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शादी कोई ज़बरदस्‍ती बचाने की चीज़ नहीं है- ब्लॉग

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May 24, 2026


शादी दो लोगों की भागीदारी और साझेदारी है तो चलाने-बचाने का ज़‍िम्‍मा दोनों पर है  (प्रतीकात्मक तस्वीर)

इमेज स्रोत, AFP via Getty Images

इमेज कैप्शन, शादी दो लोगों की भागीदारी और साझेदारी है तो चलाने-बचाने का ज़‍िम्‍मा दोनों पर है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

शादी कोई ज़बरदस्‍ती बचाने की चीज़ नहीं है. न ही शादी बचाने का ज‍िम्‍मा एक शख्‍़स पर है. शादी दो लोगों की भागीदारी और साझेदारी है तो चलाने-बचाने का ज़‍िम्‍मा दोनों पर है.

इसल‍िए शादी बचाने, घर बसे रहने या घर टूटने से बचाने के मामले में बेट‍ियों-बहनों या क‍िसी भी स्‍त्र‍ी का एक के बाद एक ज़‍िंदगी गंवाते जाना जुर्म है. इस जुर्म के हम सब मुजर‍िम हैं.

द‍िल्‍ली के पास नोएडा में दीपि‍का नहीं रहीं. भोपाल में त्‍व‍िषा नहीं रहीं. कर्नाटक के बेल्‍लारी में एश्‍वर्या की जान चली गई. द‍िल्‍ली की वीणा कुमारी भी नहीं रहीं. यह सब चंद द‍िनों के अंदर की ख़बरें हैं.

अपनी दास्‍ताँ बताने के ल‍िए न‍िक्‍की भी कुछ महीने पहले ही इस दुन‍िया में नहीं रहीं. उनसे पहले लखनऊ में मधु अपने घर में मरी हुई म‍िलीं.

ये सब युवा थीं. कुछ महीनों की शादीशुदा ज़‍िंदगी थीं. ख़बरों की मानें तो इनमें से क‍िसी की मौत क़ुदरती नहीं है. असामान्‍य है.

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