जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। इसे बदलते वैश्विक समीकरण के संकेत के तौर पर देखना तो जल्दबाजी होगी लेकिन विधिवत घोषणा के बावजूद वर्ष 2025 में क्वाड संगठन (अमेरिका, भारत, जापान व ऑस्ट्रेलिया) की बैठक भारत में नहीं हो सकी लेकिन भारत सरकार के स्तर पर वर्ष 2026 में होने वाली ब्रिक्स संगठन की शीर्षस्तरीय बैठक की तैयारी शुरू हो चुकी है।
अगले मंगलवार यानी 13 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ब्रिक्स की आधिकारिक वेबसाइट और लोगो लॉन्च करेंगे।
अमेरिका से तनातनी के बीच विदेश मंत्री यह भी बताएंगे कि इस साल अपनी अगुआई में भारत ब्रिक्स संगठन के तहत क्या एजेंडा सेट करने जा रहा है।
यह सब तब हो रहा है जब अमेरिका ब्रिक्स देशों पर लगातार निशाना साध रहा है तो दूसरी तरफ रूस, चीन तथा ईरान ने ‘ब्रिक्स प्लस’ संगठन के तहत दक्षिण अफ्रीका के पास समुद्र में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास शुरू किया है। हालांकि भारत इसमें हिस्सा नहीं ले रहा है।
जानकारों के मुताबिक भारत की पूरी योजना है कि जिस तरह से जी-20 सम्मेलन का आयोजन किया गया था वैसा ही इस साल ब्रिक्स का आयोजन हो। ब्रिक्स के उलट क्वाड सम्मेलन को लेकर कोई सूचना नहीं है। पिछले वर्ष जनवरी और जुलाई में अमेरिका में ही चारों सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी।
इस बीच फरवरी, 2025 में जब पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की मुलाकात हुई तो शीर्ष स्तरीय बैठक भारत में किए जाने पर चर्चा हुई। ट्रंप ने भारत आने की बात भी कही गई।
पहले बताया गया कि सितंबर, 2025 में यह बैठक नई दिल्ली में हो सकती है लेकिन बाद में किसी भी सदस्य देश ने इस बारे में कुछ नहीं कहा। हाल ही में बीजिंग में क्वाड के चारों सदस्य देशों के राजदूतों की एक बैठक जरूर हुई है।
वर्ष 2024 में क्वाड की शीर्षस्तरीय बैठक में क्लीन एनर्जी सप्लाई चेन मजबूत करने, समुंद्र के अंदर केबल कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रेनिंग, कैंसर रोकथाम, बंदरगाह निर्माण में सहयोग जैसे कई घोषणाएं हुईं लेकिन उस पर अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है। जानकारों का कहना है कि क्वाड के तहत जिन क्षेत्रों में सहयोग की घोषणाएं हुई हैं, उन पर सदस्य देशों के बीच बहुत ही धीमी गति से प्रगति हो रही है।
ब्रिक्स देशों को लेकर गलत बयानबाजी करते रहे हैं ट्रंप
क्वाड की गतिविधियों को लेकर जारी अनिश्चितता का एक बड़ा कारण ट्रंप प्रशासन का रवैया भी है जो सभी सदस्य देशों को कारोबारी मुद्दों पर असहज कर चुका है। ट्रंप प्रशासन ने जापान व ऑस्ट्रेलिया के साथ कारोबारी मुद्दों को फिलहाल सुलझा लिया है लेकिन भारत के साथ विवाद जारी है। राष्ट्रपति ट्रंप कई बार ब्रिक्स देशों को लेकर गलत बयानबाजी करते रहे हैं।
वर्ष 2025 में जब पीएम मोदी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए ब्राजील गए थे, उसी समय ट्रंप ने घोषणा की थी कि सभी ब्रिक्स देशों को अलग से 10 प्रतिशत का टैक्स देना पड़ेगा। वह ब्रिक्स देशों पर डॉलर को अंतरराष्ट्रीय बाजार से अलग करने की साजिश रचने का भी आरोप लगा चुके हैं।
भारत ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में कारोबार के मुद्दे को आगे बढ़ाएगा
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि ब्रिक्स में दुनिया के 10 प्रमुख देश अब सदस्य हैं। तकरीबन दो दर्जन अन्य देश इसका सदस्य बनने को तैयार हैं। भारत की नीति बहुकेंद्रीय वैश्विक व्यवस्था को बढ़ावा देना है और इसके तहत ही वह ब्रिक्स को समर्थन करता है।
ब्रिक्स करेंसी शुरू करने या अमेरिकी डॉलर को बाहर करने को लेकर ट्रंप प्रशासन के बयानों को खारिज करता है लेकिन ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में कारोबार करने की नीति का भारत समर्थन करता है। इस साल अपनी अध्यक्षता में भारत स्थानीय करेंसी में कारोबार करने के मुद्दे को और आगे बढ़ाएगा।