गुजरात के सूरत शहर में करीब 80 मकानों को गिराए जाने की घटना के 10 दिन से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह कार्रवाई किसने की। नगर निगम ने इसमें अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है, जबकि स्थानीय निवासियों ने इस कार्रवाई को अवैध बताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
सूरत नगर निगम (एसएमसी) ने झुग्गी बस्ती में स्थित इन झोपड़ियों को ढहाए जाने की घटना की जांच के आदेश दिए हैं। विपक्षी कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई सत्तारूढ़ भाजपा के इशारे पर एक बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए की गई, जो इस जमीन पर परियोजना लाना चाहता है। पार्टी ने इसमें भ्रष्ट अधिकारियों और पुलिस की भूमिका होने का भी दावा किया।
उपमहापौर बोले- दोषियों के खिलाफ होगी कार्रवाई
एसएमसी के उपमहापौर सुधाकर चौधरी ने मंगलवार को कहा कि नगर आयुक्त एन. नागराजन ने 30 मई को सूरत के वेड दरवाजा क्षेत्र स्थित नासिरनगर झुग्गी बस्ती में की गई तोड़फोड़ की जांच के आदेश दिए हैं। चौधरी ने कहा, “हमने इस मुद्दे पर नगर आयुक्त के साथ औपचारिक चर्चा की। उन्होंने जांच के आदेश दिए हैं और आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”
एसएमसी की स्थायी समिति के अध्यक्ष राजन पटेल ने कहा कि नगर निगम को इस तोड़फोड़ की जानकारी मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से मिली थी। उन्होंने दावा किया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मकानों को गिराने में निगम की कोई भूमिका नहीं थी।
नगर निगम के अधिकारी-पुलिस थी मौजूद, लेकिन पता नहीं किसने की तोड़फोड़?
पटेल ने कहा, “मुझे इस तोड़फोड़ की जानकारी मीडिया से मिली। हमारी प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इसमें एसएमसी की कोई भूमिका नहीं थी। उस दिन हमारे अधिकारी पुलिस सुरक्षा के बीच सड़क के सीमांकन के लिए वहां गए थे। यह जांच का विषय है कि आखिर तोड़फोड़ किसने की।” पटेल ने कहा, “मैंने नगर आयुक्त से इस तोड़फोड़ की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।”
नासिर नगर के एक निवासी ने सोमवार को गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस तोड़फोड़ अभियान को चुनौती दी और आरोप लगाया कि “कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।” जिस निवासी का घर अभी नहीं गिराया गया है, उसने तोड़फोड़ पर रोक लगाने की मांग करते हुए एक दीवानी आवेदन दायर किया है।
गुजरात हाईकोर्ट पहुंचा मामला
याचिका के अनुसार, 30 मई को कथित तौर पर पुलिस सुरक्षा के बीच करीब 80 मकान गिरा दिए गए, जिससे कई परिवार रातोंरात बेघर हो गए। कांग्रेस नेता और पूर्व पार्षद असलम साइकिलवाला ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई सत्तारूढ़ भाजपा के कहने पर एक बिल्डर के हित में की गई, जिसकी नजर इस जमीन पर प्रस्तावित परियोजना के लिए है।
साइकिलवाला के अनुसार, झुग्गी बस्ती में मौजूद 111 मकानों में से 84 को 30 मई को गिरा दिया गया। उन्होंने कहा कि इनमें से अधिकांश मकान 40 से 50 वर्ष पुराने हैं और सभी मकान एसएमसी को संपत्ति कर का भुगतान करते हैं।
उन्होंने कहा कि नगर निगम दावा कर रहा है कि उसने यह कार्रवाई नहीं की। जब अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पुलिस के पास गए, तो पुलिस ने शिकायत लेने से इनकार कर दिया और कहा कि यह कार्रवाई एसएमसी ने की है। उनका आरोप है कि स्थानीय लोगों ने बताया कि मकान गिराए जाने के दौरान नगर निगम के कुछ अधिकारी भी वहां मौजूद थे।
भाजपा पर लगे गंभीर आरोप
साइकिलवाला ने दावा किया कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह जमीन आंशिक रूप से एसएमसी और आंशिक रूप से एक पारसी परिवार की है। उन्होंने आरोप लगाया, “तोड़फोड़ शुरू होने से पहले लोगों को परिसर खाली करने के लिए सिर्फ एक घंटे का समय दिया गया था।”
साइकिलवाला ने कहा, “कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना इन मकानों को अवैध तरीके से गिराया गया। यह स्पष्ट है कि भाजपा से जुड़े एक बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए इसमें भ्रष्ट अधिकारी और पुलिस शामिल थे।”