इमेज कैप्शन, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र क़ालीबाफ़ (बाएं) और अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (दाएं) ने बैठक से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ (बीच में) से मुलाक़ात की है
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पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार शाम चार बजे के क़रीब ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत शुरू हुई.
इस्लामाबाद में बीबीसी उर्दू के संवाददाता रुहान अहमद ने बताया है कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का पहला राउंड ख़त्म हो गया है.
दो सरकारी अधिकारियों ने बीबीसी उर्दू को पुष्टि की है कि ढाई घंटे की बातचीत में पाकिस्तानी मध्यस्थ भी मौजूद थे.
एक सूत्र के मुताबिक़, शुरुआती बातचीत ‘पॉज़िटिव’ रही है. यह भी पुष्टि हो गई है कि एक छोटे ब्रेक के बाद तीन-तरफ़ा बातचीत फिर से शुरू होगी.
इससे पहले पाकिस्तान के सरकारी सूत्रों ने बीबीसी को बताया था कि यह बातचीत शाम चार बजे शुरू हुई थी. सरकारी सूत्रों ने बीबीसी उर्दू को बताया था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत इस्लामाबाद के सेरेना होटल में हो रही है.
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पाकिस्तान सरकार के सूत्रों ने बीबीसी उर्दू को बताया था कि पहले दौर की बातचीत मध्यस्थों के ज़रिए हुई है यानी कि पाकिस्तान के अधिकारी दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे थे. अगर बातचीत ठीक रहती है और माहौल ऐसा बनता है तो यह संभव है कि दोनों देश सीधे वार्ता कर पाएं.
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस संघर्ष में ईरान “बुरी तरह हार रहा है.”
सूत्रों का कहना है कि पहले दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान‑प्रदान पाकिस्तानी अधिकारियों के माध्यम से ही होगा और सकारात्मक प्रगति होने की स्थिति में बातचीत प्रत्यक्ष भी हो सकती है.
बातचीत के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार की रात इस्लामाबाद पहुंचा था, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल शनिवार की सुबह इस्लामाबाद आया था.
‘वो बुरी तरह हार रहे हैं’
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इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान की नौसेना और वायुसेना ख़त्म हो चुकी है (फ़ाइल फ़ोटो)
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि इस संघर्ष में ईरान ‘बुरी तरह हार रहा है.’
ट्रुथ सोशल पर एक लंबे पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि मीडिया के कुछ लोग “यह कहना पसंद करते हैं कि ईरान ‘जीत रहा है’, जबकि वास्तविकता यह है कि हर कोई जानता है कि वे हार रहे हैं और बहुत बुरी तरह हार रहे हैं.”
इसके बाद उन्होंने इस संघर्ष के दौरान उनके प्रशासन द्वारा किए गए दावों को दोहराया: “उनकी नौसेना समाप्त हो चुकी है, उनकी वायुसेना खत्म हो चुकी है, उनका एंटी‑एयरक्राफ्ट सिस्टम अस्तित्वहीन है, राडार ख़त्म हो चुका है, उनके मिसाइल और ड्रोन कारख़ाने काफ़ी हद तक नष्ट कर दिए गए हैं, मिसाइलें और ड्रोन ख़ुद भी नष्ट हो चुके हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनके लंबे समय से चले आ रहे ‘नेता’ अब हमारे बीच नहीं हैं.”
ईरान द्वारा समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने का ज़िक्र करने के बाद उन्होंने कहा कि अब अमेरिका “दुनिया भर के देशों के लिए उपकार के तौर पर होर्मुज़ स्ट्रेट की सफ़ाई शुरू कर रहा है.”
संघर्ष विराम से पहले क्या-क्या हुआ था…
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इमेज कैप्शन, बातचीत के लिए ईरान और अमेरिका दोनों के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं
याद दिला दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आठ अप्रैल की सुबह अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर घोषणा की थी कि “मैं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर से होने वाली बातचीत के आधार पर मैं दो हफ्तों की अवधि के लिए ईरान पर बमबारी और हमलों को स्थगित करता हूं.”
ट्रंप ईरान से कई बार यह मांग कर चुके थे कि वह होर्मुज़ स्ट्रेट खोल दे और उसे ‘पाषाण युग में वापस धकेलने’ की धमकियां दे चुके थे.
युद्धविराम की घोषणा करते हुए शहबाज़ शरीफ़ ने अपने संदेश में लिखा था, “अत्यंत विनम्रता के साथ मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि ईरान और अमेरिका, अपने सहयोगियों के साथ हर जगह, जिनमें लेबनान भी शामिल है, तत्काल युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं.”
उन्होंने कहा था कि “मैं इस बुद्धिमत्तापूर्ण फ़ैसले का हार्दिक स्वागत करता हूँ और दोनों देशों के नेतृत्व का धन्यवाद करता हूँ. साथ ही मैं उनकी वार्ता टीमों को आमंत्रित करता हूं कि वे शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद पधारें, ताकि सभी विवादों के अंतिम समाधान के लिए आगे की बातचीत की जा सके.”
ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने यह मांग की थी कि जब तक लेबनान में युद्धविराम नहीं हो जाता और फ्रीज़ की हुई ईरानी संपत्तियां बहाल नहीं कर दी जातीं, तब तक वार्ता शुरू नहीं होगी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.