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इमेज कैप्शन, वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा था कि अमेरिका ईरान में ज़मीनी कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है (फ़ाइल फ़ोटो)
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ईरान पर अमेरिकी सेना के ज़मीनी हमले की ख़बरों के बीच ईरान ने कहा है कि वह मुक़ाबला करने को तैयार है.
भारत में ईरान के दूतावास ने तेहरान टाइम्स के एक ख़ास एडिशन का पेज शेयर करते हुए लिखा, ‘जहन्नम में तुम्हारा स्वागत है.’
तेहरान टाइम्स के इस पेज की हेडलाइन ही है- ‘जहन्नम में तुम्हारा स्वागत है.’ इसमें यह भी लिखा है कि ‘ईरान की ज़मीन पर पैर रखने वाले अमेरिकी सैनिक सिर्फ़ ताबूतों में ही लौटेंगे.’
इससे पहले अंग्रेज़ी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा था कि पेंटागन ईरान में कई हफ़्तों तक ज़मीनी कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है.
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वार्ता की बात, हमले की साज़िश
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इमेज कैप्शन, ईरान की संसद के अध्यक्ष ग़ालिबाफ़ ने ईरान के आत्मसमर्पण के सवाल पर कहा कि ईरान ‘अपमान’ स्वीकार नहीं करेगा (फ़ाइल फ़ोटो)
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना (आईआरएनए) समेत कई ईरानी मीडिया संस्थानों ने ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाग़र ग़ालिबाफ़ का एक संदेश प्रकाशित किया है.
युद्ध शुरू होने के 30 दिन पूरे होने के मौके पर दिए इस संदेश में ग़ालिबाफ़ कहते हैं कि, “दुश्मन सार्वजनिक तौर पर बातचीत के संकेत देता है, जबकि पर्दे के पीछे ज़मीनी हमले की साज़िश रच रहा है.”
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका “15 बिंदुओं की एक सूची के साथ वह अपनी वह इच्छाएं सामने रख रहा है जिन्हें युद्ध से हासिल नहीं कर पाया.”
ग़ालिबाफ़ ने यह भी कहा कि ईरानी सेनाएं “अमेरिकी सैनिकों के ज़मीन पर उतरने का इंतज़ार कर रही हैं, ताकि उन पर आग बरसाई जा सके.”
ईरान के आत्मसमर्पण के सवाल पर ग़ालिबाफ़ ने अरबी भाषा में कहा कि ईरान का संदेश ‘बिलकुल साफ़’ है और वह ‘अपमान’ स्वीकार नहीं करेगा.
इस बीच, कुछ अपुष्ट रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ट्रंप प्रशासन ने ग़ालिबाफ़ को एक संभावित साझेदार के रूप में देखा था और यहां तक कि भविष्य के एक नेता के रूप में भी.
ज़मीनी हमले की तैयारी?
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इमेज कैप्शन, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शनिवार को कहा कि युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली इस इलाक़े में पहुंच गया है
अख़बार के अनुसार अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हमले की योजनाओं को मंज़ूरी देते हैं, तो युद्ध का एक नया चरण शुरू होगा जो पहले चार हफ़्तों की तुलना में अमेरिकी सैनिकों के लिए काफ़ी ज़्यादा ख़तरनाक हो सकता है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शनिवार को कहा कि युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली इस इलाक़े में पहुँच गया है.
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया गया कि यूएसएस त्रिपोली जिस यूनिट का नेतृत्व कर रहा है उसमें 5000 नाविक और नौसैनिक हैं, जो कई युद्धपोतों में तैनात हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा योजनाओं के मुताबिक़, ऐसे ज़मीनी ऑपरेशन पूरे पैमाने पर हमला नहीं होंगे, बल्कि स्पेशल ऑपरेशंस फ़ोर्सेज़ और पारंपरिक पैदल सेना के जवानों के मिले-जुले दस्तों के छापेमारी अभियान होंगे.
माना जा रहा है कि अमेरिका के पास 4000 से ज़्यादा अमेरिकी नौसैनिक समुद्र में मौजूद जहाज़ों पर हैं, जो खाड़ी की ओर बढ़ रहे हैं. इसके अलावा 82वीं एयरबोर्न डिविज़न के पैराट्रूपर्स को अलर्ट पर रखा गया है और आगे और सैनिक भेजने पर भी चर्चा हो रही है.
हालांकि, इस बीच तीन देशों (मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की) के विदेश मंत्री पाकिस्तान में मध्य पूर्व के हालात पर चर्चा करने के लिए जुटे हैं.
पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेज़बानी की पेशकश भी की थी.
अब तक अमेरिका ने क्या कहा?
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इमेज कैप्शन, शुक्रवार को अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका अपने लक्ष्य “बिना किसी ज़मीनी फ़ौज के भी” हासिल कर सकता है
इसी महीने की शुरुआत में ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “मैं कहीं भी फ़ौज नहीं भेज रहा हूं”, लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने यह भी जोड़ दिया, “और अगर भेज रहा होता, तो यक़ीनन आपको नहीं बताता.”
शुक्रवार को अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका अपने लक्ष्य “बिना किसी ज़मीनी फ़ौज के भी” हासिल कर सकता है.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हालिया सैन्य तैनातियों का मक़सद ट्रंप को विकल्प देना है. उनके शब्दों में, “हम हमेशा राष्ट्रपति को हालात के हिसाब से फ़ैसले बदलने के लिए अधिकतम अवसर देने को तैयार रहते हैं.”
शनिवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली इस क्षेत्र में पहुंच गया है.
अमेरिका पर अविश्वास नया नहीं
ईरान की संसद के अध्यक्ष ग़ालिबाफ़ ने अमेरिका पर जो अविश्वास जताया है वह पहली बार नहीं है.
हालांकि पर्दे के पीछे क्या चल रहा है, इसकी बीबीसी को बहुत जानकारी नहीं है, लेकिन एक बात साफ़ है 1979 की क्रांति के बाद से ईरान की नीतियां बड़ी हद तक पश्चिमी राजनीतिक, सांस्कृतिक और वैचारिक प्रभाव के विरोध में आकार लेती रही हैं. और वह अमेरिका व इसराइल को अक्सर अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखता है.
28 फ़रवरी को शुरू हुआ मौजूदा युद्ध, जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता के तीसरे दौर के सिर्फ़ दो दिन बाद ही शुरू हो गया था.
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इमेज कैप्शन, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाग़र ग़ालिबाफ़
पिछली गर्मियों में भी ईरान पर हमले उस समय शुरू हुए थे, जब अमेरिका और ईरान परमाणु वार्ताओं में लगे हुए थे. इसके चलते ईरान और इसराइल के बीच 12 दिनों तक युद्ध चला था, और अमेरिका ने ईरान की तीन अहम परमाणु सुविधाओं पर बमबारी की थी.
ईरानी अधिकारी किसी भी समझौते को इस कसौटी पर देखते हैं कि 2015 के समझौते से ट्रंप के हटने के बाद अमेरिका पर भरोसा किया जा सकता है या नहीं.
और अब वे पहले से भी ज़्यादा संदेह कर रहे हैं.
सऊदी अरब ने 10 ड्रोन रोके, क़तर के टीवी चैनल पर हमला
इस बीच रविवार दोपहर को सऊदी अरब ने कहा कि उसने पिछले कुछ घंटों में 10 ड्रोन्स को मार गिराया है.
खाड़ी के अन्य देशों, जिनमें यूएई और कुवैत शामिल हैं, उन्होंने भी रात भर हमले होने की बात कही है.
क़तर के टीवी नेटवर्क अल अरबी ने कहा है कि तेहरान में उसके टीवी चैनल के ऑफ़िस को एक मिसाइल हमले से नुक़सान हुआ है.
नेटवर्क ने एक्स पर एक पोस्ट में एक वीडियो शेयर किया जिसमें मलबा और टूटा हुआ कांच दिखाई दे रहा है. यह साफ़ नहीं है कि मिसाइल किसने लॉंच की. इसराइल ने इस पर की टिप्पणी नहीं की है.
दुबई में हमारे संवाददाता के अनुसार क्षेत्र में पिछले 24 घंटे में कई बार हमले हुए हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.