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असम चुनाव: महिलाओं को दिया गया ‘बिहू तोहफ़ा’ हिमंत के लिए कारगर साबित होगा?

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Mar 26, 2026


मामोनी दास
इमेज कैप्शन, मामोनी दास का कहना है कि अरुणोदय स्कीम के तहत जो राशि मिलती है, उससे रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करने में आसानी होती है

गुवाहाटी से तक़रीबन दो घंटे की दूरी पर है कामरूप ग्रामीण ज़िले का रंगिया शहर. यहां के एक कस्बे में बने आधे कच्चे-पक्के से मकान में 55 साल की मामोनी दास रहती हैं.

मामोनी के पति एक बैट्री रिक्शा चालक हैं. हफ़्ते में मुश्किल से पांच से छह सौ रुपए की कमाई होती है. कुल मिलाकर परिवार रोज़ाना के ख़र्चे के लिए भी संघर्ष करता है, इसके बावजूद मोमिना के मन में इस बार बिहू को लेकर अलग ही उत्साह है.

वह कहती हैं, ”थोड़ा इस बार शॉपिंग अच्छे से होगा, बाज़ार वगैरह करेंगे, बच्चों और नाती-पोती को कपड़ा लाएंगे…इस बार खुलकर खर्च कर पाएंगे.”

मामोनी के ऐसा कहने के पीछे की वजह है – नौ हज़ार रुपए, जो बीते 10 मार्च को उनके खाते में क्रेडिट हुए हैं. उन्हें ये रक़म असम सरकार की तरफ़ से दी गई है और इसको पाने वाली वह इकलौती महिला नहीं हैं.

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