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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की सुरक्षा और सेहत को लेकर चर्चा छिड़ी हुई है.
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि इमरान ख़ान को रावलपिंडी के अदियाला जेल से शिफ़्ट किया गया है और उनकी सेहत के बारे में उनके परिजनों तक को पता नहीं है.
ये चर्चाएं इसलिए भी छिड़ीं क्योंकि इमरान ख़ान की बहनों ने आरोप लगाया है कि जेल में उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है.
इमरान ख़ान के बेटे कासिम ख़ान ने भी दावा किया कि मुलाक़ात रोकी गई है. उन्होंने कहा, “न कोई फ़ोन कॉल, न कोई मुलाक़ात और न ही उनके जीवित होने का कोई सबूत. मैं और मेरे भाई, हम दोनों का अपने पिता से कोई संपर्क नहीं हुआ है.”
कासिम ख़ान ने उनकी रिहाई और उनके जीवित होने के सबूत दिए जाने की मांग की है.
उधर अदियाला जेल प्रशासन ने कहा है कि इमरान ख़ान स्वस्थ हैं.
पिछले दो साल से अधिक समय से पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं. इमरान ख़ान को 19 करोड़ पाउंड (लगभग 2 हज़ार करोड़ रुपए) के भ्रष्टाचार के एक मामले में अदालत ने सज़ा सुनाई है.
क्रिकेटर रहते हुए और फिर राजनीति में आने के बाद भी विवाद इमरान ख़ान के साथ साये की तरह जुड़े रहे.
इमरान ख़ान से जुड़े उन पांच वाकयों पर आइए नज़र दौड़ाते हैं जो काफ़ी चर्चा में रहे और उनसे विवाद भी पैदा हुआ.
जेमिमा गोल्डस्मिथ से शादी
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साल 1952 में जन्मे इमरान ख़ान के पिता एक सिविल इंजीनियर थे. चार बहनों और उनकी पढ़ाई लिखाई लाहौर में हुई है. बाद में वह ऑक्सफ़ोर्ड पढ़ने चले गए.
वह दो दशक तक पाकिस्तान की क्रिकेट टीम में रहे और 1992 में वर्ल्ड कप जीतने के बाद क्रिकेट से संन्यास ले लिया.
1995 में 43 की उम्र में इमरान ख़ान ने 21 साल की जेमिमा गोल्डस्मिथ से शादी की थी, जिनसे उनके दो बेटे हैं. जेमिमा और इमरान के बीच साल 2004 में तलाक़ हो गया था.
पाकिस्तानी दंपत्ति की बेटी रेहम का जन्म लीबिया में हुआ था.
रेहम की ज़्यादातर पढ़ाई ब्रिटेन में हुई और वो पेशे से पत्रकार थीं. साल 2008 में वह बीबीसी से भी जुड़ी थीं.
2018 में रेहम ने एक किताब लिखी जिसमें इमरान ख़ान की पार्टी पर कई आरोप लगाए गए थे.
बुशरा बीबी से शादी और विवाद
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पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के प्रभावशाली ज़मींदार परिवार से आने वाली बुशरा बीबी की शादी इमरान ख़ान से 2018 में हुई थी. इसे लेकर उस वक्त मिली-जुली प्रतिक्रिया रही थी.
इससे पहले वह 28 साल तक विवाहित जीवन बिता चुकी थीं. उनके पूर्व पति ने उन पर इस्लामिक क़ानूनों का पालन न करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि तलाक़ और फिर से शादी करने के बीच पर्याप्त समय नहीं लिया गया. उनका कहना था कि यह इस्लामिक क़ानूनों का उल्लंघन है.
इस मामले में इमरान ख़ान और बुशरा बीबी को सज़ा हुई लेकिन बाद में बरी कर दिया गया.
बुशरा बीबी सूफ़ी पंथ में आस्था रखती हैं और पार्टी के क़रीबी लोगों का मानना है कि पर्दे के पीछे इमरान ख़ान को सलाह देने में उनकी बड़ी भूमिका रही है. इमरान ख़ान उन्हें आध्यात्मिक गुरु मानते हैं.
लेकिन पीटीआई की राजनीति में उनका सार्वजनिक रूप से शामिल होना नया और विवादित भी रहा. कहा जाता है कि पीटीआई की राजनीति में उनका दख़ल बहुत अधिक है, ख़ासकर इमरान ख़ान के जेल जाने के बाद.
‘तालिबान ख़ान’
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इमरान ख़ान ने 1996 में पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) पार्टी बनाई.
एक राजनेता के रूप में इमरान ख़ान सार्वजनिक रूप से उदारवादी सोच का समर्थन करते थे, लेकिन साथ ही इस्लामी मूल्यों और पश्चिम-विरोधी भावनाओं को भी अपील करते थे.
प्रधानमंत्री रहते उनके कार्यकाल में पाकिस्तान में इस्लामवादी उग्रवाद में काफ़ी बढ़ोतरी हुई और धार्मिक उग्रवादियों ने अपनी स्थिति मज़बूत की.
उन्हें तालिबान के प्रति सहानुभूति रखने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा और विरोधियों ने उन्हें “तालिबान ख़ान” का लेबल भी दे दिया.
2020 में तब भारी विवाद पैदा हो गया जब उन्होंने ओसामा बिन लादेन को ‘शहीद’ बताया था.
‘छोटे कपड़ों’ वाले बयान पर विवाद
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहते इमरान ख़ान ने साल 2021 में ‘एचबीओ एक्सिओस’ को दिए एक इंटरव्यू दिया था.
इंटरव्यू कर रहे जोनाथन स्वॉन ने इमरान ख़ान से पाकिस्तान में बलात्कार पीड़िता को ही कसूरवार ठहराए जाने के चलन के बारे में भी सवाल पूछा.
इस पर इमरान ख़ान ने जवाब दिया कि “अगर कोई महिला बहुत कम कपड़े पहनती है, तो इसका असर मर्द पर पड़ेगा.”
इस बयान पर काफ़ी विवाद हुआ और विपक्षी नेता, पत्रकार और आम लोग सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना की.
इससे कुछ महीने पहले इमरान ख़ान ने पाकिस्तान में यौन हिंसा में बढ़ोतरी के लिए अश्लीलता को ज़िम्मेदार ठहराया था.
साल 4 अप्रैल 2021 को उन्होंने एक टेलीथॉन के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा था, “आज जिस समाज में फ़हश (अश्लीलता) बढ़ते हैं, वहाँ कुछ तो इसका असर होगा न.”
उन्होंने कहा, “हमारे दीन में क्यों मना किया गया है? ये सारा जो पर्दे का कॉन्सेप्ट है, ये क्या है? कि टेम्पटेशन न हो मशारे में. हर इंसान में विल पावर नहीं होता. यही कारण है कि हमारे धर्म में अपने शरीर को ढकने पर जोर डाला जाता है और लज्जा क़ायम रखी जाती है ताकि समाज प्रलोभन को काबू में रखे. सभी के पास ख़ुद को कंट्रोल करने की ताक़त नहीं होती.”
उस समय देश के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने इमरान ख़ान के इन विचारों को महिलाओं के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित बताया था.
ईसा मसीह के बारे में बयान
इमरान ख़ान ने 2018 में यह कह कर एक और विवाद पैदा कर दिया था कि ईसा मसीह का इतिहास में कोई वजूद नहीं है.
इमरान ख़ान ने एक कॉन्फ़्रेंस में कहा था कि ‘बाक़ी पैग़ंबर अल्लाह की ओर से आए थे लेकिन इतिहास में उनका ज़िक्र ही नहीं है. बड़ा कम ज़िक्र है. हज़रत मूसा का है, मगर हज़रत ईसा का इतिहास में ज़िक्र नहीं है.’
इसके बाद पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना शुरू हो गई थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.