इमेज कैप्शन, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई 8 मार्च को नियुक्ति के बाद से अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं….में
ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई 8 मार्च को नियुक्ति के बाद से अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं, जिससे उनकी सेहत और अधिकार को लेकर अटकलों का बाज़ार गर्म है.
अधिकारियों ने इस ख़ालीपन को लिखित बयानों, एआई से बनाई गई तस्वीरों और प्रतीकात्मक इशारों के ज़रिए भरने की कोशिश की है, ताकि यह दिखाया जा सके कि नेतृत्व की निरंतरता बनी हुई है.
इससे यह धारणा और मज़बूत हुई है कि असली ताक़त उस आईआरजीसी नेता के हाथ में है, जो अब तक सामने नहीं आया है.
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कहां हैं मोजतबा ख़ामेनेई?
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इमेज कैप्शन, मोजतबा ख़ामेनेई की यह तस्वीर 2024 में तेहरान में हिज़बुल्लाह के ऑफ़िस में ली गई थी
नियुक्ति के क़रीब एक महीने बाद भी ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई अब तक दिखाई नहीं दिए हैं.
56 साल के इस धार्मिक नेता ने 8 मार्च को नेता बनाए जाने के बाद न तो कोई भाषण दिया है, न कैमरे पर आए हैं और न ही उनकी कोई ऐसी ताज़ा तस्वीर सामने आई है जिसकी पुष्टि हो सके. उनकी लगातार गैर-हाज़िरी ने सुरक्षा और धार्मिक तंत्र के लिए उनकी सत्ता को मज़बूत करने की कोशिशों को मुश्किल बना दिया है.
बताया जाता है कि 28 फरवरी को हुए हमले में मोजतबा घायल हो गए थे. इसी हमले में उनके पिता अली खामेनेई की मौत हुई थी.
उनके पिता के टेलीविज़न पर दिए जाने वाले भाषण ईरान की राजनीति का नियमित हिस्सा बन गए थे लेकिन इसके उलट मोजतबा खामेनेई ने अब तक सिर्फ़ सरकारी टीवी पर एंकरों द्वारा पढ़े गए बयानों के ज़रिए ही बात की है.
11 मार्च को द गार्जियन ने रिपोर्ट किया था कि मोजतबा खामेनेई अपने पिता के परिसर पर हुए हमले में घायल हुए थे. यह जानकारी ईरान के साइप्रस में राजदूत के हवाले से दी गई थी.
राजनयिक ने कहा था कि खामेनेई के पैर और हाथ में चोटें आई थीं. हालांकि उसी दिन राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के बेटे ने कहा कि सर्वोच्च नेता पूरी तरह स्वस्थ हैं.
12 मार्च को खामेनेई का पहला संदेश एक टीवी एंकर ने पढ़कर सुनाया था, जिसमें उन्होंने बदला लेने की बात कही थी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी थी.
18 मार्च को खामेनेई ने इसराइली हमलों में मारे गए सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी और बसीज कमांडर गुलामरेज़ा सुलेमानी की मौत का बदला लेने का वादा किया.
20 मार्च को नौरोज़ के मौके पर उन्होंने एक बार फिर देश को सिर्फ़ लिखित संदेश के ज़रिए संबोधित किया, जबकि उनके पिता आम तौर पर ईरानी नए साल की शुरुआत में टीवी पर दिखाई देते थे.
मार्च के आखिर में उन्होंने ईरान के ख़िलाफ़ ‘आक्रामकता’ पर ‘स्पष्ट रुख़ अपनाने के लिए’ इराक़ के मौलवियों और वहां की जनता का धन्यवाद किया.
उसी दिन उन्होंने एक और लिखित बयान जारी किया, जिसमें नेचर डे पर पेड़ लगाने की अपील की और कहा कि यह ईरान के पर्यावरण को निशाना बना रहे ‘अमेरिकी और ज़ायोनिस्ट शैतानों’ के ख़िलाफ़ एक कदम है. लेकिन इसके बावजूद न कोई तस्वीर सामने आई, न आवाज़ सुनाई दी और न ही कोई सार्वजनिक उपस्थिति दर्ज हुई.
एआई तस्वीरें, कार्डबोर्ड मीम और अमेरिका का आकलन
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इमेज कैप्शन, नेचर डे में नए सर्वोच्च नेता की तस्वीरों के साथ तेहरान में प्रदर्शन करतीं महिलाएं
नेतृत्व में पैदा हुए इस ख़ालीपन को प्रचार, इंटरनेट पर मज़ाक और भ्रम के मिले जुले माहौल ने भर दिया है.
हालिया और सत्यापित तस्वीरें न होने की वजह से सरकार से जुड़े मीडिया ने एआई से बनाई गई तस्वीरें चलानी शुरू कर दीं.
डिजिटल तौर पर बनाई गई यह छवि जल्द ही मज़ाक का विषय बन गई.
एक वायरल वीडियो में कथित तौर पर समर्थकों को नए नेता के एक कार्डबोर्ड कटआउट से पर्दा हटाते देखा गया जो दरअसल एआई से बनाई गई नक़ली वीडियो थी, और मोटे तौर पर धार्मिक शहर क़ोम में पहले शूट किए गए असली वीडियो पर आधारित थी.
फैक्ट चेक करने वालों ने बताया कि असली वीडियो में कार्डबोर्ड मूर्ति नहीं, बल्कि एक फ़ोटो फ़्रेम था, और एआई वर्ज़न में अरबी लिखावट भी टेढ़ी मेढ़ी थी. लेकिन इसके बावजूद ‘कार्डबोर्ड आयतुल्लाह’ वाला मीम चल पड़ा और विरोध करने वाले लोगों के साथ-साथ आम यूज़र्स ने भी इसे बड़े पैमाने पर फैलाया.
अमेरिकी अधिकारियों ने भी अपने अपने आकलन सामने रखे. अमेरिका के युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि खामेनेई इस हमले में ‘संभवतः घायल हुए हैं और शायद उनका चेहरा बिगड़ गया है.’
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मोजतबा ‘या तो मर चुके हैं या फिर बहुत बुरी हालत में हैं, क्योंकि किसी ने उनकी कोई बात नहीं सुनी है’.
सिंहासन के पीछे की ताक़त?
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इमेज कैप्शन, माना जा रहा है कि आईआरजीसी युद्ध के दौरान असली सत्ता केंद्र की तरह काम कर रही है
खामेनेई चोट से उबर रहे हैं, किसी हत्या के ख़तरे से बच रहे हैं या किसी और वजह से सामने नहीं आ पा रहे हैं, कारण चाहे जो भी हो लेकिन उनकी यह अदृश्यता राजनीतिक बदलाव की दिशा तय कर रही है.
विश्लेषकों का कहना है कि इससे यह भावना मज़बूत हो रही है कि कथित तौर पर उनकी नियुक्ति का समर्थन करने वाली आईआरजीसी युद्ध के दौरान असली सत्ता केंद्र की तरह काम कर रही है.
ऐसे समय में जब नए सर्वोच्च नेता से उम्मीद की जाती है कि वह सार्वजनिक रूप से सामने आकर, बैठकों का नेतृत्व कर और प्रतीकात्मक रस्मों के माध्यम से अपना अधिकार दिखाएं, उनकी ग़ैर-मौजूदगी सत्ता के उत्तराधिकार की वैधता को कमज़ोर कर सकती है और व्यवस्था को स्थिर रखना मुश्किल बना सकती है.
फ़िलहाल, ईरान का सबसे ताक़तवर आदमी अब भी नज़र नहीं आया है. और हर गुज़रते दिन के साथ अधिकारियों के लिए यह कहना और भी मुश्किल होता जा रहा है कि केवल लिखित बयान और एआई से बनी तस्वीरें ही नेतृत्व, या ज़िंदगी का सबूत हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.