इमेज कैप्शन, बातचीत के लिए ईरान के नए प्रस्ताव पर ट्रंप ने कोई ब्योरा न देते हुए कहा कि वो इससे संतुष्ट नहीं हैं
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ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान को अपना नया प्रस्ताव भेजा है. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वो ईरान के नए प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं.
ट्रंप ने कहा है कि युद्धविराम की वजह से ईरान के ख़िलाफ़ ‘अभियान समाप्त’ हो गया है इसलिए उन्हें युद्ध जारी रखने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं है.
ट्रंप ने हाउस स्पीकर माइक जॉनसन और कार्यवाहक सीनेट अध्यक्ष चक ग्रासली को लिखे पत्र में कहा, “सात अप्रैल, 2026 के बाद से अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच कोई गोलीबारी नहीं हुई है. 28 फरवरी, 2026 को शुरू हुई शत्रुता समाप्त हो गई है.”
लेकिन यह नया रुख़ ट्रंप द्वारा कुछ घंटे पहले दिए गए बयानों के उलट है, जिसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि अमेरिका ईरानी मुद्दे से निपटने से ‘जल्दी पीछे नहीं हटेगा’.
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने दावा किया है कि युद्ध में अमेरिका को 100 अरब डॉलर का नुक़सान हुआ है.
पेंटागन के अधिकारियों ने 29 अप्रैल को अमेरिकी कांग्रेस में कहा था कि ईरान जंग में अमेरिका का 25 अरब डॉलर ख़र्च हुआ है.
ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच पांच हफ़्ते तक चली जंग के दौरान दो हफ़्ते का युद्धविराम हुआ था जिसकी समय सीमा पहले 22 अप्रैल तक और फिर से इसे आगे बढ़ा दिया गया.
इस बीच, युद्ध ख़त्म करने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक बार बात हो चुकी है लेकिन ये नाकाम रही थी. दूसरे दौर की बातचीत के लिए ईरान और ट्रंप ने अपने दूत पाकिस्तान नहीं भेजे.
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक़, ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए अपना प्रस्ताव पाकिस्तान को भेजा है.
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने कहा था कि पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता में एक औपचारिक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है.
ट्रंप ने क्या कहा?
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इमेज कैप्शन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए प्रस्ताव की चर्चा तो की लेकिन उन्होंने कोई ब्योरा नहीं दिया
अमेकिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान की ओर से बातचीत के लिए भेजे गए प्रस्तावों से संतुष्ट नहीं हैं.
उन्होंने कहा, “28 फ़रवरी, 2026 को शुरू हुई लड़ाई अब रुक गई है. लेकिन अमेरिका ईरान के साथ टकराव जल्दी ख़त्म नहीं करेगा, क्योंकि ऐसा करने पर कुछ सालों बाद हमें फिर वही समस्या झेलनी पड़ सकती है.”
शुक्रवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, ”ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन वे उनके प्रस्तावों से संतुष्ट नहीं हैं. अब देखते हैं आगे क्या होता है.”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी प्रस्तावों का ब्योरा नहीं दिया, लेकिन उन्होंने कहा, “हमने अभी-अभी ईरान के साथ बातचीत की है. देखते हैं क्या होता है, लेकिन मैं इतना जरूर कहूंगा कि मैं खुश नहीं हूं. उन्हें सही समझौता करना होगा. फिलहाल, मैं उनके प्रस्तावों से संतुष्ट नहीं हूं.”
राष्ट्रपति ने कहा, “हम बातचीत के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं. हम फ़ोन पर बात कर रहे हैं, उन्होंने (ईरान ने) कुछ कदम आगे बढ़ाए हैं, लेकिन मुझे यकीन नहीं है कि वे किसी समझौते पर पहुंच पाएंगे.”
ट्रंप ने कहा, “‘सनक भरे लोगों’ को परमाणु हथियार रखने की इजाज़त नहीं दी जा सकती.”
उन्होंने फिर दोहराया कि ‘ईरान की नौसेना को नष्ट किया जा चुका है और उसके 159 जहाज़ समुद्र की तलहटी में डुबो दिए गए हैं.’
उन्होंने आगे कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाना ‘ज़रूरी क़दम’ था. उनका तर्क था कि अगर ऐसा न किया जाता तो ‘ईरान इसराइल और बाक़ी मध्य पूर्व के देशों को तबाह कर सकता था.’
इससे पहले ट्रंप ने कांग्रेस को लिखे पत्र कहा कि ईरान के साथ अमेरिका की सैन्य झड़पें अब ‘समाप्त’ हो चुकी हैं, लेकिन उन्हें युद्ध के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेने की समयसीमा का पालन करने की जरूरत नहीं है.
क़ानून के मुताबिक़, किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई की जानकारी देने के 60 दिनों के भीतर कांग्रेस की मंजूरी लेनी होती है, वरना उसे सैन्य अभियान रोकना पड़ता है.
उधर, एक्सियोस ने पेंटागन के हवाले से अनुमान लगाया है कि ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के कारण ईरान को तेल राजस्व में लगभग 4.8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है.
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा-पेंटागन गुमराह कर रहा है
उधर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन पर युद्ध की वास्तविक लागत के बारे में लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है.
उन्होंने कहा है कि अमेरिका ने इस बारे में जो आंकड़े दिए हैं वो सही तस्वीर पेश नहीं करते.
उन्होंने कहा, ” अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर अप्रत्यक्ष लागत “बहुत अधिक” है. हर अमेरिकी परिवार की मासिक लागत लगभग 500 डॉलर है और यह तेजी से बढ़ रही है.”
अब्बास अराग़ची ने यह भी कहा कि “इसराइल पहले” का मतलब हमेशा यही होता है कि अमेरिका सबसे आख़िरी में आता है.
अराग़ची का ये बयान अमेरिकी कांग्रेस में पेंटागन अधिकारियों की सुनवाई के बाद आया है, जिसमें उन्होंने बताया था कि ईरान के ख़िलाफ़ ‘ऑपरेशन फ़्यूरी’ में 25 अरब डॉलर ख़र्च हुए हैं.
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इमेज कैप्शन, ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई युद्ध शुरू होने के बाद से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं (फ़ाइल फ़ोटो)
ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई की ओर से एक और लिखित बयान जारी हुआ है. इसमें उन्होंने ईरान आवाम से ‘आर्थिक मुक़ाबला’ करने की अपील की है.
बयान में मोजतबा ख़ामेनेई ने कहा, “ईरान ने सैन्य टकराव में दुनिया को अपनी ख़ास ताक़त दिखाई, अब उसे आर्थिक और सांस्कृतिक मोर्चे पर भी दुश्मनों को हराना होगा.”
उन्होंने कहा, “कामगारों का समर्थन करना चाहिए और स्थानीय उत्पादों के इस्तेमाल को प्राथमिकता देनी चाहिए.”
ख़ामेनेई ने कारोबारियों से अपील की, “कारोबार करने वाले लोग, ख़ासकर जो मुश्किल में हैं, कोशिश करें कि अपने कर्मचारियों को नौकरी से न निकालें.”
ईरान को टोल देने वालों को अमेरिका की चेतावनी
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इमेज कैप्शन, अमेरिका ने कहा है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों ने ईरान को टोल दिया तो उनके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई होगी
इस बीच, अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने एक चेतावनी जारी की है कि जो भी व्यक्ति या कंपनी होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने के लिए ईरान को “टोल” (शुल्क) देती है, वह अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के जोख़िम में होगी.
यह अहम समुद्री मार्ग अभी भी लगभग बंद ही है, जिसके कारण दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है.
दुनिया के लगभग 20 फ़ीसदी तेल और गैस की समुद्री सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है. इसलिए इसमें रुकावट आने से वैश्विक ऊर्जा कीमतों और व्यापार पर सीधा असर पड़ता है.
आमतौर पर हर महीने करीब 3,000 जहाज़ इस जलडमरूमध्य से होकर गुज़रते रहे हैं.
लेकिन अमेरिका और ईरान की जंग की वजह से इस मार्ग पर आवाजाही बेहद कम हो गई है.
इस बीच ख़बर है कि अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने सहयोगियों के लिए 8.6 अरब डॉलर के हथियार सौदों को मंजूरी दी है.
अमेरिका जिन देशों को हथियार देगा, उनमें इसराइल, क़तर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) शामिल हैं.
इस फ़ैसले के तहत क़तर को पैट्रियट एयर एंड मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम की सप्लाई और सपोर्ट सर्विसेज़ दी जाएंगी, जिसकी क़ीमत 4 अरब डॉलर से ज़्यादा है.
इसके अलावा एडवांस्ड प्रिसिजन किल वेपन सिस्टम भी बेचे जाएंगे, जिनकी क़ीमत 992.4 मिलियन डॉलर है.
कुवैत को 2.5 अरब डॉलर का इंटीग्रेटेड बैटल कमांड सिस्टम और इसराइल को 992 मिलियन डॉलर से ज़्यादा क़ीमत के एडवांस्ड प्रिसिज़न किल वेपन सिस्टम बेचने की मंज़ूरी दी गई है.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने यूएई को भी यही सिस्टम बेचने की मंजूरी दी है, जिसकी क़ीमत 147 मिलियन डॉलर से ज़्यादा है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित