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असम विधानसभा चुनावों की तारीख़ों की घोषणा हो गई है और प्रदेश में राजनीतिक पार्टियों की यात्राएं, केंद्रीय नेताओं के दौरे, गांव-कस्बों में लग रहे पोस्टर और झंडों ने चुनावी माहौल तैयार कर दिया है.
असम में केरल और पुडुचेरी के साथ ही एक चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी.
असम में विधानसभा की 126 सीटें हैं और इसका मौजूदा कार्यकाल 20 मई, 2026 को ख़त्म होने वाला है. बीजेपी ने साल 2021 में कुल 93 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 60 सीटों पर जीत दर्ज की थी.
उसके नेतृत्व वाले एनडीए ने कुल 126 सीटों में से 75 सीटों पर जीत दर्ज की थी. हालांकि, 2016 के मुकाबले एनडीए को बीते चुनाव में 11 सीटों का घाटा हुआ था.
साल 2016 में 60 सीटों पर जीत हासिल कर राज्य में बीजेपी पहली बार सत्ता में आई थी.
असम में पिछले एक दशक से विपक्ष में बैठी कांग्रेस ने पिछली विधानसभा में 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था और महज़ 29 सीटें ही जीत पाई थी. कांग्रेस के नेतृत्व वाले महाजोट गठबंधन ने 50 सीटों पर जीत दर्ज की थी.
इस तरह साल 2016 के मुकाबले कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन को 2021 के चुनाव में 10 सीटों का फ़ायदा हुआ था.
पिछली दफ़ा कांग्रेस के साथ गठबंधन में रहे मौलाना बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) ने 20 में से 16 सीटों पर जीत हासिल की थी.
इस बार कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनावों के लिए एआईयूडीएफ़ के साथ किसी भी चुनावी गठबंधन की संभावना को ख़ारिज कर दिया है.
कांग्रेस ने इस बार के चुनाव के लिए ‘असम सोनमिलितो मोर्चा’ नामक एक विपक्षी गठबंधन बनाया है, जिसमें क्षेत्रीय पार्टी असम जातीय परिषद समेत सात अन्य दल शामिल हैं.
कौन सी पार्टी किस गठबंधन में
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इस बार के चुनाव में गठबंधन का गणित साधने में लगी बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही अब तक स्पष्ट नहीं किया है कि वो अकेले कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगी.
बीजेपी फ़िलहाल अपने पुराने साथी असम गण परिषद (एजीपी) के साथ टिकट बंटवारे को लेकर बातचीत कर रही है.
पिछले चुनाव में एजीपी के लिए बीजेपी ने 22 सीटें छोड़ी थीं जिसमें एजीपी ने केवल 9 सीटों पर ही जीत दर्ज की. इसके अलावा बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन (बीटीआर) में विधानसभा की कुल 15 सीटें हैं जहां इस बार बीजेपी ने बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ़) के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का एलान किया है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बीते सोमवार को बजाली में कहा, “बीपीएफ़ 11 सीटों पर और बीजेपी चार सीटों पर चुनाव लड़ेगी.”
जबकि पिछले चुनाव में बीपीएफ़ कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन में था.
दरअसल बोडो बहुल इलाक़ों की ये 15 सीटें एनडीए के लिए बहुत अहम हैं. इन सीटों पर किसी भी तरह का नुक़सान बीजेपी को भारी पड़ सकता है.
बीजेपी ने यहां पिछला चुनाव यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) के साथ मिलकर लड़ा था.
पिछले साल सितंबर तक बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) का शासन यूपीपीएल के पास था, लेकिन इसी दौरान हुए चुनाव में बीपीएफ़ ने यूपीपीएल को मात देते हुए बीटीसी फिर से अपने हाथों में ले ली है.
यहां बीटीसी का शासन जिस पार्टी के पास होता है प्रदेश की सरकार में बैठी पार्टी उसी के साथ हाथ मिलाती है.
इस बीच चुनाव से पहले सीट बंटवारे को लेकर समीकरण नहीं बैठने से शिवसागर से विधायक अखिल गोगोई की पार्टी रायजोर दल ने कांग्रेस के साथ गठबंधन से ख़ुद को अलग कर लिया है.
किन मुद्दों पर ज़ोर
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असम में तैयार चुनावी माहौल में इस समय सरकार की अरुणोदय स्कीम के तहत क़रीब 40 लाख महिलाओं को 3,600 करोड़ रुपए देने की बात बेहद चर्चा में है.
असम सरकार ने पिछले मंगलवार को यह रकम अरुणोदय-3 योजना के तहत ट्रांसफ़र कर दी थी जिसमें प्रत्येक महिला लाभार्थी के बैंक खाते में सीधे 9 हज़ार रुपये डालने की बात कही गई है.
राजनीतिक टिप्पणीकारों की मानें तो चुनाव से ठीक पहले महिला वोटरों को साधने वाला बीजेपी का यह दांव उसे फायदा पहुंचा सकता है.
हालांकि राज्य के प्रसिद्ध गायक जुबिन गर्ग की मौत का मामला भी एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनता दिख रहा है.
ख़ास कर युवाओं में जुबिन की मौत का मामला काफ़ी गंभीर बना हुआ है. इसके अलावा विपक्षी पार्टियां मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोपों को ज़ोर-शोर से उठा रही हैं.
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने पिछले महीने असम दौरे के दौरान बीजेपी सरकार के ख़िलाफ़ “पीपुल्स चार्जशीट” नामक एक दस्तावेज़ जारी किया था.
इस ”पीपुल्स चार्जशीट” में भ्रष्टाचार समेत “सिंडिकेट राज” को संस्थागत बनाने और मूल निवासियों की ज़मीन कॉरपोरेट घरानों को देने के आरोप लगाए गए हैं.
प्रियंका गांधी को असम विधानसभा चुनाव के लिए संभावित कांग्रेस उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने वाले एक पैनल का चेयरपर्सन बनाया गया है.
एक तरफ़ कांग्रेस जहां इन मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री और बीजेपी को घेरने की कोशिश कर रही है, वहीं सीएम सरमा कांग्रेस नेता गौरव गोगोई को सार्वजनिक तौर पर ‘पाकिस्तानी एजेंट’ बता रहे हैं.
गौरव गोगोई के मुद्दे को मुख्यमंत्री अपनी हर चुनावी बैठक में उठाते दिख रहे हैं. उनकी सरकार ने कांग्रेस नेता गौरव के पाकिस्तान के साथ कथित संबंधों की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम से जांच भी करवाई है.
बीजेपी-कांग्रेस के बीच मुक़ाबला
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मौजूदा राजनीतिक घमासान से यह स्पष्ट है कि इस बार भी विधानसभा चुनाव में बीजेपी का सीधा मुक़ाबला कांग्रेस से है. इस बार की चुनावी लड़ाई में हिमंत बिस्वा सरमा और गौरव गोगोई आमने-सामने खड़े हैं.
भले ही दोनों दलों ने अब तक अगले मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा नहीं की है लेकिन कांग्रेस की ओर से जारी की गई 42 उम्मीदवारों की पहली सूची में गौरव गोगोई को जोरहाट विधानसभा से चुनाव लड़ाने का एलान कर हिमंत के सामने चुनौती पेश कर दी है.
हालांकि बीजेपी ने अब तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है. सीएम सरमा ने हाल ही में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि वे अपनी पुरानी सीट जालुकबाड़ी से ही चुनाव लड़ेंगे जहां से वे 2001 से विधायक बनते आ रहे हैं.
फ़िलहाल एक तरफ़ बीजेपी को जहां हर मोर्चे पर हिमंत लीड करते दिख रहे हैं, वहीं विरोधी के तौर पर कांग्रेस गौरव गोगोई की लीडरशिप में कड़ी टक्कर देने की तैयारी में जुटी है

कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी बीजेपी को चैलेंज करने के लिए पिछले 26 फ़रवरी को राज्य भर में ‘समय परिवर्तन यात्रा’ शुरू की थी, वहीं इसके जवाब में बीजेपी ने 28 फरवरी को ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ की शुरुआत की.
पिछले तीन दशकों से असम की राजनीति को कवर कर रहे वरिष्ठ पत्रकार समीर के पुरकायस्थ कहते हैं, “महिलाओं, स्टूडेंट्स और चाय बागानों में काम करने वालों के लिए कैश ट्रांसफ़र स्कीम राजनीतिक तौर पर इस बार के चुनाव में बीजेपी के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद साबित हो सकती है. लेकिन कई और बड़े मुद्दे हैं जिनमें बीजेपी को चुनौती मिलेगी.”
गायक जुबिन गर्ग की मौत का मुद्दा
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पत्रकार समीर की मानें तो इस बार के चुनाव में राज्य के प्रसिद्ध गायक ज़ुबिन गर्ग की मौत का मामला एक बड़ा चुनावी मुद्दा है.
वो कहते हैं, “सोशल मीडिया का ट्रेंड देखें तो युवा मतदाताओं पर ज़ुबिन को न्याय नहीं मिलने की बात का असर दिखाई पड़ता है. क्योंकि ज़ुबिन की मौत के कुछ दिन बाद सीएम ने कहा था कि ज़ुबिन की हत्या की गई है और बीजेपी सरकार ज़ुबिन को न्याय दिलाएगी. लेकिन अब वे कह रहे हैं कि ज़ुबिन को न्याय अदालत से मिलेगा. सीएम के इन अलग-अलग बयानों से लोग नाराज़ दिख रहे हैं.”
इस नाराज़गी की एक झलक पिछले सोमवार टिहू में दिखाई दी जहां मुख्यमंत्री हिमंत ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ के लिए गए हुए थे.
सीएम की यात्रा के दौरान जमा हुई भीड़ में कुछ युवक-युवतियां ज़ुबिन गर्ग को न्याय दिलाने को लेकर नारेबाज़ी कर रहे थे. उनके हाथों में जो प्ले-कार्ड था उन पर ‘ज़ुबिन को न्याय कब मिलेगा’ जैसे नारे लिखे हुए थे.

असम में चुनावी मुद्दों पर वरिष्ठ पत्रकार अभीक चक्रवर्ती का मानना है कि सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की लोकप्रियता और उनकी सरकार की कई विकास योजनाएं वोटों को अपने पक्ष में कर सकती हैं.
वो कहते हैं, “यह सच है कि ज़ुबिन गर्ग की मौत के मामले में लोग न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं. लेकिन ऐसा लगता नहीं है कि इससे चुनाव एक तरफ़ा होगा. साल 2021 में सीएम बनने के बाद हिमंत ने अवैध कब्ज़ा कर रखी क़रीब 50 हज़ार एकड़ सरकारी ज़मीन खाली करवाई है.”
“राज्य में बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए असम मुस्लिम मैरिज एंड डायवोर्स रजिस्ट्रेशन एक्ट,1935 को रद्द किया है. बाल विवाह को बढ़ावा देने वाले लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है. बहुविवाह पर रोक लगाने के लिए असम प्रोहिबिशन ऑफ़ पोलीगेमी एक्ट, 2025 को लागू किया है. मतदाता इन बातों पर भी गौर करेंगे.”
असम के वरिष्ठ पत्रकार नव कुमार ठाकुरिया का भी कहना है कि ‘मियां मुसलमानों’ के ख़िलाफ़ हिमंत की कड़ी कार्रवाई से चुनाव में उनकी पार्टी को ध्रुवीकरण का फायदा मिलेगा.
वो कहते हैं, “हिमंत यह बात ख़ुद जानते हैं कि उन्होंने मियां मुसलमानों के ख़िलाफ़ जितने भी विवादित बयान दिए हैं उससे हिंदू मतदाताओं की एक बड़ी संख्या उनके पक्ष में मतदान करेगी.”
राजनीतिक टिप्पणीकारों की मानें तो राज्य की छह समुदाय की तरफ से अनुसूचित जनजाति की मांग भी एक बड़ा मुद्दा है.
पिछली दफ़ा बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणा पत्रों में छह स्थानीय समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने का वादा किया था.
2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी-कांग्रेस का प्रदर्शन

कुल सीटें – 126 बहुमत – 64
बीजेपी: 60 सीट
एनडीए: 75 सीट
कांग्रेस: 29 सीट
यूपीए: 50 सीटें
अन्य: 1 सीट
वोट शेयरिंग –
बीजेपी: 33.6 प्रतिशत
कांग्रेस: 30 प्रतिशत
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असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए स्पेशल रिवीज़न के बाद इस साल जो फ़ाइनल वोटर लिस्ट जारी की गई है उसमें 2 करोड़ 49 लाख से ज्यादा वोटर हैं.
इस फ़ाइनल वोटर लिस्ट में 1 करोड़ 24 लाख 82 हज़ार 213 पुरुष मतदाता हैं, जबकि 1 करोड़ 24 लाख 75 हज़ार 583 महिला वोटर हैं. इसके अलावा राज्य में 343 थर्ड-जेंडर वोटर भी हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.