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असम बेदख़ली अभियान: कड़ाके की ठंड में नदी किनारे रहने को मजबूर सैकड़ों परिवार

Byadmin

Jan 27, 2026


नाजमीना खातून
इमेज कैप्शन, नाज़मीना ख़ातून जलजली नदी के किनारे रहने को मजबूर हैं

“यहां शाम ढलते ही बहुत ठंड होती है. रात को जब सोते हैं तो टीन पर जमा ओस का पानी मुंह पर गिरता है. सर्दी से हम सबकी तबीयत बिगड़ रही है.”

इतना कहते ही 38 साल की नाज़मीना ख़ातून के चेहरे पर उदासी छा जाती है.

थोड़ी देर की चुप्पी के बाद वो बेहद नाराज़गी से कहती हैं, “ठंड के कारण मेरा बच्चा एक महीने बीमार रहा. उसकी तबीयत इतनी ख़राब हो गई थी कि वो कई दिनों तक बोल नहीं पाया.”

“बोलने पर सांस अटक रही थी. इतनी ठंड में हाथ-पैर अकड़ जाते हैं. क्या बताऊं, यहां कितनी तकलीफ़ है. हम मुसलमान हैं इसलिए सरकार हमारी मदद नहीं कर रही.”

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