डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने वाले अधिवक्ता मुकुट नाथ वर्मा को 23 फरवरी को अदालत में पेश किया जाए।
अदालत ने इसके लिए कानूनी दंडात्मक उपाय भी करने को कहा है। वर्मा पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) चुनाव समिति के सदस्यों के खिलाफ भी अभद्र टिप्पणी करने का आरोप है। एससीबीए के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास ¨सह तथा वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया, जो चुनाव समिति के प्रमुख भी हैं, ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ को बताया कि दिल्ली पुलिस पहले जारी किए गए जमानती वारंटों की तामील करने में असफल रही है और वकील का पता नहीं लगा सकी।
न्यायालय एससीबीए में सुधारों से जुड़ी वर्ष 2023 की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इसी दौरान अदालत ने पहले वर्मा द्वारा तिलक मार्ग थाने में चुनाव समिति के सदस्यों के खिलाफ की गई शिकायत को ‘नदनीय और तुच्छ’ बताते हुए कड़ा संज्ञान लिया था।
पीठ ने वर्मा को 29 मई 2025 को भी अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया था और चेतावनी दी थी कि अनुपस्थित रहने पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि वह ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित हुए थे, लेकिन अदालत ने उनकी भौतिक उपस्थिति पर जोर दिया था।
बाद में अदालत ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किए, लेकिन पुलिस उन्हें तलाशने में असफल रही और वारंट बैरंग लौट आए। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने एससीबीए की सचिव प्रज्ञा बघेल को निर्देश दिया कि बार एसोसिएशन, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एलएन राव और विजय हंसारिया के सुझावों को सारणीबद्ध रूप में संकलित किया जाए, ताकि आवश्यक निर्देश जारी किए जा सकें। (न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)