जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के विदेश मंत्रियों की नई दिल्ली में रविवार को हुई बहुप्रतीक्षित बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के मौजूदा अवरोधों को समाप्त करने व एक दूसरे के प्रति भरोसे को और मजबूत करने को लेकर अहम विमर्श हुआ। ट्रंप टैरिफ के बाद आए तनाव के बाद रिश्तों में अब गर्मजोशी दिखी है।
चार दिवसीय यात्रा पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम देने के करीब है और जल्द ही यह समझौता हो सकता है। यह दोनों के लिए लाभदायक और टिकाऊ होगा और आपसी हितों को आगे बढ़ाएगा।
जयशंकर ने ग्रीन कार्ड समेत अमेरिकी वीजा और आव्रजन के नियमों में उन बदलावों की तरफ ध्यान दिलाया जिसके सबसे ज्यादा शिकार भारतीय पेशेवरों और भारतीय उद्योग जगत को होने की आशंका है।
जयशंकर ने कहा कि इस नए दृष्टिकोण से विधि सम्मत आवाजाही पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ना चाहिए। रूबियो और जयशंकर के बीच रविवार को लंबी बैठक हुई। इसका मुख्य जोर व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा, सीमा पार आतंकवाद और रक्षा के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ावा देने पर था।
पीटीआई के अनुसार, संयुक्त प्रेस वार्ता में रूबियो ने कहा, “हमारे व्यापार प्रतिनिधि बहुत जल्द यहां आएंगे। हाल में भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका में था। हमने जबरदस्त प्रगति की है।’ जयशंकर ने कहा, ‘हमने आपसी और परस्पर लाभकारी व्यापार से जुड़े अंतरिम समझौते के अंतिम मसौदे को जल्द से जल्द पूरा करने के महत्व पर बात की है। यह व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।’
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रूबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति का उद्देश्य वैश्विक व्यापार के प्रति अमेरिका के समग्र दृष्टिकोण को फिर संतुलित करना है, न कि किसी विशेष देश को निशाना बनाना। पुनर्संतुलन संतुलन के जरिये हम दुनियाभर में ऐसे व्यापारिक समझौते करना चाहते हैं, जो अमेरिका के साथ-साथ व्यापारिक साझीदारों के लिए भी अच्छे हों। उम्मीद है कि इन साझीदारों में से एक भारत भी होगा।
रूबियो ने भारत को एक विशाल अर्थव्यवस्था और अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझीदारों में से एक बताया। भारत ने ट्रंप प्रशासन की तरफ से कई बार भारतीय उत्पादों पर शुल्क लगाने का मुद्दा भी उठाया।
जागरण ब्यूरो के अनुसार, रूबियो ने स्वीकार किया कि अमेरिका अपनी आव्रजन नीतियो में सुधार कर रहा है जिसकी वजह से तत्कालिक तौर पर परेशानी हो सकती है। उन्होंने भारत को प्रमुख शक्ति बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों की निरंतरता नहीं घटी है। आने वाले वर्षों में भारत-अमेरिका संबंध और मजबूत होंगे।
साथ ही स्पष्ट किया कि आव्रजन प्रणाली में वर्तमान सुधार प्रक्रिया का निशाना भारत बिल्कुल भी नहीं है। अमेरिका में प्रवासन संकट रहा है, लेकिन यह भारत के कारण नहीं, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में लगभग दो करोड़ से अधिक लोग अवैध रूप से अमेरिका में घुसे हैं। हमने इस चुनौती का सामना किया है।
जयशंकर ने कहा, ‘भारत अवैध व अनियमित आवाजाही से निपटने में सहयोग करता है, लेकिन अपेक्षा है कि इसके परिणामस्वरूप कानूनी आवाजाही पर प्रतिकूल असर न पड़े। आखिरकार व्यापार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान सहयोग के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है।”
भारतीयों पर नस्ली टिप्पणियों पर बोले रूबियो- हर देश में होते हैं मूर्ख
जागरण ब्यूरो के अनुसार, अमेरिका में भारतीयों के विरुद्ध नस्ली टिप्पणियों के बारे में रूबियो ने कहा, “मैं इन टिप्पणियों को बेहद गंभीरता से लूंगा। कुछ लोग ऐसे होंगे जिन्होंने ऑनलाइन या अन्य जगहों पर ऐसी टिप्पणियां की होंगी, क्योंकि दुनिया के हर देश में मूर्ख लोग होते हैं। यहां भी मूर्ख लोग हैं; अमेरिका में भी ऐसे मूर्ख लोग हैं जो हर समय मूर्खता भरी टिप्पणियां करते रहते हैं।”
उन्होंने कहा, “हमारा देश उन लोगों से समृद्ध हुआ है जो दुनियाभर से हमारे देश में आए, अमेरिकी बन गए, हमारी जीवनशैली में घुलमिल गए और देश के विकास में अपना अमूल्य योगदान दिया।”
पांच बिंदुओं के जरिये बताया भारत का रुख
पीटीआई के अनुसार, जयशंकर ने पांच बिंदुओं के जरिये भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट किया।
- हम संघर्षों को सुलझाने के लिए बातचीत व कूटनीति का समर्थन करते हैं।
- हम सुरक्षित व निर्बाध समुद्री व्यापार का समर्थन करते हैं।
- हम अंतरराष्ट्रीय कानून के पूर्ण अनुपालन की मांग करते हैं।
- हम बाजार हिस्सेदारी व संसाधनों को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के विरुद्ध हैं।
- हम वैश्विक अर्थव्यवस्था को जोखिम-मुक्त बनाने के लिए भरोसेमंद साझेदारियों व मजबूत आपूर्ति शृंखला के महत्व में विश्वास रखते हैं।
जयशंकर ने बताया, भारत के क्यों जरूरी हैं ऊर्जा के कई स्रोत
भारत और अमेरिका के विदेश मंत्रियों की बैठक में ऊर्जा खरीद पर खास चर्चा हुई, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव के बाद भारत अमेरिका से बड़े पैमाने पर ऊर्जा आयात कर रहा है और अमेरिका इसे और बढ़ाना चाहता है। सूत्रों के अनुसार, जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को काफी नुकसान पहुंचाया है और आर्थिक मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
उन्होंने भारत के लिए ऊर्जा के कई स्रोत होने के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि ऊर्जा बाजार “विकृत” नहीं होना चाहिए। प्रेट्र के अनुसार, जयशंकर ने कहा भारत उन बहुत कम देशों में से एक है जिसके अमेरिका, इजरायल, ईरान और खाड़ी देशों के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं। इसलिए वहां भारत का वास्तविक हित जुड़ा है।
सोमवार को क्वाड बैठक के संदंर्भ में विदेश मंत्री ने कहा कि समय बीतने के साथ-साथ हिंद-प्रशांत और भी अधिक महत्वपूर्ण होता जाएगा। यह ऊर्जा की एक बड़ी जीवनरेखा बन जाएगा। रूबियो ने अमेरिका समर्थित ‘पैक्स सिलिका’ पहल में भारत के शामिल होने का भी जिक्र किया।
दिसंबर में शुरू हुई इस पहल का मकसद अहम खनिजों व एआई के लिए एक सुरक्षित, मजबूत और इनोवेशन पर आधारित आपूर्ति शृंखला तैयार करना है।
जागरण ब्यूरो के अनुसार, रूबियो ने भारत को अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया और कहा कि दोनों देश पक्ष कई अहम मुद्दों पर एकमत हैं।
वहीं, जयशंकर ने रूबियो का स्वागत करते हुए कहा, हमारे बीच बहुत गहरी व व्यापक आधार वाली सहयोग व्यवस्था है और ऐसे संबंध हैं जो दुनिया के अन्य क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं व उन पर असर डालते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कई मुद्दों पर एवं दुनिया के कई हिस्सों में हमारे हित एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।’
पीटीआई के अनुसार, चीन और पाकिस्तान के साथ अमेरिका की बढ़ती गर्मजोशी के बारे में रूबियो ने कहा कि वॉशिंगटन दूसरे देशों के साथ अपने जुड़ाव को भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी की कीमत पर नहीं देखता। अमेरिका दुनियाभर के देशों के साथ रणनीतिक स्तर पर और कई दूसरे तरीकों से काम करता है; भारत समेत जिम्मेदार राष्ट्र यही करते हैं।
एक अलग सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा कि जहां अमेरिका अपनी विदेश नीति को “अमेरिका फर्स्ट” के आधार पर आगे बढ़ा रहा है, वहीं भारत का दृष्टिकोण “इंडिया फर्स्ट” है। जाहिर है कि दोनों अपने-अपने राष्ट्रीय हितों से प्रेरित हैं।
डोभाल से भी मिले रूबियो
जागरण ब्यूरो के अनुसार, रुबियो ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। रविवार को जयशंकर के साथ बैठक के बाद उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के साथ भी लगभग एक घंटे तक बैठक की। इन दोनों बैठकों में कई द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई है।
इसमें पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष, भारतीय उपमहाद्वीप की स्थिति, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आपसी सहयोग के एजेंडे के अलावा परमाणु ऊर्जा संबंधों को नई गति देने और ऊर्जा सहयोग को बढ़ाने का मुद्दा खास तौर पर अहम रहा है। डोभाल के साथ वार्ता में आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग के मौजूदा मजबूत ढांचे का विस्तार का एजेंडा भी शामिल रहा है