नीलू रंजन, नई दिल्ली। लालकिला बम विस्फोट करने वाले आतंकी माड्यूल को पनाह देने वाली अल फलाह यूनिवर्सिटी को ईडी ने अस्थायी रूप से जब्त कर दिया है।
ईडी ने फिलहाल जब्त की गई परिसंपत्तियों की विस्तृत जानकारी नहीं दी है, लेकिन ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एक तरह से यूनिवर्सिटी का पूराकैंपस जब्त किया गया है, जिसमें यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग समेत छात्रावास व अन्य भवन शामिल हैं।
इसके साथ ही ईडी ने लगभग दो महीने के भीतर फरीदाबाद स्थित अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। सिद्दिकी फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में है।
अल फलाह यूनिवर्सिटी की 140 करोड़ की संपत्ति जब्त
ईडी के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार यूनिवर्सिटी की संपत्तियों को जब्त करने से उसके कामकाज पर कोई असर नहीं होगा। पढाई व अन्य गतिविधियां पहले की तरह जारी रहेंगी। लेकिन अल फलाह ट्रस्ट इस यूनिवर्सिटी को किसो को बेच नहीं सकेगा। अंतिम रूप से जब्त की कार्रवाई की पूरी होने के ईडी उसे अपने कब्जे में ले सकेगी।
ईडी के अनुसार फिलहाल जब्त की गई संपत्तियों की कीमत 140 करोड़ रुपये है। लेकिन आपराधिक रूप से बनाई गई संपत्तियां इससे कई गुना ज्यादा है। ईडी अभी तक ग्रुप की 493 करोड़ों की ऐसी आपराधिक रूप से बनाई गई संपत्तियों का पता लगा चुकी है और उन्हें जब्त करने की कार्रवाई की जा रही है।
आतंकी मॉड्यूल को पनाह देने का आरोप
लालकिला धमाके के तत्काल बाद 10 नवंबर 2025 को दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआइआर के आधार पर शुरू की गई मनी लां¨ड्रग की कार्रवाई में ईडी ने यूनिवर्सिटी के संचालन में कई नियमों और कानूनों का उल्लंघन पाया।
इसमें राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से मान्यता होने का झूठा दावा शामिल है। अल फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े शिक्षण संस्थानों ने समाप्त हो चुकी एनएएसी ग्रे¨डग को प्रचारित कर छात्रों और अभिभावकों को गुमराह किया।
यूनिवर्सिटी को यूजीसी एक्ट के तहत मान्यता प्राप्त बताया गया, जबकि वह सिर्फ धारा दो(एफ) के तहत थी और 12(बी) के तहत एलिजिबल घोषित नहीं थी। यही नहीं, मेडिकल कालेज की स्थापना व कामकाज में एनएमसी के नियमों का उल्लंघन किया गया और जरूरी तथ्यों को छिपाकर और गलत जानकारी देकर अप्रूवल हासिल किए गए।
जो एक अपराध है। ईडी के मुताबिक हितधारकों को धोखाधड़ी वाली गलतबयानी और उसके बाद एडमिशन और फीस कलेक्शन के माध्यम से सैंकड़ों करोड़ रुपये जुटाए गए। यही नहीं, इन संपत्तियों को ग्रुप की अन्य कंपनियों में ट्रांसफर करने और करोड़ों रुपये विदेश भेजने के भी सबूत मिले हैं।
जावेद सिद्दीकी पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
जांच के दौरान जवाद अहमद सिद्दीकी की सक्रिय भूमिका पाई गई। उसने अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, अल-फलाह यूनिवर्सिटी (अल-फलाह स्कूल आफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर सहित) और संबंधित संस्थाओं पर प्रमुख नियंत्रण रखा, और उन्हें गैरकानूनी कमाई का मुख्य लाभार्थी पाया गया।
मैनेजिंग ट्रस्टी और चांसलर के रूप में, उन्होंने अन्य पदाधिकारियों के नाममात्र व्यक्तियों के रूप में काम करने के साथ, पूर्ण प्रशासनिक, वित्तीय और परिचालन नियंत्रण रखा।