आरोप

अमज़द ने इस बात की भी आलोचना की कि कहा जा रहा है कि उनकी बेटी को स्वास्थ्य समस्याएं थीं जो उसकी मौत का कारण हो सकती हैं.

तेहरान प्रांत के फ़ोरेंसिक मेडिसिन के डायरेक्टर जनरल का कहना है कि महसा की आठ साल की उम्र में ब्रेन सर्जरी हुई थी.

हालांकि अमज़द का आरोप है कि ये झूठ है. वो कहते हैं, “पिछले 22 सालों में ख़ांसी सर्दी जैसी मामूली बीमारियों के अलावा महसा को कोई दूसरी बीमारी नहीं हुई.

बीबीसी ने महसा की दो क्लासमेट से भी बात की. उन्होंने भी कहा कि उन्हें महसा के कभी भी अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी नहीं थी.

महसा के बारे में ये भी दावा किया गया कि वो बार-बार बेहोश हो जाती थीं और हाल में ही एक दुकान में काम करते समय गिर गई थीं. अमज़द ने इसे ग़लत बताया है.

अधूरा सपना

महसा के परिवार के मुताबिक़, वो अगले ही महीने से यूनिवर्सिटी में पढ़ाई शुरू करने वाली थीं और कोर्स शुरू होने से पहले तेहरान की यात्रा पर थीं.

अमज़द कहते हैं, “वो माइक्रोबायोलॉजी पढ़ना चाहती थी, डॉक्टर बनना चाहती थी. उसका ये सपना कभी पूरा नहीं हो पाया.”

वो कहते हैं, “उसकी मां बीमार है. उसकी कमी महसूस होती है. इसी सप्ताह उसका 23वां जन्मदिन था.”

मोरैलिटी पुलिस क्या है?

बीबीसी मॉनिटरिंग की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 1979 की क्रांति के बाद से ही ईरान में सामाजिक मुद्दों से निपटने के लिए ‘मोरैलिटी पुलिस’ कई स्वरूपों में मौजूद रही है.

इनके अधिकार क्षेत्र में महिलाओं के हिजाब से लेकर पुरुषों और औरतों के आपस में घुलने-मिलने का मुद्दा भी शामिल रहा है.

लेकिन महसा की मौत के लिए ज़िम्मेदार बताई जा रही सरकारी एजेंसी ‘गश्त-ए-इरशाद’ ही वो मोरैलिटी पुलिस है जिसका काम ईरान में सार्वजनिक तौर पर इस्लामी आचार संहिता को लागू करना है.

‘गश्त-ए-इरशाद’ का गठन साल 2006 में हुआ था. ये न्यायपालिका और इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े पैरामिलिट्री फ़ोर्स ‘बासिज’ के साथ मिलकर काम करता है.

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