डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को दुर्लभ खनिजों के खनन से जुड़े नियमों में संशोधनों की अधिसूचना जारी कर दी। संशोधित नियमों के तहत लाइसेंस प्राप्त ऑपरेटर तय सीमा से अधिक क्षेत्र में दुर्लभ खनिजों की खोज कर सकेंगे। इससे गहरे क्षेत्रों से खनिजों को निकालने में मदद मिलेगी और इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा।
संशोधनों के तहत खनन पट्टों और समग्र लाइसेंसों में सटे हुए क्षेत्रों को खनन में शामिल करने की अनुमति दी जाएगी। साथ ही प्रमुख पट्टों में संबंधित खनिजों को जोड़ने की भी अनुमति होगी। सटे हुए क्षेत्रों को शामिल करने से गहराई में स्थित खनिजों का ज्यादा से ज्यादा खनन बढ़ेगा, जिनकी अलग से खोज आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं है।
अब क्या हैं नियम?
नियमों के तहत लाइसेंस प्राप्त आपरेटर मौजूदा पट्टे के क्षेत्र का 10 प्रतिशत या लाइसेंस क्षेत्र का 30 प्रतिशत तक अतिरिक्त क्षेत्र में खनिजों की खोज कर सकेगा।
नीलामी वाले पट्टों के लिए ऑपरेटर को जोड़े गए भूमि से खनिजों पर नीलामी प्रीमियम का 10 प्रतिशत भुगतान करना होगा, जबकि गैर-नीलामी पट्टों के धारकों को ऐसे उत्पादन पर रायल्टी के बराबर राशि का भुगतान करना होगा।
संशोधनों के तहत खनन पट्टे में किसी भी अन्य खनिज को शामिल करने की अनुमति दी गई है। साथ ही, राज्यों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे आवेदन मिलने के 30 दिनों के भीतर ऐसी अनुमति प्रदान करें।
मंत्रालय ने क्या कहा?
मंत्रालय ने बताया कि एमएमडीआर अधिनियम की सातवीं अनुसूची में निर्दिष्ट महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों या जमीन की गहराई में पाए जाने वाले खनिजों को पट्टे में शामिल करने पर कोई अतिरिक्त शुल्क लागू नहीं होगा। ऐसा इन खनिजों के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है, क्योंकि ये खनिज बहुत कम मात्रा में पाए जाते हैं और इनका खनन तथा प्रसंस्करण करना काफी कठिन होता है।