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‘भाभीजी मुश्किल में हैं’, शिवहर में संघर्ष का सामना कर रहीं लवली आनंद, मोदी मैजिक के भरोसे सियासी नाव – lovely anand facing struggle in sheohar political boat relying on modi magic lok sabha elections 2024

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May 16, 2024


शिवहर: बिहार में लोकसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज है। शिवहर लोकसभा सीट भी इन दिनों चर्चा में है। एनडीए के सामने शिवहर सीट को बचाने की चुनौती है। शिवहर सीट के लिए बाहुबली आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद को जेडीयू ने अपना उम्मीदवार बनाया है। आनंद मोहन के काफिले के साथ जब लवली आनंद लोकसभा क्षेत्र के भ्रमण पर निकलती हैं, तो लोग नारेबाजी करते हैं। उनके साथ होने का दावा करते हैं। जानकार मानते हैं कि शिवहर में महागठबंधन के उम्मीदवार के साथ उनकी कड़ी टक्कर है। वैश्य वोटर टिकट वितरण में तरजीह नहीं मिलने से नाराज हैं। ग्रामीण उनका उत्साह के साथ भले स्वागत करें। ये उत्साह वोट में तब्दील होगा कि नहीं, ये कहना मुश्किल है। स्थानीय पत्रकार मानते हैं कि वैश्य वोटरों का लवली आनंद के पक्ष में होना जरूरी है। वे मेन फैक्टर हैं। नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के टिकट पर मैदान में उतरीं भाभीजी यानी लवली आनंद सियासी संघर्ष करती दिख रही हैं। जानकार मानते हैं कि मोदी मैजिक ही उन्हें बचा सकता है।

लवली कर रहीं मेहनत

लवली आनंद के पति आनंद मोहन को नीतीश कुमार ने जेल मैनुअल में बदलाव कर कैद से मुक्त कराया। पत्नी लवली आनंद को पार्टी ने टिकट दे दिया है। अब शिवहर सीट को बरकरार रखने की चुनौती दोनों पति-पत्नी के सामने मुंह बाए खड़ी है। 25 मई को इस सीट पर मतदान होना है। इससे पहले इस सीट पर बीजेपी सांसद रमा देवी का कब्जा था। रमा देवी वैश्य समुदाय से आती थीं, जो इस सीट के मतदाताओं का लगभग एक चौथाई हिस्सा हैं। यह समुदाय, जो परंपरागत रूप से भाजपा के प्रति सहानुभूति रखता रहा है, न केवल जदयू को सीट देने के लिए, बल्कि एक गैर-वैश्य को भी सीट देने के लिए पार्टी के साथ खड़ा दिखाई देता है। हालांकि कुछ वैश्य वोटर कहते हैं कि मोदी जी सिर्फ छा गए हैं और शिवहर को खा गए हैं। नाराजगी भी जमीन पर दिखती है। रमा देवी को वैश्य समुदाय का समर्थन था। बताया जा रहा है कि चुनाव के दिन तक माहौल चेंज होगा।

रमा देवी वैश्य थीं- वोटर

स्थानीय वोटरों का कहना है कि रमा देवी ज़्यादा काम नहीं करती थीं, लेकिन मिलनसार थीं और ज़रूरत पड़ने पर मदद करती थीं। साथ ही, वह समुदाय से थी, इसलिए हम वोट करेंगे। लवली आनंद एक बाहरी व्यक्ति हैं। उनके बेटे (चेतन आनंद) शिवहर विधायक हैं। क्या जीतने के बाद वह हमसे आकर मिले भी? यह पूछे जाने पर कि क्या समुदाय सिर्फ इस कारण से मोदी के खिलाफ जाएगा, लालबाबू ने कहा कि मोदी जी वैसे भी 400 सीटें जीत रहे हैं। एक सीट से क्या फर्क पड़ेगा? जिस चीज ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है, वह यह है कि राजद ने लवली आनंद के खिलाफ एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी की पत्नी, वैश्य रितु जयसवाल को मैदान में उतारा है। साथ ही एक लोकप्रिय स्थानीय वैश्य भिक्षु के चुनाव मैदान में निर्दलीय के रूप में प्रवेश किया है। स्थानीय वैश्य वोटर, जो व्यापारी हैं। उनका कहना है कि बीजेपी वैश्य वोटरों को चंदा लेने के लिए साथ में रखा है। राजपूत को सीट देने की क्या जरूरत थी। हम नहीं समर्थन करेंगे। स्थानीय वोटरों ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से बातचीत में बताया कि वे अनिच्छा से वोट करेंगे। वो भी मोदी की वजह से।

हम बाहरी नहीं-लवली

रिपोर्ट के मुताबिक लवली आनंद कड़ी मेहनत कर रही हैं। गांव-गांव जा रही हैं। यह सुनिश्चित कर रही हैं कि वह सभी जातियों और समुदायों से वोट मांगें। प्रचार अभियान के दौरान, जब भी कोई ग्रामीण कोई समस्या लेकर आनंद मोहन के पास आता है तो वे खुद अधिकारियों को फोन करते हैं। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक लवली बाहरी होने के आरोपों का खंडन करती हैं और वैश्यों का समर्थन पाने के लिए मोदी की लोकप्रियता पर भरोसा कर रही हैं। आनंद मोहन जी शिवहर से सांसद रहे हैं। मेरे बेटे, स्थानीय विधायक, ने बहुत काम करवाया है। फिर हम बाहरी कैसे हैं? साथ ही यह पीएम चुनने का चुनाव है। कौन कहां से चुनाव लड़ेगा इसका फैसला शीर्ष नेतृत्व करता है। हमें यह सीट दी गई है और हम मजबूती से लड़ेंगे। वैश्य वोटरों का कहना है कि मन मार के, मोदी के नाम पर वोट करेंगे लवली जी को। लवली आनंद को राजपूत समुदाय, ओबीसी के एक महत्वपूर्ण वर्ग और कुछ दलितों का भी पूरा समर्थन प्राप्त है। राजद के पास यादवों, मुसलमानों और दलितों के एक वर्ग का वोट बैंक बरकरार है। मुकेश सहनी की वीआईपी के विपक्षी गठबंधन का हिस्सा होने के कारण , मल्लाह, जो निर्वाचन क्षेत्र में महत्वपूर्ण संख्या में हैं, भी पार्टी का समर्थन कर रहे हैं।

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