डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इतिहासकार रोमिला थापर ने कहा कि इतिहास एक सतत प्रक्रिया है और इसे टुकड़ों में नहीं पढ़ाया जा सकता। उन्होंने मुगलों के इतिहास को पाठ्यपुस्तकों से हटाने की प्रथा को बेतुका बताया। केरल साहित्य महोत्सव के नौवें संस्करण को वह ऑनलाइन संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा, ”जो कुछ हो रहा है, जैसे कि इतिहास के कुछ हिस्सों को पाठ्यक्रम से हटा दिया जा रहा है या हमें बताया जा रहा है कि हमें उन्हें पढ़ने की आवश्यकता नहीं है, वह बेतुका है। इतिहास सतत प्रक्रिया है। यह निरंतरता इस बात से नहीं टूट सकती कि ठीक है, हम इस राजवंश को हटा दें, हम मुगलों को हटा दें, हम उसे हटा दें।”
इससे इतिहास खंडित हो जाता है और इसका कोई अर्थ नहीं रह जाता। एनसीईआरटी ने कथित तौर पर 2025-26 शैक्षणिक वर्ष के लिए अपनी कक्षा सात की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक को संशोधित किया है, जिसमें दिल्ली सल्तनत और मुगलों से संबंधित अध्याय हटा दिए गए हैं। इसके अलावा, अब इसमें मौर्य, शुंग और सातवाहन जैसे प्राचीन भारतीय राजवंशों के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक परंपराओं और पवित्र स्थलों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)