बीते दिनों ईरान में कुछ लोगों ने ऐसी ही बारिश का ज़िक्र किया. और इसके बाद इस काली बारिश की चर्चा तेज़ हो गई.
तो आख़िर ये होती क्या है और कितनी ख़तरनाक है?
28 फ़रवरी से ईरान पर शुरू हुए अमेरिका-इसराइल के हमलों के बाद वहां की राजधानी तेहरान के आसपास कम से कम चार ऑयल फैसिलिटीज़ पर हमलों की पुष्टि हो चुकी है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के कुछ हिस्सों में धुंध और प्रदूषण की वजह से सूरज तक नहीं दिख रहा है और जलने की तेज गंध महसूस हो रही है.
एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि प्रदूषण वाले तत्व बहुत ज़्यादा बढ़ गए हैं.
यहां तक कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी चेतावनी दी है कि ऑयल फैसिलिटीज़ पर हमले स्थानीय लोगों के लिए स्वास्थ्य के लिए बड़ा ख़तरा पैदा कर सकते हैं.
तेहरान और उसके आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण बहुत ज्यादा बढ़ गया है. इस शहर की आबादी लगभग एक करोड़ है, साथ ही लाखों लोग आसपास के इलाकों में रहते हैं.
9 मार्च को ली गई ताज़ा सैटेलाइट तस्वीरों को बीबीसी वेरिफ़ाई ने रिव्यू किया, जिनमें तेहरान में मौजूद दो बड़ी ऑयल फेसिलिटीज़ में अभी भी आग लगी हुई देखी जा सकती थी.
इसके साथ ही इन तस्वीरों में ईरान की राजधानी के उत्तर-पश्चिम में मौजूद शहरान डिपो और दक्षिण-पूर्व में मौजूद तेहरान ऑयल रिफाइनरी से भी धुआं निकलता दिख रहा है.
कितनी ख़तरनाक ये बारिश
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तेल रिफाइनरियों पर हुए हमलों की वजह से बहुत ज्यादा वायु प्रदूषण हो सकता है क्योंकि इनमें अलग-अलग तरह के केमिकल्स होते हैं.
जब तेल पूरी तरह नहीं जल पाता, यानी जब पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं होती, तो कार्बन डाइऑक्साइड और पानी की जगह कार्बन मोनोऑक्साइड और काले रंग के कण निकल सकते हैं.
तेल में लगी आग से सल्फर और नाइट्रोजन ऑक्साइड भी निकल सकते हैं. अगर ये बारिश के पानी में घुल जाएं तो एसिड बना सकते हैं.
इसके साथ ही हानिकारक हाइड्रोकार्बन, मैटेलिक कंपाउंड और तेल की बूंदें भी निकल सकती हैं.
तेहरान में 20 वर्ष की एक लड़की ने कहा कि ऑयल फैसिलिटीज़ पर हुए हमलों के कारण वह “जलने की गंध” महसूस कर सकती हैं.
उन्होंने शनिवार को बीबीसी पर्शियन से कहा, “मुझे सूरज दिखाई नहीं दे रहा. हर तरफ भयानक धुआं है. यह अब भी बना हुआ है.”
वायु प्रदूषण का सटीक आकलन करना मुश्किल है, क्योंकि जमीन पर इसे मापने वाले जो डिवाइस हैं, उनका कोई डेटा उपलब्ध नहीं है.
साथ ही हवा, बादल और दूसरी वजहों से सैटेलाइट डेटा को समझना भी कठिन हो जाता है.
लेकिन जिन ऑयल साइट्स को नुकसान पहुंचा है, वहां से निकलने वाले कई केमिकल्स के मिश्रण को देखते हुए, वैज्ञानिकों को इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह प्रदूषण नुकसानदेह और बेहद गंभीर है.
यह बीजिंग या दिल्ली जैसे शहरों में दिखने वाले स्मॉग से काफी अलग है.
रीडिंग यूनिवर्सिटी के रिसर्च साइंटिस्ट डॉ. अक्षय देओरास कहते हैं, “ईरान में जो हुआ है, वह निश्चित रूप से बहुत अलग है, क्योंकि यह सब मिसाइल गिरने और तेल रिफ़ाइनरियों पर हवाई हमलों के कारण हो रहा है. कई संघर्षों में धूल और कणों का प्रदूषण बढ़ जाता है, लेकिन इस मामले में अलग-अलग रसायनों का “मिश्रण” निश्चित रूप से असामान्य है.”
जल स्रोत हो सकते हैं प्रदूषित
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रविवार को, तेहरान में रहने वाले एक शख़्स ने काली बारिश होने की बात कही.
काली बारिश, असल में ऐसी बारिश के लिए अनौपचारिक शब्द है, जिसमें प्रदूषित चीज़ें शामिल मिली होती हैं और बारिश की बूदों का रंग काला हो जाता है.
बारिश के ज़रिए हवा में मौजूद पॉल्यूटेंट्स का बहकर नीचे आना सामान्य बात है.
लेकिन वैज्ञानिकों ने बीबीसी वेरिफ़ाई को बताया कि काली बारिश बहुत दुर्लभ होती है और आमतौर पर यह कालिख और दूसरे एयर पॉल्यूटेंट्स के हाई लेवल पर होने की वजह से होती है.
डॉ. अक्षय देओरास समझाते हैं, “बारिश की बूंदें छोटे स्पंज या चुंबक की तरह काम करती हैं. वे गिरते समय हवा में मौजूद कणों को अपने साथ समेट लेती हैं. यही वजह है कि लोगों ने इसे ‘काली बारिश’ बताया.”
यह भी संभव है कि कुछ बड़े प्रदूषित कण बिना बारिश के ही हवा से नीचे गिर गए हों.
बीबीसी वेदर के फोरकास्ट के मुताबिक़ तेहरान में आने वाले दिनों में दोबारा बारिश के साथ तेज हवा चलने की संभावना है.
इससे पॉल्यूटेंट्स के फैलने और हवा से धुलकर नीचे आने में मदद मिल सकती है.
लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि तेहरान में प्रदूषण का खतरा खत्म हो जाएगा.
ये कण नदियों और दूसरे जल स्रोतों में मिल सकते हैं. अगर वे जमीन पर जम जाएं और बाद में जमीन सूख जाए, तो हवा उन्हें फिर से उड़ा सकती है और वे दोबारा हवा में फैल सकते हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.