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महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार समेत पांच लोगों की बुधवार को बारामती में हुए प्लेन क्रैश में मौत हो गई. अजित पवार के साथ चार्टर प्लेन में पायलट सुमित कपूर, शांभवी पाठक, विदिप जाधव और पिंकी माली सवार थे.
उनका विमान बुधवार को उस वक्त दुर्घटनाग्रस्त हो गया जब वह पुणे के पास बारामती हवाईअड्डे पर लैंड करने की कोशिश कर रहा था.
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, विज़िबिलिटी कम होने की वजह से बारामती में रनवे नहीं दिखा और लैंडिंग की कोशिश नाकाम हो गई.
मगर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हादसे पर सवाल उठाए हैं और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है.
ममता बनर्जी ने कहा, “दो दिन पहले उन्हें पता चला था कि अजित पवार बीजेपी छोड़ने वाले हैं. और आज यह घटना हो गई.”
हालांकि, अजित पवार के चाचा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता शरद पवार ने हादसे के पीछे किसी भी तरह की राजनीति होने की बात से इनकार किया.
उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र अजित पवार की आकस्मिक मौत से गहरे सदमे में है.”
शरद पवार ने कहा, “राज्य ने एक ऐसे नेता को खो दिया है, जिनमें फै़सले लेने की मज़बूत क्षमता थी. यह नुक़सान अपूरणीय है.”
उन्होंने कहा, “कोलकाता से इस हादसे को लेकर राजनीतिक साज़िश के दावे किए गए हैं, लेकिन इसमें किसी तरह की राजनीति नहीं है. यह पूरी तरह एक दुर्घटना थी.”
एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) ने जांच संभाल ली है और जिस जगह उप मुख्यमंत्री अजित पवार का विमान क्रैश हुआ, वहां डीजीसीए और फ़ॉरेंसिक के अधिकारी जांच कर रहे हैं.
हादसे के बाद शुरुआती जानकारियाँ भी सामने आ चुकी हैं, लेकिन अब भी कई ऐसे अहम सवाल हैं जिनके जवाब की तलाश है.
आख़िरी पलों में क्या हुआ, लैंडिंग के दौरान किन हालात ने खतरा बढ़ाया और क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन हुआ, ये वो सवाल हैं जो इस पूरे मामले को और गंभीर बना रहे हैं.
1. खराब विज़िबिलिटी में लैंडिंग की कोशिश क्यों?
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केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने कहा कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक, जिस वक्त अजित पवार का विमान क्रैश हुआ उस समय बारामती एयरपोर्ट पर विज़िबिलिटी खराब थी.
डीजीसीए की ओर से जारी बयान में भी यह कहा गया है कि जब बारामती एटीसी ने लैंडिंग के पहले अप्रोच में विमान के पायलट से पूछा कि उन्हें रनवे दिखाई दे रहा है तो पहले उन्होंने इससे इनकार किया और विमान ने गो-अराउंड किया.
केंद्रीय मंत्री नायडू ने भी कहा कि विमान को लैंड करवाने के दूसरे प्रयास में एटीसी ने फिर से पूछा कि क्या रनवे दिखाई दे रहा है, जिस पर पायलट ने हां में जवाब दिया. लेकिन एटीसी की ओर से लैंडिंग के लिए क्लीयरेंस मिलने के बाद विमान क्रैश हो गया.
क्या मौसम सुरक्षित लैंडिंग के लिए वाकई सही था या फिर इस विमान को पहली लैंडिंग नाकाम होने के बाद डायवर्ट किया जा सकता था?

2. लैंडिंग क्लीयरेंस के बाद अचानक क्या हुआ?
डीजीसीए (भारतीय नागरिक उड्डयन प्राधिकरण) की ओर से हादसे पर बयान जारी किया गया. इसमें बताया गया है कि एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल संभाल रहे व्यक्ति के अनुसार 28 जनवरी को सुबह 8:43 बजे विमान को रनवे इलेवन पर लैंड करने की क्लीयरेंस दी गई, लेकिन क्रू की ओर से लैंडिंग क्लीयरेंस का कोई रीडबैक नहीं दिया गया.
जब एटीसी की ओर से दी गई सूचना, कमांड, संदेश को विमान में पायलट दोहराते हैं, तो उसे रीडबैक कहा जाता है.
इसके बाद सुबह 8:44 बजे एटीसी ने रनवे इलेवन के थ्रेशहोल्ड के पास आग की लपटें देखीं. इसके बाद इमरजेंसी सेवाएं मौके पर पहुंचीं.
विमान का मलबा रनवे इलेवन के थ्रेशहोल्ड के पास बाईं ओर पाया गया.
जिससे यह सवाल पैदा हुआ कि विमान में अचानक ऐसा क्या हुआ कि इसने क्लीयरेंस के बाद नियंत्रण खो दिया. क्या कोई सिस्टम फेल हुआ या कोई अन्य आपात स्थिति पैदा हुई?
लैंडिंग से पहले पायलट एटीसी से लगातार संपर्क में थे, लेकिन क्लीयरेंस के बाद रीडबैक क्यों नहीं दिया गया?
3. कितना सुरक्षित लियरजेट-45 प्लेन?
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लियरजेट 45 श्रेणी के प्लेन, मध्यम आकार के बिज़नेस जेट विमान हैं, जिन्हें कनाडा की कंपनी बॉम्बारडियर ऐरोस्पेस ने बनाया है. दुनिया भर की कई चार्टर फ्लाइट कंपनियां इस प्रकार के विमानों का इस्तेमाल करती हैं. इस विमान में अधिकतम आठ यात्रियों के बैठने की जगह होती है.
भारत में इसे उच्च गति वाली चार्टर यात्राओं के लिए प्राथमिकता दी जाती है. ये विमान छोटे रनवे वाले एयरपोर्ट्स पर भी आसानी से उतर सकता है.
मंत्रालय ने जो जानकारी दी है उसके अनुसार, यह विमान दिल्ली स्थित वीएसआर वेंचर्स एविएशन कंपनी का था और इसका मैन्यूफ़ैक्चरिंग ईयर 2010 था.
इस कंपनी के पास 17 विमान हैं. इनमें सात लियरजेट 45, पांच एम्ब्रेयर 135BJ विमान, चार किंग एयर बी200 और एक पालेटस पीसी-12 विमान हैं.
बयान के अनुसार, फ़्लीट का आख़िरी रेगुलेटरी ऑडिट डीजीसीए की ओर से फरवरी 2025 में किया गया था और इसमें कोई खामी दर्ज नहीं की गई थी.
हालांकि, बयान में यह भी बताया गया है कि इससे पहले 14 सितंबर 2023 को, वीएसआर के स्वामित्व वाला VT-DBL Learjet 45XR मुंबई में लैंडिंग के बाद रनवे से फिसल गया था और दो हिस्सों में टूट गया था. इस हादसे की जांच भी एएआईबी कर रहा है.
बुधवार के हादसे के बाद एक बार फिर से ये सवाल खड़ा हो गया है कि ये विमान कितने सुरक्षित हैं?
4. क्या लैंडिंग एप्रोच सुरक्षित थी?
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हादसे के एक प्रत्यक्षदर्शी ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “जब विमान नीचे आ रहा था, ऐसा लग रहा था कि वह क्रैश हो जाएगा. और तभी वो क्रैश हो गया.”
इस प्रत्यक्षदर्शी ने ये भी दावा किया कि विमान रनवे पर उतरने से पहले ही विस्फोट का शिकार हो गया.
हादसे के शिकार हुए विमान को चलाने वाली कंपनी वीएसआर एविएशन के मालिक विजय कुमार सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि शुरुआती तौर पर यह लग रहा है कि पायलट रनवे नहीं देख सके.
लेकिन वह काफ़ी अनुभवी पायलट थे. सुमित कपूर के पास 16 हज़ार घंटे की उड़ान का अनुभव था. को-पायलट शांभवी पाठक के पास भी 1500 घंटे का अनुभव था.
विजय कुमार सिंह ने विमान में किसी खराबी की बात को भी ख़ारिज किया. वहीं, डीजीसीए के बयान में ये बताया गया है कि विमान के पायलट ने पहले रनवे न दिखने की सूचना दी और बाद में ये सूचना दी गई कि रनवे दिख रहा है.
सोशल मीडिया पर ऐसे कुछ सीसीटीवी फुटेज भी सामने आए हैं, जिन्हें इस विमान के क्रैश होने से कुछ पल पहले का बताया जा रहा है.
फुटेज में विमान हवा में ही पलटते हुए दिख रहा है. हालांकि, बीबीसी हिन्दी इस फुटेज की पुष्टि नहीं कर सकता है. मगर ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या विमान की एप्रोच स्टेबल थी, या फिर लैंडिंग के समय ये बहुत तेज़ या ग़लत पोज़ीशन में था.
5. मे डे कॉल क्यों नहीं?

किसी भी विमान हादसे के बाद ‘मे डे’ (May Day) शब्द का इस्तेमाल कई बार होता है. ये शब्द एविएशन और मैरिटाइम इमरजेंसी के लिहाज़ से बहुत अहम है. कैंब्रिज डिक्शनरी के मुताबिक ‘मे डे’, तब कहा जाता है जब कोई हवाई जहाज़ या पानी का जहाज़ ख़तरे में होता है.
अमेरिकी सरकार की फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी एफएए के मुताबिक़ मेडे एक डिस्ट्रेस कॉल यानी कि तनाव के वक़्त लगाई जाने वाली मदद की गुहार है. ये अंतरराष्ट्रीय तौर पर मान्य एक रेडियो सिग्नल है.
मगर अजित पवार के विमान के हादसे का शिकार होने से पहले उसके पायलट ने एटीसी को कोई ‘मे डे’ कॉल नहीं दी.
सेफ़्टी मैटर्स फ़ाउंडेशन के फ़ाउंडर कैप्टन अमित सिंह ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि ‘मे डे’ कॉल न किया जाना इस ओर इशारा करता है कि आख़िरी वक्त तक पायलट का विमान पर नियंत्रण था. उन्होंने कहा कि अगर विमान में इंजिन फेल्योर हुआ होता या कोई और समस्या होती तो पायलटों ने ‘मे डे’ कॉल दी होती.
बीबीसी के लिए कलेक्टिवन्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.