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ईरान को लेकर इस्लामिक देश इस हद तक क्यों विभाजित हैं?

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Jan 16, 2026


ईरान

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी के बारे में कहा जाता है कि वहां सऊदी अरब जो चाहता है, वही होता है

“मुस्लिम देशों को बाहर वालों (अमेरिका) के दबाव में नहीं आना चाहिए, जो उन्हें आपस में लड़ाते हैं और बाँटते हैं. मुस्लिमों को ख़ुश होना चाहिए, जब भी कोई मुस्लिम देश मज़बूत बने. हमारी ताक़त आपकी ताक़त है और आपकी ताक़त हमारी है”, साल 2010 में ईरान के तत्कालीन विदेश मंत्री मनूचेहर मोत्तकी ने एक सम्मेलन के दौरान यह बात कही थी.

ईरान जब भी अमेरिका और इसराइल से आमने-सामने होता है तो वह इस्लामी पहचान को प्रमुखता से रेखांकित करता है.

लेकिन यह पहचान अब तक इतनी बड़ी नहीं बन पाई है कि इस्लामिक देश अपने हितों के सामने धार्मिक पहचान को प्राथमिकता दें.

1979 की क्रांति के बाद से इस इलाक़े में ईरान एकमात्र देश है, जो अमेरिकी दबदबे वाली व्यवस्था को चुनौती देता रहता है. बाक़ी के इस्लामिक देश अमेरिका क़रीबी सहयोगी हैं. ऐसे में स्थिति और जटिल हो जाती है.

ईरान की क़रीबी चीन और रूस से है लेकिन ये दोनों देश अमेरिका से सीधे सैन्य टकराव से परहेज करते हैं.

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