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ईरान के साथ अमेरिका-इसराइल की जंग: नए वर्ल्ड ऑर्डर की एक झलक, जहां देशों पर ‘सिर्फ़ मज़े के लिए’ हमला हो सकता है

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Mar 18, 2026


एक मिली-जुली तस्वीर जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उदास चेहरे के साथ दिखाया गया है, इसमें एक टैंक और धमाका भी है, और उस पर बड़ी-बड़ी दरारें हैं

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, दूसरे विश्व युद्ध के बाद जो वर्ल्ड ऑर्डर बना उसे अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों और यूएन जैसे संस्थानों के ज़रिए संचालित किया जाता रहा है. लेकिन अब हालात बदल रहे हैं.

अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच चल रहा टकराव आगे चलकर दुनिया के उन पहले बड़े संघर्षों में गिना जा सकता है, जो एक नए उभरते वैश्विक सिस्टम या वर्ल्ड ऑर्डर में लड़े जा रहे हैं, जहां दशकों से नज़र आ रहे अंतरराष्ट्रीय नियमों का असर पहले जैसा मज़बूत नहीं रह गया है.

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद लंबे समय तक युद्ध और कूटनीति एक तय ढांचे के अंदर चलते थे, जिसे अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं ने बनाया था.

भले ही कई बार इन नियमों को अपने हिसाब से इस्तेमाल किया गया, लेकिन देश आमतौर पर अपनी कार्रवाई को उसी सिस्टम के अंदर सही ठहराने की कोशिश करते थे. सैन्य कार्रवाई के साथ क़ानूनी दलीलें, कूटनीतिक बातचीत या अंतरराष्ट्रीय सहयोग का गठन भी होता था.

लेकिन मौजूदा युद्ध में इन बातों की भूमिका बहुत सीमित दिखाई दे रही है. रणनीतिक फ़ैसले अब ज़्यादा तुरंत सैन्य, राजनीतिक या सुरक्षा जमा-गुणा के आधार पर लिए जा रहे हैं, बजाय इसके कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय क़ानून या वैश्विक सहमति के साथ जोड़ा जाए.

इन शर्तों में ईरान के लिए ऐसी स्थिति कोई नई नहीं है. कई दशकों से वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और राजनीतिक अलगाव में जी रहा है.

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