हजारीबाग हिंसा के बाद धारा 163 लगाई गई
यह सब तब शुरू हुआ जब एक समूह ने दूसरे समूह के सदस्यों द्वारा इचाक थाना क्षेत्र के डुमरांव गांव में एक स्कूल के सामने धार्मिक झंडे और लाउडस्पीकर लगाने पर आपत्ति जताई। पुलिस ने बताया कि पहले दोनों समूह में बहस हुई जो हिंसा में बदल गई और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पथराव कर दिया। कई दोपहिया वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया।
हजारीबाग में स्थिति नियंत्रण में- पुलिस
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पर्याप्त सुरक्षा बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और समूहों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया गया। पुलिस ने बताया कि स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘कानून व्यवस्था नियंत्रण में है। हम लोगों से महाशिवरात्रि को शांतिपूर्ण तरीके से मनाने की अपील करते हैं।’
झारखंड में ही क्यों होती हैं ऐसी घटनाएं- रांची सांसद
घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रक्षा राज्य मंत्री और रांची के सांसद संजय सेठ ने हिंसा के लिए बांग्लादेशी घुसपैठियों को जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उन्हें बाहर निकालने के लिए कड़े कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने आरोप लगाया, ‘चाहे होली हो, सरस्वती पूजा हो, रामनवमी हो या महाशिवरात्रि हो ऐसी घटनाएं केवल झारखंड में ही क्यों होती हैं? ऐसा इसलिए है क्योंकि बांग्लादेश से घुसपैठिए यहां सांप्रदायिक सद्भाव और कानून-व्यवस्था को नष्ट करने पर तुले हुए हैं और राज्य की जनसांख्यिकी को बदल रहे हैं।’
रांची सांसद का हेमंत सरकार पर निशान
संजय सेठ ने कहा, ‘भाजपा-NDA शासित राज्यों में ऐसी घटनाएं बहुत कम होती हैं, चाहे वह दिल्ली हो, असम हो, मध्य प्रदेश हो, महाराष्ट्र हो या उत्तर प्रदेश हो, क्योंकि वहां घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें बाहर निकाल दिया जाता है।’