इमेज कैप्शन, अमेरिका से पहले भी यूरोपीय और कैरेबियाई देशों में पैसों के बदले नागरिकता खरीदने से जुड़ी योजनाएं रही हैं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘गोल्ड कार्ड’ वीज़ा स्कीम को शुरू करने की अपनी योजना के बारे में एलान किया है. इसकी कीमत 50 लाख डॉलर यानी करीब 44 करोड़ रुपये होगी और ये अमीर लोगों के लिए अमेरिकी नागरिकता पाने का रास्ता होगा.
ट्रंप ने ओवल ऑफ़िस में कैबिनेट के पहली बैठक के बाद कहा, “ये लोग अमीर होंगे और सफल होंगे. ये लोग खूब पैसे खर्च करेंगे और बहुत सारा टैक्स भी भरेंगे, ये कई लोगों को रोज़गार देंगे. हमारा मानना है कि ये बहुत सफल होने वाला है.”
अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड ल्युटनिक ने भी एक मीटिंग में कहा कि गोल्ड वीज़ा विदेशी निवेशकों के लिए मौजूदा वीज़ा प्रोग्राम की जगह लेंगे, लेकिन उन्होंने ज़्यादा जानकारी नहीं दी.
ट्रंप के इस एलान के बाद कई तरह की आशंकाएं और अटकलें जानकारों और नागरिकता पाने की कतार में खड़े लोगों के मन में हैं. हालांकि, अमेरिका पैसे लेकर नागरिकता देने वाला पहला देश नहीं होगा.
कई देशों में चल रही है नागरिकता खरीदने वाली स्कीम
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इमेज कैप्शन, स्पेन की सरकार ने पैसों से नागरिकता खरीदने की अपनी योजना को ख़त्म कर दिया है और अब तीन अप्रैल इस योजना के तहत आवेदन की आख़िरी तारीख है
ट्रंप ने जिस योजना का एलान किया है वैसी ही स्कीम दुनियाभर के कई देशों में आम है.
‘गोल्डन वीज़ा’ स्कीम अमीर विदेशियों को बड़े निवेश के एवज़ में दूसरे देशों में रहने और काम करने का हक़ देती है.
ऐसी ‘गोल्डन पासपोर्ट’ योजनाएं भी हैं, जो कुछ कैरेबियाई देशों में काफ़ी लोकप्रिय हैं. इसके ज़रिए अमीर लोग जिस देश की नागरिकता के लिए आवेदन कर रहे हैं, वहां काम करने और वोट देने समेत अन्य नागरिकों को मिलने वाले सभी अधिकार और स्वतंत्रताएं पा लेते हैं.
यूके की एडवाइज़री फ़र्म हेनली एंड पार्टनर्स के अनुसार 100 से अधिक देश ऐसे हैं जो अमीर लोगों को ‘गोल्डन वीज़ा’ देते हैं. इसमें ब्रिटेन, स्पेन, ग्रीस, माल्टा, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और इटली जैसे मुल्क भी शामिल हैं.
हेनली एंड पार्टनर्स के मुताबिक जिन देशों में नागरिकता पाना सबसे सस्ता है उनमें नाउरू सबसे अव्वल पर है. यहां कि नागरिकता पाने के लिए केवल एक करोड़ 13 लाख रुपये के आसपास की राशि चुकानी होती है.
वहीं डॉमिनिका और एंटीगुआ-बारबूडा की नागरिकता पाने के लिए किसी व्यक्ति को पौने दो करोड़ से दो करोड़ रुपये के बीच खर्च करना पड़ता है.
तुर्की की नागरिकता खरीदने के लिए करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये देने पड़ते हैं.
देश जहां खरीदी जा सकती है नागरिकता
पुर्तगाल: पाँच लाख यूरो (करीब साढ़े चार करोड़ रुपये)
ग्रीस : ढाई लाख यूरो (करीब दो करोड़ 28 लाख रुपये)
ग्रेनाडा: दो लाख 35 हज़ार यूरो (करीब 2 करोड़ 14 लाख रुपये)
तुर्की: चार लाख डॉलर ( करीब तीन करोड़ 50 लाख रुपये)
कनाडा: दो लाख 60 हज़ार डॉलर (दो करोड़ 26 लाख रुपये)
स्रोत: ला विडा गोल्डन वीज़ा
ट्रंप की प्रस्तावित योजना में क्या-क्या है?
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अमेरिका वर्ष 1990 में पांच श्रेणियों में वीज़ा प्रोग्राम लेकर आया था. इसे ईबी-1, ईबी-2, ईबी-3, ईबी-4 और ईबी-5 के नाम से जाना जाता है. इनमें ईबी-5 वीज़ा सबसे आसान रास्ता माना जाता था.
10 लाख डॉलर यानी करीब 8.75 करोड़ रुपए निवेश करके इसे कोई भी व्यक्ति ईबी-5 वीज़ा हासिल कर सकता था. शर्त यह थी कि निवेश से कम से कम 10 लोगों को रोज़गार पैदा हो.
डोनाल्ड ट्रंप ने नए वीज़ा के लिए रोज़गार संबंधी किसी ज़रूरत का ज़िक्र नहीं किया. उन्होंने कहा, ‘ये उन लोगों के लिए है, जिनके पास पैसे हैं.’
ईबी-5 वीज़ा की संख्या सीमित है. ट्रंप ने ये सुझाव दिया कि अमेरिकी प्रशासन अपने सरकारी घाटे को कम करने के लिए एक करोड़ ‘गोल्ड कार्ड्स’ बेच सकता है. उन्होंने कहा, “ये अच्छा हो, शायद ये शानदार होगा.”
हालांकि, अभी तक गोल्डन वीज़ा से जुड़ी जानकारियां स्पष्ट नहीं है. ये भी साफ़ नहीं है कि गोल्ड कार्ड वीज़ा होल्डर को नागरिकता पाने के लिए कितना इंतज़ार करना होगा. मौजूदा ईबी-5 योजना के लाभार्थी समेत ग्रीन कार्ड धारकों को आमतौर पर नागरिकता पाने के योग्य बनने से पहले पाँच साल तक अमेरिका में वैध स्थायी निवासी के तौर पर रहना पड़ता है.
ट्रंप ने कहा है कि उनकी इस नई योजना की जानकारी अगले दो सप्ताह के भीतर सामने आ जाएंगी.
होती है आलोचनाएं भी…
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इमेज कैप्शन, स्पेन के पीएम पेड्रो सांशेज़ ने कहा कि उनकी सरकार ये योजना ख़त्म करके सुनिश्चित करना चाहती है कि देश में घर होना महज़ कोराबार से जुड़ी चीज़ न होकर एक अधिकार है
पैसे के बदले नागरिकता पाने वाली इस तरह की योजनाएं आलोचनाओं में भी घिरती रही हैं.
ऑर्गनाइज़ेशन फ़ॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलेपमेंट ने साल 2023 में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें इस तरह की योजनाओं के लिए कहा गया था, “इससे विदेशी निवेश के ज़रिए आर्थिक विकास बढ़ाने में तो मदद मिलती है लेकिन ये अपराधियों और भ्रष्ट अधिकारियों के लिए सज़ा से बचने का भी एक ज़रिया है.”
दुनियाभर के 100 से अधिक देशों में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ काम कर रहे वैश्विक गैर सरकारी संगठन ट्रासपेरेंसी इंटरनेशनल ने चेताया है कि यूरोपीय संघ की योजनाएं “वास्तविक निवेश या प्रवासन के बारे में नहीं है बल्कि ये भ्रष्टों के हितों के लिए है.”
यूरोपीय संघ की कई इकाईयां भी ऐसी योजनाओं की आलोचना कर चुकी हैं. साल 2022 में ईयू कमिटी और सिविल लिबर्टीज़, जस्टिस एंड होम अफ़ेयर्स ने गोल्डन पासपोर्ट पर पाबंदी लगाने के हक में वोट किया था. साथ ही ऐसे मुल्कों को गोल्डन पासपोर्ट देने पर रोक की मांग की थी, जिनकी यूरोप में वीज़ा फ़्री एंट्री थी.
इस तरह की चिंताएं यूरोप के कई देशों में देखी गई. इनमें ब्रिटेन, स्पेन, नीदरलैंड्स,ग्रीस भी शामिल थे, जहां हालिया वर्षों में गोल्डन वीज़ा प्रोग्राम को वापस लेने की मांग उठी है.
उदाहरण के लिए स्पेन ने साल 2013 में शुरू किए गए ‘गोल्डन वीज़ा’ प्रोग्राम को अब ख़त्म कर दिया है. इसके तहत निवेशकों को सवा पाँच लाख डॉलर या उससे अधिक मूल्य की संपत्ति खरीदने के बदले में स्पेन का वीज़ा दे दिया जाता था. इस प्रोग्राम के ज़रिए नागरिकता के आवेदन की आख़िरी तारीख़ 3 अप्रैल 2025 है.
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांशेज़ ने बीते साल ये कहा था कि इस योजना को ख़त्म करने के पीछे उनकी सरकार की मंशा ये सुनिश्चित करने की थी कि “देश में घर होना एक अधिकार है और ये महज़ कोई कारोबार से जुड़ी चीज़ नहीं है.”
ब्रिटेन में लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस और अमेरिका में हार्वर्ड विश्वविद्यालय की ओर से यूरोपीय संघ के गोल्डन वीज़ा पर किए गए एक अध्ययन में भी इन योजनाओं के आर्थिक पहलू पर सवाल उठाया गया था. निष्कर्ष के तौर पर ये बताया गया था कि इन योजनाओं का आर्थिक प्रभाव एकदम न के बराबर है और ये विदेशी निवेश का भी एक छोटा हिस्सा होते हैं.
खोजी पत्रकारों के वैश्विक नेटवर्क ऑर्गनाइज़्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट की एक जाँच अक्तूबर 2023 में प्रकाशित हुई थी. इसमें भी ये उजागर हुआ था कि लीबिया के एक पूर्व कर्नल जिन पर युद्ध अपराध के आरोप थे और जेल की सज़ा पाने वाले तुर्क़ी के एक कारोबारी ने भी इन्हीं योजना के ज़रिए डॉमिनिका का पासपोर्ट हासिल किया था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित