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खाद्य सुरक्षा पर भारी पड़ेगी पूर्वी राज्यों में मानसून की बेरुखी, बिहार, झारखंड और बंगाल में धान की रोपाई 50 प्रतिशत से भी कम

Byadmin

Aug 6, 2022


सुरेंद्र प्रसाद सिंह, नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा और जलाशयों का जलस्तर सामान्य से अधिक दर्ज किया गया है। इसके चलते खरीफ फसलों की बोआई का आंकड़ा भी कमोबेश ठीक चल रहा है। लेकिन पूर्वी राज्यों में गंगा के मैदानी प्रक्षेत्र में धान की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है। आगामी एक-दो सप्ताह के दौरान इस क्षेत्र में होने वाली बारिश में सुधार न हुआ तो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

कृषि मंत्रालय खरीफ सीजन की फसलों की बोआई को लेकर जारी होने वाले साप्ताहिक आंकड़े में धान की रोपाई के रकबे की जानकारी देने से कतरा रहा है। इसके पीछे धान की रोपाई में प्रगति नहीं होना बताया गया है। उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल जैसे धान उत्पादक राज्यों में अभी बरसात सामान्य नहीं हो सकी है। राष्ट्रीय स्तर पर छह प्रतिशत सरप्लस बारिश हुई है। दक्षिण भारत में जहां 33 प्रतिशत अधिक बारिश हुई तो मध्य भारत में 11 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। इसके विपरीत पूर्वी राज्यों में एक जून से चार जुलाई के बीच सामान्य से 14 प्रतिशत कम बरसात हुई है। मौसम विभाग के आकड़ों के मुताबिक, देश के कुल 36 क्लाइमेटिक जोन में से 11 में सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि सात में सूखे जैसी हालत है।

मानसून की इस बेरुखी के चलते बंगाल से लेकर उत्तर प्रदेश तक धान की रोपाई का रकबा नहीं बढ़ पा रहे हैं। नर्सरी में खड़ी धान की पौध इतनी पुरानी हो चुकी है कि उसे अब रोपने से कोई फायदा नहीं मिलेगा। उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार ने बताया कि पुरानी नर्सरी की रोपाई करने से धान की उत्पादकता प्रभावित होने का खतरा है। धान की रोपाई में विलंब का सीधा असर आगामी रबी सीजन में गेहूं की बोआई पर भी पड़ सकता है।

पूर्वी राज्यों की 38 प्रतिशत हिस्सेदारी

धान की कुल खेती में पूर्वी राज्यों की हिस्सेदारी 37.8 प्रतिशत है। चालू खरीफ सीजन में उत्तर प्रदेश में 59 लाख हेक्टेयर धान की रोपाई लक्ष्य के मुकाबले अब तक 46 लाख हेक्टेयर, बिहार में 35 लाख हेक्टेयर के मुकाबले केवल 16 लाख हेक्टेयर, झारखंड में 18 लाख हेक्टेयर के मुकाबले केवल 2.75 लाख हेक्टेयर और बंगाल में 42 लाख हेक्टेयर के मुकाबले केवल 11 लाख हेक्टेयर में रोपाई हो सकी है। अगस्त के दूसरे व तीसरे सप्ताह में भले ही बारिश में सुधार हो जाए और धान की रोपाई हो भी कर ली जाए, लेकिन इसका कोई बहुत फायदा नहीं होने वाला है। धान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाक्टर एके सिंह का कहना है कि पुरानी नर्सरी से होने वाली रोपाई वाली फसल की उत्पादकता में भारी गिरावट की आशंका रहती है।

Edited By: Dhyanendra Singh Chauhan