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पुतिन के ‘परमाणु हथियार’ के इस्तेमाल के बयान के बाद ज़ेलेंस्की, बाइडन ने दिया जवाब

Byadmin

Sep 21, 2022


ज़ेलेंस्की

इमेज स्रोत, EPA

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की बात को दोहराया है. उनके ताज़ा बयान पर कई तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की का कहना है कि उन्हें नहीं लगता कि रूस यूक्रेन के साथ युद्ध में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करेगा.

उनका यह बयान रूस के उस बयान के बाद आया है जिसमें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी सीमा की रक्षा के लिए सभी संभव उपाय के इस्तेमाल की बात कही है.

ज़ेलेंस्की ने जर्मनी के बिल्ड न्यूज़पेपर के टीवी स्टेशन से कहा, “मुझे नहीं लगता कि वो परमाणु हथियारों के इस्तेमाल करेंगे. मुझे नहीं लगता कि दुनिया उन्हें परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की इजाजत देगी.”

सैनिकों की लामबंदी का तुरंत कितना असर?

बीबीसी के राजनयिक संवाददाता पॉल एडम्स के मुताबिक़, भले ही उन लोगों को बुलाया जा रहा है जिन्हें पहले से सैन्य अनुभव है, लेकिन उन्हें संगठित करने और नई युद्ध शक्ति से लैस करने में महीनों लगते हैं.

अगर रूस ने उन्हें योजना बना कर सैन्य टुकड़ियों में नहीं डाला, तो वो अगले वसंत तक युद्ध में शामिल नहीं हो सकेंगे.

यूक्रेन में अहम नुकसान को देखते हुए रूस के लिए इन नए सैनिकों को ज़रूरी हथियार मुहैया कराने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

पश्चिम से मिले अत्याधुनिक हथियारों और रूस से क़ब्ज़े में लिए मशीनों से यूक्रेनी सैनिकों ने कहर बरपा दिया है और गोला-बारूदों के ढेरों, कमांड पोस्ट, फ्रंट लाइन के लिए बनाए गए बेस को उड़ा दिया है.

रूस के लिए युद्ध में पहले से मौजूद सैनिकों को ही संगठित करना मुश्किल हो गया है, किसी नए की तो बात ही छोड़ दें.

ये भी माना जा रहा है कि यूक्रेन में तैनात सैनिकों के मनोबल पहले से ही कमज़ोर हैं. साथ ही अब कुछ लोगों की वहां तैनाती की अवधि बढ़ाई भी जा रही है क्योंकि आने वाले ठंड में भी युद्ध के चलते रहने की संभावना जताई जा रही है.

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ब्रिटिश रक्षा मंत्री बेन वॉलेस

पुतिन के फ़ैसले पर तीखी प्रतिक्रिया

यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने ट्वीट किया, “पुतिन ने चीन, भारत, मैक्सिको, तुर्की और अन्य एशियाई, अफ़्रीकी, मध्य पूर्व, लातिन अमेरिकी देशों का घोर अनादर किया है जिन्होंने रूस को यूक्रेन के साथ युद्ध ख़त्म करने की कूटनीतिक सलाह दी थी. वे और अधिक लोगों को इस युद्ध की आग में झोंकना चाहते हैं, उनके जीतने की कोई संभावना नहीं है.”

ब्रितानी रक्षा मंत्री बेन वॉलेस ने कहा कि यूक्रेन में युद्ध के लिए रिज़र्व सैनिकों को लामबंद करना ये बताता है कि रूस के हमले नाकाम हो रहे हैं.

उन्होंने कहा, “वो और उनके रक्षा मंत्री ने कमज़ोर नेतृत्व के साथ अपने हज़ारों नागरिकों को उनकी मौत के लिए वहां भेजा है जिनके पास लड़ाई के उचित संसाधन भी मौजूद नहीं हैं.”

यूक्रेन में अमेरिकी राजदूत ने पुतिन के आंशिक रूप से रिज़र्व सैनिकों को लामबंद करने के आदेश को कमज़ोरी का संकेत बताया.

ब्रिगेट ब्रिंक ने ट्विटर पर लिखा, “जनमत संग्रह और लामबंद करना रूस की नाकामी और कमज़ोरी का संकेत है.”

“यूक्रेन की सीमा पर रूसी क़ब्ज़े को अमेरिका कभी मान्यता नहीं देगा और यूक्रेन के साथ हमेशा खड़ा रहेगा, चाहे जितना भी वक़्त क्यों न लगे.”

यूक्रेन में युद्ध के लिए रिज़र्व सैनिकों को भेजने की रूस की तैयारी पर यूरोप के नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं.

चेक रिपब्लिक के प्रधानमंत्री पेट्र फियाला ने कहा कि आंशिक रूप से रिज़र्व सैनिकों को लामबंद करने की रूस की कोशिश “यूक्रेन में युद्ध को और बढ़ाने का प्रयास है” और “ये सबूत है कि रूस ही अकेला आक्रमणकारी है.”

प्रधानमंत्री फियाला ने कहा कि यूक्रेन को सहायता देना ज़रूरी है और ऐसा करना चेक रिपब्लिक के हित में है.

चेक रिपब्लिक वो पहला देश है जिसने यूक्रेन के भारी हथियार मुहैया कराए थे. उसने अब तक यूक्रेन को टैंक, हेलीकॉप्टर और तोपख़ाने भेजे हैं.

जर्मनी के वाइस चांसलर रॉबर्ट हाबेक ने रिज़र्व सैनिकों की लामबंदी को “रूस का एक और ग़लत क़दम” करार दिया.

नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री मार्क रूट ने जनमत संग्रह और रिज़र्व सैनिकों की लामबंदी को रूस की “घबराहट का संकेत” बताया.

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एलेक्सी नवेलनी

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बड़े आलोचक एलेक्सी नवेलनी ने कहा कि आंशिक रूप से सैन्य लामबंदी “बहुत बड़ी त्रासदी” का कारण बनेगी.

जेल से अपने वकील के ज़रिए भेजे एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, ‘ये विशाल त्रासदी का कारण बनेगी जिसमें बड़ी संख्या में लोग मारे जाएंगे… अपनी निजी ताक़त को बरकरार रखने के लिए पुतिन पड़ोसी देश में गए, वहां लोगों को मारा और अब बहुत बड़ी संख्या में रूस के नागरिकों को इस युद्ध में भेज रहे हैं.’

नवेलनी रूस में मौजूद पुतिन के सबसे मुखर आलोचक हैं, इस वक़्त वे परोल के उल्लंघन, धोखाधड़ी और अदालत की अवमानना के आरोपों में साढ़े ग्यारह साल की जेल की सज़ा काट रहे हैं. उनका कहना है कि ये आरोप उन पर इसलिए मढ़ा गया है ताकि पुतिन के विरोध और उनकी (नवेलनी की) राजनीतिक महत्वकांक्षा को रोका जा सके.