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’14 साल की उम्र में इतनी ताक़त, अकल्पनीय’
‘बच्चे जैसी शक्ल और भरपूर ताक़त’
‘बच्चा नहीं फ़ायर है’
ये उन बेशुमार सोशल मीडिया कमेन्ट्स में से कुछ प्रतिक्रियाएं हैं जो भारतीय क्रिकेट की नई सनसनी 14 साल के वैभव सूर्यवंशी के बारे में हैं.
मेंस अंडर 19 वर्ल्ड कप फ़ाइनल में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ शुक्रवार को वैभव सूर्यवंशी ने जो कारनामा किया उससे उन्होंने एक बार फिर क्रिकेट फ़ैंस को अपना मुरीद बना लिया.
सिर्फ़ 80 गेंदों पर तूफ़ानी 175 रन, यानी क़रीब 219 का स्ट्राइक रेट, 15 छक्के और 15 चौकों के साथ.
सूर्यवंशी की इस विस्फोटक इनिंग्स की वजह से हरारे में खेले जा रहे इस मैच में भारतीय टीम ने 50 ओवर में 411 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर लिया.
सूर्यवंशी ने ऐरन जॉर्ज के साथ पारी की शुरुआत की और मैदान के चारों तरफ़ स्ट्रोक्स लगाए.
उनके छक्कों को देखकर, उनके कंधों की ताक़त को देखकर क्रिकेट विशेषज्ञ हैरान रह गए.
क्रिकेट कमेंटेटेर हर्षा भोगले ने एक्स पर लिखा, “आज मैंने जो देखा, उस पर यक़ीन करना मुश्किल था. यह लड़का, और सच में यह एक लड़का ही है-वाक़ई ग़ज़ब का है.”
पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने लिखा, “आज उसने सच में एक सूरज की तरह बल्लेबाज़ी की. तेज़, चकाचौंध करने वाली, और रोकी न जा सकने वाली बैटिंग. इंग्लैंड के गेंदबाज़ों ने हर कोशिश की, लेकिन सूरज को कोई नहीं रोक सकता.”
क्रिकेटर शिखर धवन ने लिखा, “वैभव सूर्यवंशी की क्या पारी रही. वर्ल्ड कप फ़ाइनल में 80 गेंदों पर 175 रनों की दबदबे वाली पारी वाक़ई असाधारण है. पूरे दिन इरादा, ताक़त और टाइमिंग साफ़ दिखी.”
वेस्टइंडीज़ के पूर्व क्रिकेटर और अब कमेंटेटर इयान बिशप ने लिखा, “जो लोग वैभव सूर्यवंशी को जानते हैं, वे जानते हैं कि वह ख़ास है. आज उसने इसे फिर साबित कर दिया. 80 गेंदों पर 175 रन, जिसमें 15 चौके और 15 छक्के शामिल हैं. बाउंड्री से ही 150 रन.”
नीरज नाम के एक यूज़र ने लिखा, “14 साल की उम्र में इतनी ताक़त, अकल्पनीय”
2025 में धमाकेदार प्रदर्शन
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साल 2025 के दिसंबर महीने में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच खेले गए अंडर 19 एशिया कप के एक मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने 95 गेंदों पर 171 रन की शानदार पारी खेली थी.
इस पारी में वैभव ने 14 छक्के और 9 चौके लगाए थे.
दिसंबर महीने में ही वैभव ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफ़ी में महाराष्ट्र के खिलाफ कोलकाता के ईडन गार्डन मैदान में शानदार शतक लगाया था. वैभव ने 61 गेंदों पर 108 रनों की पारी खेली थी.
इसी के साथ सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफ़ी में शतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के बल्लेबाज बन गए थे. उस वक्त उनकी उम्र 14 साल 250 दिन थी.
वैभव सूर्यवंशी ने इंडिया ए की तरफ से यूएई के खिलाफ एसीसी मेन्स एशिया कप राइजिंग स्टार कप 2025 के एक मुकाबले में 42 गेंदों पर 144 रनों की शानदारी पारी खेली थी. इसमें उन्होंने 11 चौके और 15 छक्के लगाए थे.
साल 2025 में बिहार की तरफ से विजय हजारे ट्रॉफी के एक मैच में उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के ख़िलाफ़ 84 गेंदों पर 190 रनों की पारी खेली थी. इस पारी में उन्होंने 15 छक्के और 16 चौके लगाए थे.
इसी के साथ वे लिस्ट एक क्रिकेट में शतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए थे.
उन्होंने इस मैच 36 गेंदों पर शतक लगाया था.
सूर्यवंशी ने एबी डिविलियर्स के 64 गेंदों पर 150 रन बनाने के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया था. उन्होंने यह आंकड़ा महज 49 गेंदों पर पार कर लिया था.
आईपीएल में दिखाया जलवा

28 अप्रैल 2025 का दिन टी-20 क्रिकेट के इतिहास में वास्तव में एक चमकते दिन के तौर पर दर्ज हो गया.
उस दिन राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए वैभव सूर्यवंशी ने गुजरात टाइटंस के ख़िलाफ़ सिर्फ़ 35 गेंदों पर शतक बना दिया. उन्होंने 11 छक्के और सात चौके लगाए. उसी पारी से वो चर्चा में आए.
उनकी असाधारण प्रतिभा सबके सामने थी. उनके प्रदर्शन को क्रिकेट की दुनिया आश्चर्यचकित होकर देख रही थी. उसे यकीन ही नहीं हो रहा था प्रतिभा का ऐसा भी विस्फोट हो सकता है.
गोल चेहरे वाले 14 वर्षीय बल्लेबाज़ी वैभव सूर्यवंशी की राशिद ख़ान, मोहम्मद सिराज, इशांत शर्मा और प्रसिद्ध कृष्णा जैसे गेंदबाजों के ख़िलाफ़ अभूतपूर्व आक्रामक बैटिंग देख कर क्रिकेट प्रेमियों ने दांतों तले उंगलियां दबा ली थीं.
फिर उन्होंने पंजाब किंग्स के ख़िलाफ़ 40 और फिर चेन्नई सुपर किंग्स के ख़िलाफ़ 57 रन की पारियां खेल कर उसने अपने प्रदर्शन को पुख़्ता किया.
वैभव की पारियों को देखने के बाद भारतीय टीम के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज़ सबा करीम कहते हैं, ”मैंने वैभव की यूथ टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ अंडर-19 और कुछ दूसरी पारियों के वीडियो हाइलाइट्स देखे थे. ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ उस मैच में उन्होंने 58 गेंदों में 100 रन बनाए थे. इसे देखने के बाद ही मैं समझ गया था कि इस बच्चे में ख़ास प्रतिभा है.”
वैभव की प्रतिभा के बारे में वो कहते हैं, ”मैं उनसे धुआंधार शतक की उम्मीद तो नहीं कर रहा था. लेकिन इस 14 साल को बल्लेबाज़ 145 किलोमीटर प्रति घंटा से भी ज्यादा रफ़्तार से फेंकी गई बेहद उम्दा गेंदों के ख़िलाफ़ खेलते देखना एक शानदार अनुभव था.”
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सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली जैसी दो असाधारण प्रतिभाओं के साथ टेस्ट क्रिकेट खेल चुके प्रवीण आमरे भी वैभव के प्रदर्शन को लेकर अपने उत्साह को छिपा नहीं पाते.
वो कहते हैं,”वैभव के खेल में जो चीज मुझे सबसे पसंद है वो है टाइमिंग. चाहे आप नए बल्लेबाज़ हों या फिर अनुभवी, बैटिंग पूरी तरह टाइमिंग का मामला है. उस दिन वैभव ने दिखाया उसकी टाइमिंग कितनी बेहतरीन है. वो जानता है कि चौका-छक्का कैसे मारा जाए. उससे भी ज्यादा वो ये जानता है कि गेंदबाजों पर हावी होकर कैसे खेला जाए.”
वैभव के कोच और बिहार के रणजी बल्लेबाज़ रह चुके मनीष ओझा कहते हैं, ”मुझे अच्छी तरह वो दिन याद है जब वैभव और उनके पिता संजीव पहली बार 2018 में मेरी एकेडमी में आए थे. सात साल की उम्र में भी वैभव का लक्ष्य साफ था कि उसे एक दिन देश के लिए खेलना है. उनके पिता के अंदर भी ये बात साफ़ थी. पहले ही दिन मैंने वैभव से कुछ ड्रिल करवाई और फिर नेट पर बैटिंग करने के लिए कहा. मैंने वैभव को उनकी उम्र के हिसाब असाधारण तौर पर प्रतिभाशाली पाया.”
कड़ी मेहनत का सफ़र
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और फिर शुरू हुआ बेमिसाल बलिदान और कड़ी मेहनत का सफ़र.
पटना के बाहरी इलाके में जेन-नेक्स्ट क्रिकेट एकेडमी चलाने वाले एनसीए लेवल-2 कोच मनीष कहते हैं, ”वैभव की मां हर दिन तड़के दो बजे उठकर बेटे और पिता के लिए खाना बनाती थीं. साढ़े सात बजे एकेडमी पहुंचने के लिए दोनों चार बजे सुबह घर छोड़ देते थे. और फिर वैभव की ट्रेनिंग दोपहर बाद तीन से चार बजे तक चलती थी. इस दौरान उनके पिता अपनी कार में पूरे धैर्य के साथ बैठे रहते,अपने बेटे को मशक्कत करते देखते हुए.”
बाएं हाथ की ये बैटिंग प्रतिभा एकेडमी में सप्ताह में तीन से चार-दिन इस तरह की ट्रेनिंग करती थी.
ट्रेनिंग के दौरान दोनों पिता-पुत्र 90 किलोमीटर की यात्रा करते. समस्तीपुर के एक गांव ताजपुर से पटना के बाहरी इलाके में बने कोचिंग एकेडमी तक. और अगले पांच साल तक दोनों का ये रूटीन बदस्तूर जारी रहा.
और इतना सब भी शायद काफ़ी नहीं था. संजीव ने अपने कम उम्र के इस असाधारण प्रतिभाशाली बच्चे के लिए घर के सामने ही प्रैक्टिस नेट लगवा दिए थे ताकि उसकी प्रतिभा और निखर सके.
मनीष कहते हैं, ”मुझे पिता-पुत्र की एक बात बिल्कुल अलग लगी. दोनों में पूरा आत्मविश्वास था और वो बिना रुके अपने सपने को पूरा करने की राह पर थे. मेरे सामने ऐसा पहला उदाहरण था.”
शुरुआती संकेत
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सात साल की उम्र में भी वैभव की टाइमिंग बेदाग दिख रही थी.
मनीष कहते हैं,”जब वो (वैभव) मेरे पास आए तो मैंने उनके खेल में दो-तीन ख़ासियतें देखीं. उनके पास ज़बरदस्त टाइमिंग थी. शॉट लगाते वक़्त उनकी बॉडी का बैलेंस अच्छा रहता. उनके पास स्ट्रोक की बड़ी रेंज थी. हालांकि ताक़त और प्लेसमेंट की कमी थी. क्योंकि उस समय उम्र भी काफी कम थी. लेकिन उनमें जल्दी सीखने की क्षमता और बैटिंग की कभी न ख़त्म होने वाली भूख थी.”
वो कहते हैं, ”कई बार मैं एक ही दिन में उनसे किसी ख़ास शॉट को 400 बार खेलने के लिए कहता. वो भी अलग-अलग तरह से. कभी थ्रो डाउन के तौर पर तो कभी मशीन की बॉलिंग के तौर पर. या फिर कभी मैच सिम्युलेशन में. यानी मैच की तरह की परिस्थिति में. आइडिया ये था कि हर शॉट को इतनी बार खेला जाए कि वो वैभव की मसल मेमोरी का हिस्सा बन जाए.”
28 अप्रैल 2025 का दिन टी-20 क्रिकेट के इतिहास में वास्तव में एक चमकते दिन के तौर पर दर्ज हो गया.
उस दिन क्रिकेट प्रेमियों ने एक टीनएजर बल्लेबाज़ को महज 35 गेंदों में शानदार शतक बनाते देखा.
यानी वैभव उस दिन अपनी विस्फोटक पारी की बदौलत ऐसा करने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के बल्लेबाज़ बन गए.
ये तो एक दिन होना ही था. संजीव और मनीष ने इसके संकेत काफी पहले देख लिए थे.
मनीष कहते हैं, ”2022 में हमारी एकेडमी में एक मैच खेला गया था. वैभव विरोधी टीम की गेंदबाजी का सामना कर रहे थे. इसमें रणजी और अंडर-23 में खेलने वाले कुछ तेज गेंदबाज़ थे.लेकिन वैभव ने उनके ख़िलाफ़ बेख़ौफ़ खेलते हुए 118 रन बनाए थे. उस पारी की ख़ास बात ये थी कि वैभव के लगाए सभी छक्के 80-90 मीटर लंबे थे.”
वो बताते हैं ” दूसरी पारी अंडर-19 में ऑस्ट्रेलियाई टीम के ख़िलाफ़ यूथ टेस्ट मैच में खेली गई थी. सितंबर 2024 में खेली गई इस पारी वैभव ने 62 गेंदों पर पर 104 रन बनाए थे. इस शानदार पारी को देखकर मैंने वैभव के पिता संजीव से कहा था कि वैभव जो कर रहे हैं वो तो नॉर्मल बैटिंग नहीं है. ये सितारों का खेल है जो उनसे असाधारण तरीके से बैटिंग करवा रहा है. ये भगवान का आशीर्वाद है.”
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वो कहते हैं, ”मुझे इस बात की काफी खुशी है कि वैभव राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेल रहे हैं जिसमें राहुल द्रविड़, विक्रम राठौर, साईराज बहुतुले और ज़ुबिन भरूचा जैसे कोच हैं. उन्होंने युवा खिलाड़ियों के आगे बढ़ने के लिए बिल्कुल सही माहौल बना रखा है. वो इन खिलाड़ियों के खेल को निखारने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं.”
युवा खिलाड़ियों के करियर की शायद सबसे बड़ी चुनौती ये है कि इतनी असरदार शुरुआत के बाद वो आगे भी अपने फोकस को बना कर रख पाएंगे या नहीं?
प्रवीण आमरे कहते हैं, ”एक अच्छा रूटीन बेहद अहम है. वैभव को अच्छा रूटीन तैयार करना होगा और अनुशासित होकर अपनी बेहतरीन प्रतिभा के साथ न्याय करना होगा. मैदान के बाहर वो जो करेंगे वो उनके खेल में बाधा नहीं बनना चाहिए. इससे उनका रूटीन प्रभावित नहीं होना चाहिए. मैंने कई ऐसे खिलाड़ी देखे हैं जो वैभव से अधिक प्रतिभाशाली थे लेकिन उन्होंने अपना फोकस खो दिया. हम नहीं चाहते कि इस बच्चे के साथ भी ऐसा हो.”
(अनुपम प्रतिहारी की अतिरिक्त रिपोर्टिंग के साथ)
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित