डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, महत्वपूर्ण तकनीक और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने पर खास जोर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच सहयोग को और व्यापक बनाने पर चर्चा हुई।
मार्को रूबियो अपने भारत दौरे के दौरान सोमवार को आगरा और जयपुर भी जाएंगे। इसके बाद वह मंगलवार सुबह नई दिल्ली लौटेंगे और क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के रिश्तों में पिछले कुछ समय से नई सक्रियता दिखाई दे रही है।
रूबियो की यह यात्रा विदेश सचिव विक्रम मिसरी के हालिया वाशिंगटन दौरे के करीब पांच सप्ताह बाद हो रही है। उस दौरे का उद्देश्य भारत-अमेरिका संबंधों में आई तल्खी को कम करना और सहयोग को स्थिर करना था।
भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी पर जोर
संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में मार्को रूबियो ने भारत को अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और यही साझा लोकतांत्रिक मूल्य दोनों देशों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं।
रूबियो ने कहा कि रणनीतिक साझेदारी केवल सामान्य संबंध नहीं होती, बल्कि यह वह रिश्ता होता है जिसमें दो देशों के हित एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और दोनों मिलकर वैश्विक चुनौतियों का समाधान तलाशते हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका कई क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं और आने वाले समय में यह सहयोग और मजबूत होगा।
जयशंकर ने बताया रिश्तों का आधार
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के साझा राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मार्को रूबियो की मुलाकात में वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
जयशंकर ने कहा कि उनकी बातचीत में पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप, पूर्वी एशिया और यूक्रेन संघर्ष जैसे मुद्दे शामिल रहे। उन्होंने हाल ही में अपनी कैरेबियाई देशों की यात्रा के अनुभव भी रूबियो के साथ साझा किए।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच लगातार संपर्क और संवाद ने द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत किया है। जयशंकर ने बताया कि रूबियो के कार्यभार संभालने के पहले दिन से ही दोनों नेताओं के बीच लगातार बातचीत होती रही है, जिससे भारत-अमेरिका संबंधों को नई गति मिली है।