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भ्रामक विज्ञापन मामला: ‘आईएमए अध्यक्ष के माफीनामे को स्वीकारने के इच्छुक नहीं’, अवमानना नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

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May 15, 2024


जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भ्रामक विज्ञापन मामले में सुनवाई के दौरान इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष आरवी अशोकन ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर कोर्ट के बारे में दिए गए बयान के लिए बिना शर्त माफी मांगी, लेकिन कोर्ट उनकी माफी व हलफनामे से संतुष्ट नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि वह माफीनामा स्वीकार करने का इच्छुक नहीं है।

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निंदा करने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने अशोकन से कड़े सवाल करते हुए कहा कि आपसे जिम्मेदाराना व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। आप इस तरह आराम से बैठकर प्रेस को साक्षात्कार देते हुए अदालत की निंदा नहीं कर सकते। आपने भी बिल्कुल वही किया, जिसकी शिकायत लेकर आप कोर्ट आए थे। हम आपके हलफनामे से खुश नहीं हैं, बहुत ही निराशाजनक है। आप कह रहे हैं कि भूल हो गई, तो आपने सार्वजनिक माफी क्यों नहीं मांगी।

यह कहना कि हम कोर्ट का बहुत सम्मान करते हैं एक बात है; लेकिन आपने किया क्या, यह दूसरी बात है। आपके बयान का व्यापक प्रभाव है। जजों का व्यक्तिगत अहम नहीं होता, लेकिन जब संस्था पर बात आती है तभी कोर्ट कार्रवाई करता है। कोर्ट विरले मामलों में ही कार्रवाई करता है। अंत में अशोकन के वकील ने गलती मानते हुए सही एवं बेहतर हलफनामा दाखिल करने के लिए समय ले लिया। सुप्रीम कोर्ट कोरोना काल में कोविड के इलाज के बारे में पतंजलि के भ्रामक विज्ञापनों की शिकायत वाली आईएमए की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

भ्रामक विज्ञापन मामले में कोर्ट ने जारी किया था नोटिस

कोर्ट ने इस मामले में पतंजलि की ओर से ऐसे विज्ञापन नहीं दिए जाने की दी गई अंडरटेकिंग का उल्लंघन करने पर पतंजलि, बाबा रामदेव व आचार्य बालकृष्ण को अवमानना नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने लाइसेंसिंग अथॉरिटी और राज्य व केंद्र सरकार की भी खिंचाई की थी और पतंजलि के अलावा भी स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले अन्य उत्पादों के बारे में भ्रामक विज्ञापनों पर की गई कार्रवाई का राज्यों और केंद्र के संबंधित विभागों व मंत्रालयों से ब्योरा मांगा था।

इसी बीच आईएमए के अध्यक्ष आरवी अशोकन के मीडिया में आए एक साक्षात्कार को आधार बनाकर पतंजलि ने भी उनके विरुद्ध अवमानना अर्जी दाखिल की है जिसमें अशोकन पर सुप्रीम कोर्ट के बारे में अनुचित टिप्पणियां करने का आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने इस पर अशोकन को नोटिस जारी किया था। इसके अनुपालन में अशोकन मंगलवार को कोर्ट में पेश हुए और बिना शर्त माफी मांगी।

हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त मांगी गई थी माफी

उनकी ओर से हलफनामा दाखिल करके भी बिना शर्त माफी मांगी गई थी। हालांकि कोर्ट उनके हलफनामे से संतुष्ट नहीं हुआ और कहा कि वह उनकी क्षमता पर सवाल नहीं उठा रहा, न ही उनके पेशेगत आचरण पर सवाल उठा रहा है। लेकिन उनके आचरण से ही उनके इरादे जाहिर होते हैं। कोर्ट के पास यह जानने का कोई तंत्र नहीं है कि उनके मन में क्या चल रहा है। कोर्ट ने मामले को जुलाई मे लगाने का आदेश दिया।

इसके अलावा शीर्ष कोर्ट ने पतंजलि, बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के विरुद्ध प्रस्तावित अवमानना कार्रवाई के मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया। लेकिन पतंजलि से पूछा कि क्या उसने उन उत्पादों की बिक्री रोक दी है जिनके लाइसेंस उत्तराखंड लाइसेंसिंग विभाग ने निलंबित कर दिए हैं। क्या यह सही है कि आपके स्टाकिस्ट ने उन उत्पादों को एकत्र करना और बेचना बंद कर दिया है।

कोर्ट ने कहा कि आप इसकी जांच करके तीन सप्ताह में हलफनामा दाखिल करें। पतंजलि के वकील बलबीर सिंह ने मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ के समक्ष हलफनामा दाखिल करने की हामी भरते हुए कहा कि कंपनी ने उन चैनलों को भी लिखा है जो इन उत्पादों का विज्ञापन दिखाते हैं। कोर्ट ने लाइसेंस निलंबन वाले उत्पादों को वापस मंगाने और उन उत्पादों के बारे में विज्ञापन वापस लेने के बारे में हलफनामा दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय देते हुए अवमानना मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया।

क्या है पूरा मामला?

मालूम हो कि उत्तराखंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने पतंजलि के 14 उत्पादों के लाइसेंस निलंबित करते हुए उन पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने बाबा रामदेव और बालकृष्ण को तब तक निजी पेशी से छूट दे दी, जब तक कोर्ट उन्हें न बुलाए। कोर्ट ने मंगलवार को बाबा रामदेव को उनकी जिम्मेदारी का भी अहसास कराया। कोर्ट ने कहा कि बाबा रामदेव में बहुत लोगों की आस्था है, उन्हें इसका सकारात्मक उपयोग करना चाहिए। लोगों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्हें ज्यादा जिम्मेदारी से काम करना चाहिए। कोर्ट में मौजूद सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बाबा रामदेव द्वारा योग के लिए किए गए अच्छे कामों का जिक्र किया।

पीठ ने भी माना कि बाबा रामदेव ने योग के क्षेत्र में अच्छा काम किया है और उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर योग के प्रति ध्यान आकर्षित किया है, लेकिन जस्टिस कोहली ने कहा कि पतंजलि के उत्पादों का मामला अलग है। शीर्ष कोर्ट ने सभी राज्यों की लाइसेंसिंग अथॉरिटी और संबंधित अथारिटियों से भी कहा है कि वह हलफनामा दाखिल कर बताएं कि दवाओं और सेहत से संबंधी उत्पादों के भ्रामक विज्ञापनों के विरुद्ध उन्होंने क्या कार्रवाई की है।

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