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अमेरिका से बातचीत को लेकर इतने सख़्त क्यों लग रहे हैं ईरानी अधिकारी?

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Jun 8, 2026


अमेरिका-ईरान बातचीत की अख़बार में कवरेज

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, ईरान के राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों के बयानों से लग रहा है कि वे सैन्य और टकराव के विकल्पों पर ज़्यादा ज़ोर दे रहे हैं

    • Author, मसूद आज़र
    • पदनाम, बीबीसी फ़ारसी
  • प्रकाशित

  • पढ़ने का समय: 13 मिनट

ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है, “हमें रियायतें बातचीत से नहीं, बल्कि मिसाइलों से मिलती हैं. बातचीत में हम केवल उन्हें समझाते हैं.”

आजकल ऐसा लगता है कि ईरानी अधिकारियों के बयानों में कूटनीति और ‘बातचीत’ की तुलना में युद्ध और धमकियों की भाषा अधिक हावी हो गई है.

राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों के बयानों की पड़ताल से पता चलता है कि वे सैन्य और टकराव के विकल्पों पर अधिक ज़ोर दे रहे हैं.

आईआरजीसी के पूर्व कमांडर और कमांडर-इन-चीफ़ के सैन्य सलाहकार मोहसेन रेज़ाई ने भी बार-बार ईरान की ओर से पहले जैसी कार्रवाई की संभावना का ज़िक्र किया है और ग़ालिबाफ़ की तरह ही लिखा है, “हम नौसैनिक नाकेबंदी को या तो बातचीत के ज़रिये से या सीधे कार्रवाई के ज़रिये तोड़ेंगे.”

युद्ध और युद्धविराम के साथ-साथ ‘बातचीत’ शब्द भी मीडिया और सोशल नेटवर्क में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले शब्दों में से एक बन गया है.

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