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इमेज कैप्शन, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार सुबह वार्ता के असफल होने की घोषणा की थी
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अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को हुई वार्ता बेनतीजा रही, हालांकि मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान ने दोनों पक्षों से दो हफ़्तों के लिए हुए युद्धविराम को जारी रखने की प्रतिबद्धता बनाए रखने की अपील की है.
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वार्ता ख़त्म होने के बाद रविवार सुबह तड़के (इस्लामाबाद के समयानुसार) एक संक्षिप्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि “अमेरिका की ओर से एक अंतिम बेस्ट ऑफ़र दिया गया है और अब देखना है कि ईरान की ओर से क्या जवाब आता है.'”
ईरान के सरकारी चैनल आईआरआईबी (इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ब्रॉडकास्टिंग) ने ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से कहा, “कुछ मुद्दों पर हमारी सहमति बनी, लेकिन अमेरिका के बहुत अधिक दख़ल के कारण बातचीत आख़िरकार विफल रही. दो-तीन प्रमुख मुद्दों पर दोनों पक्ष एक-दूसरे से बहुत दूर रहे और चर्चा किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी.”
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में यह वार्ता कई घंटों तक चली और इस बीच अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल, राष्ट्रपति ट्रंप से लगातार संपर्क में रहा.
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वार्ता विफल होने की जेडी वेंस की घोषणा के बाद अरब और पश्चिमी मीडिया में तमाम तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं और इस बात पर अटकलें लगाई जा रही हैं कि अब आगे क्या होगा.
अरब मीडिया में क्या कहा जा रहा है?
अल जज़ीरा के जेम्स बेज़ ने अपने एक लेख में, इस्लामाबाद वार्ता के विफल होने पर ट्रंप की चुप्पी पर हैरानी जताई और सवाल किया कि क्या डिप्लोमेसी का अंत हो गया है?
लेख में जेम्स बेज़ ने लिखा, “हम इस समय ऐसी स्थिति में हैं जहां इस्लामाबाद में डिप्लोमेसी की प्रक्रिया ख़त्म हो चुकी है, लेकिन क्या कूटनीति पूरी तरह ख़त्म हो गई है? सबसे बड़ा सवाल है कि आने वाले घंटों में क्या होने वाला है.”
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इमेज कैप्शन, तेहरान में एक ईरानी निवासी न्यूज़ चैनल पर अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की ख़बरें देखता हुआ
“हमने जेडी वेंस से सुना है कि क्या हासिल नहीं हो सका और उपराष्ट्रपति के बयान से लगता है कि एक समझौते का प्रस्ताव अभी भी मेज़ पर मौजूद है, जिसे ईरान देख सकता है और उस पर फिर से विचार कर सकता है.”
“यह ख़ामोशी बहुत गहरी है, क्योंकि हमें पता है कि कुछ ही दिन पहले दुनिया कितनी गंभीर स्थिति में थी, जब उन्होंने ट्वीट किया था कि एक पूरी सभ्यता आज रात ख़त्म हो जाएगी, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा.”
अल अरबिया इंग्लिश ने अपने एक लेख में लिखा है कि तेहरान का कहना है कि “किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि अमेरिका के साथ एक ही सत्र में किसी सहमति पर पहुंचा जा सकेगा.”
वेबसाइट ने आईआरआईबी के हवाले कहा कि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ेई ने कहा, “स्वाभाविक रूप से, शुरू से ही हमें ये उम्मीद नहीं करनी चाहिए थी कि एक ही सत्र में सहमति पर पहुंच जाएंगे. किसी ने भी यह उम्मीद नहीं की थी.”
उन्होंने भरोसा जताया कि पाकिस्तान और क्षेत्र के अन्य दोस्तों के साथ ईरान का संपर्क बना रहेगा.
अल अरबिया ने एक अन्य ख़बर में ईरानी सरकारी मीडिया के हवाले से कहा, आईआरजीसी ने रविवार को चेतावनी दी कि होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले किसी भी सैन्य जहाज़ के साथ ‘सख़्ती से निपटा जाएगा.’
यह चेतावनी उस समय आई जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा था कि अमेरिकी नौसेना के दो युद्धपोत तेहरान की ओर से बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रे हैं.
आईआरजीसी ने बयान में कहा कि किसी भी सैन्य जहाज़ के इस रास्ते से गुज़रने की कोशिश का “कड़े और निर्णायक तरीके से जवाब दिया जाएगा.”
पश्चिमी जगत के मीडिया में क्या कहा जा रहा है?
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इमेज कैप्शन, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने ईरानी नेताओं के साथ बातचीत की थी
सीएनएन ने इस बात को प्रमुखता से बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल, जिसकी अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे थे, ने ईरानी नेताओं के साथ सीधे बातचीत की. नेटवर्क ने इस मुलाक़ात को दशकों से चली आ रही अप्रत्यक्ष कूटनीति से एक बड़ा बदलाव बताया.
नेटवर्क ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया कि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद इस तरह की उच्च स्तर की बैठकें बेहद दुर्लभ रही हैं. यह भी कहा गया कि पहले जब भी बातचीत हुई, वह ज़्यादातर मध्यस्थों के ज़रिए ही होती थी.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस बातचीत को एक ऐसे कूटनीतिक पल के रूप में पेश किया, जिसकी अहमियत सिर्फ उसके संभावित नतीजों में नहीं बल्कि उसकी प्रतीकात्मक दुर्लभता में भी है. अख़बार ने यह भी रेखांकित किया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच इस स्तर पर सीधे संवाद की कोई ठोस परंपरा लगभग नहीं रही है.
यूएसए टुडे ने बताया कि अमेरिकी अधिकारी इस बैठक को एक असामान्य लेकिन ज़रूरी क़दम मान रहे हैं, ताकि जारी संघर्ष को ख़त्म किया जा सके और क्षेत्रीय तनाव को बढ़ने से रोका जा सके.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.