डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अंतरिक्ष में जाने वाले पहले सिख व्यक्ति ने 80 साल की उम्र में विंग वॉकिंग करके एक और साहसी कदम उठाया है। इस उम्र में जहां बहुत से लोग रिटायरमेंट के बाद आराम की जिंदगी चुनते हैं, वहीं बहाल इसके ठीक उलट करके दिखाया है।
वह ऐसी सीमाएं पार कर रहे हैं जो उनसे आधी उम्र के लोगों के लिए भी चुनौती भरी हो सकती हैं। ऐसे समाज में जहां बुढ़ापे को अक्सर सीमाओं के नजरिए से देखा जाता है, वह संभावनाओं, मजबूती और खुद को नए सिरे से ढालने की एक अलग कहानी पेश करते हैं।
रोमांच हमेशा से रहा जिंदगी का हिस्सा
जालंधर के रहने वाले और अब अमेरिका के नागरिक बहल के लिए रोमांच हमेशा से जिंदगी का हिस्सा रहा है। नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के 28वें कोर्स के छात्र रहे बहल को दाहिने कान से सुनाई न देने के कारण 17 साल की उम्र में मेडिकल कारणों से एकेडमी छोड़नी पड़ी थी।
इस कमजोरी को उन्होंने अपनी परेशानी नहीं बनने दिया बल्कि वह एक नया मोड़ बन गया। एनडीए छोड़ने के बाद उन्होंने दार्जिलिंग में चाय के बागान में मैनेजर के तौर पर काम किया और फिर 1975 में अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने एक सफल बिजनेस खड़ा किया और बोस्टन को अपना घर बनाया।
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बचपन के जुनून ने कभी नहीं छोड़ा साथ
इस पूरे सफर में बचपन का एक जुनून कभी उनका साथ नहीं छोड़ पाया और वह था उड़ान भरना। कॉलेज और एनसीसी कैडेट के दिनों में उन्होंने आगरा में ग्लाइडर पायलट का लाइसेंस हासिल किया था। बाद में उन्होंने अमेरिका में प्राइवेट पायलट का लाइसेंस लिया।
कोविड महामारी के दौरान, जब दुनिया थमी हुई थी बहल ने अपनी उपलब्धियों में एक और उपलब्धि जोड़ी हेलीकॉप्टर पायलट का लाइसेंस। वह कहते हैं, “उड़ान भरना हमेशा से मेरा जुनून रहा है। बचपन से ही मैं बस यही करना चाहता था।”
विंग वॉकिंग की कब हुई शुरुआत?
उनके इस नए एडवेंचर की शुरुआत उज्बेकिस्तान में ट्रैवलर्स की एक कॉन्फ्रेंस में हुई, जहां वे एक ब्रिटिश महिला को स्काईडाइविंग, पोलर एक्सपीडिशन और दुनिया भर की यात्राओं के किस्से सुना रहे थे। बातचीत के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि एक चीज है जो उन्होंने कभी नहीं की थी और वह है विंग वॉकिंग।
उस महिला ने केंट में एक जगह ढूंढी और उन्हें बुलाया। अजीब बात यह रही कि पैनिक अटैक आने की वजह से वह खुद पीछे हट गईं लेकिन बहल ने इसे जारी रखा। इंग्लिश कंट्रीसाइड के ऊपर करीब 600 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे एक पुराने जमाने के विमान के विंग पर बंधे हुए उन्होंने तेज हवाओं और हवा में किए जाने वाले करतबों का सामना किया।
‘डर भी रोमांच का हिस्सा होता है’
पगड़ी पहनने वाले एक सिख के तौर पर हवा के तेज दबाव को झेलने के लिए उन्होंने अपनी पगड़ी को रबर बैंड से भी बांधा था। वे याद करते हैं, “मैंने अपने हाथ फैलाए और ऊपर बादलों को महसूस किया। इससे मेरे अंदर का बच्चा बाहर आ गया।”
वे कहते हैं कि डर भी इस रोमांच का ही एक हिस्सा है। उन्होंने कहा, “मुझे डर लगता है। तभी मैं सबसे ज्यादा जिंदा महसूस करता हूं। मैं उस पर जीत हासिल करता हूं। बिना डर के इंसान, इंसान नहीं।”
बहल दुनिया के हर देश में जा चुके हैं, दुनिया के दूर-दराज इलाकों की तस्वीरें ले चुके हैं और अपनी कई यात्राओं को अपनी कॉफी-टेबल बुक ‘टायरलेस ट्रैवलर’ में दर्ज कर चुके हैं। उनकी दूसरी किताब ‘माई प्लैनेट, माई प्लेग्राउंड’ पर काम चल रहा है। उन्हें सबसे ज्यादा हैरानी लोगों की उनकी उम्र पर प्रतिक्रिया देखकर होती है। वे कहते हैं, “लोग हैरान होते हैं कि मैं अब भी उड़ान भर रहा हूं।”
हालांकि, उन्हें सबसे अच्छी प्रतिक्रिया अपने आठ साल के पोते से मिली है। जब उनसे पूछा गया कि उनकी बकेट लिस्ट में क्या बाकी है तो बहल हंसते हुए बोले, “एक जिंदगी काफी नहीं है। जिंदगी में जो भी एडवेंचर मेरे सामने आएगा, मैं उसके लिए तैयार हूं।”