इमेज कैप्शन, अली लारिजानी को बीते शुक्रवार को क़ुद्स डे मार्च में देखा गया था
इसराइली सेना के एक अधिकारी ने बीबीसी को पुष्टि की है कि लारिजानी को आईडीएफ़ ने निशाना बनाया था.
इसराइली रक्षा मंत्री ने कहा कि इसराइली सुरक्षा बलों ने एक और शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और बसीज कमांडर ग़ुलाम रज़ा सुलेमानी को भी मार दिया है.
कात्ज़ ने कहा, “प्रधानमंत्री और मैंने आईडीएफ़ को निर्देश दिया है कि वह ईरान के ‘आतंक और दमन’ वाले शासन के नेतृत्व को निशाना बनाना जारी रखे.”
उन्होंने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व में तेज़ी से हो रहे बदलाव की बात की थी. हम उन्हें बताएंगे कि यह बदलाव अब भी जारी है और दो सबसे वरिष्ठ बचे नेताओं को ख़त्म करने के बाद और तेज़ हो गया है.”
कात्ज़ ने इस ऑपरेशन में शामिल इसराइली वायुसेना के पायलटों और खुफिया अधिकारियों की भी सराहना की.
हालांकि, ईरान ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि लारिजानी और सुलेमानी की मौत हुई है या नहीं.
बयानों के लिए थे चर्चा में
अमेरिका-इसराइल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के मारे जाने के बाद से अली लारिजानी काफ़ी खुलकर अपनी बात रख रहे थे.
अली लारिजानी को आख़िरी बार 13 मार्च को तेहरान में कुद्स डे मार्च के दौरान सार्वजनिक रूप से देखा गया था. उनके एक्स अकाउंट पर पोस्ट की गई तस्वीरों में वह सड़क पर लोगों से बात करते और हाथ हिलाते नज़र आए थे.
एक दिन पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तंज़ कसा था. उन्होंने एक्स पर लिखा था, “ट्रंप कहते हैं कि वह जल्दी जीत चाहते हैं. लेकिन युद्ध शुरू करना आसान है, इसे कुछ ट्वीट्स से नहीं जीता जा सकता.”
उन्होंने आगे लिखा, “हम तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक आपको इस गंभीर गलत आकलन पर पछतावा न हो जाए.”
10 मार्च की एक और पोस्ट में लारिजानी ने कहा था कि ईरान ट्रंप की “धमकियों” से नहीं डरता. उन्होंने लिखा, “आपसे भी बड़े लोग ईरानी राष्ट्र को ख़त्म नहीं कर सके.”
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “सावधान रहें, कहीं ऐसा न हो कि आप ही ख़त्म हो जाएं.”
कैसी थी शख़्सियत?
जेरेमी बोवेन, बीबीसी संवाददाता
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इमेज कैप्शन, लारिजानी ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के करीबी थे.
अली लारिजानी को एक व्यावहारिक शख्सियत के रूप में देखा जाता रहा है.
हाल के हफ्तों में उन्होंने कुछ बहुत सख्त बयान दिए हैं, लेकिन वर्षों से उन्हें एक लचीले व्यक्ति के तौर पर देखा गया है, जो हर पहलू को समझने की कोशिश करता है.
शायद यही वजह है कि उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में भी देखा जाता है, जिनके साथ शायद बातचीत की जा सकती है.
लेकिन समस्या यह है कि इसराइल इनमें से किसी के साथ भी बातचीत नहीं करना चाहता.
इसराइल ने बार-बार कहा है कि वो तेहरान की सत्ता को खत्म करना चाहता है. इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू का लंबे समय से यही रुख़ रहा है.
इसराइल अब पहले से कहीं ज्यादा, फौजी ताकत के इस्तेमाल में विश्वास करता है.
अली लारिजानी कौन हैं?
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इमेज कैप्शन, लारिजानी 2005 से 2007 के बीच ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार भी रहे थे
अली लारिजानी ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (एएनएससी) के प्रभावशाली सचिव हैं।
उन्हें अगस्त 2025 में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने इस पद पर नियुक्त किया था. साथ ही उन्हें ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई का इस काउंसिल में प्रतिनिधि भी बनाया गया था.
ईरानी मीडिया में उन्हें सुप्रीम लीडर के सलाहकार के रूप में भी बताया है. वह मई 2008 से मई 2020 तक 12 साल तक ईरान की संसद के स्पीकर रहे.
हालांकि 2008 से 2012 तक उन्होंने संसद में प्रिंसिपलिस्ट गुट का नेतृत्व किया, लेकिन हाल के वर्षों में उन्हें “मध्यमार्गी कंज़र्वेटिव” के रूप में देखा जाता है.
स्पीकर बनने से पहले, लारिजानी 2005 से 2007 के बीच ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार भी रहे थे.
उनके भाई सादेग़ लारिजानी भी इस्लामिक रिपब्लिक में एक अहम शख्सियत हैं. वह एक्सपीडिएंसी काउंसिल के प्रमुख हैं, जो एक शीर्ष संस्था है और संसद तथा गार्जियन काउंसिल के बीच विवादों में अंतिम फैसला करती है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.