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अमेरिका, यूरोप और एशिया की बड़ी टेक. कंपनियों के शेयरों की क़ीमत में कई खरब डॉलर की गिरावट आई है.
अमेरिका में हुए मिडटर्म इलेक्शन के बाद आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विकास की रफ़्तार धीमी होने की आशंका बढ़ गई है.
अमेरिका में गुरुवार को टेक कंपनियों पर आधारित नैस्डैक शेयर इंडेक्स में 5.5 फ़ीसदी की गिरावट आई.
इससे बाज़ार में कंपनियों की कुल क़ीमत क़रीब 2.5 ट्रिलियन डॉलर घट गई. अमेरिका के दूसरे बड़े शेयर इंडेक्स में भी भारी गिरावट देखी गई.
निवेशकों को चिंता है कि एआई पर सख़्त नियम लागू हो सकते हैं. इसकी वजह यह है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों ने उन डेटा सेंटरों का विरोध किया है, जिनकी ज़रूरत इस तकनीक को चलाने के लिए होती है.
शेयरों में यह गिरावट इस चिंता के बीच आई है कि एआई पर ख़र्च किए जा रहे भारी पैसे से कंपनियों को उतना फ़ायदा होगा भी या नहीं.
शेयरों में यह गिरावट इस चिंता के बीच आई है कि एआई पर ख़र्च किए जा रहे भारी पैसे से कंपनियों को उतना फ़ायदा होगा भी या नहीं.
गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाज़ार में आई गिरावट के कारण टेक कंपनियों के उस समूह को क़रीब एक ट्रिलियन डॉलर का नुक़सान हुआ, जिसे ‘मैग्निफ़िसेंट सेवन’ कहा जाता है. इसमें एप्पल, एनवीडिया और टेस्ला जैसी कंपनियां शामिल हैं.
एनवीडिया के शेयरों में नौ प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई. दूसरी चिप बनाने वाली कंपनियों को भी नुक़सान हुआ. एमडी और माइक्रोन दोनों के शेयर 17 प्रतिशत से ज़्यादा गिर गए.
एलन मस्क की कंपनियों स्पेसएक्स और टेस्ला के शेयरों में भी भारी गिरावट आई. स्पेसएक्स के शेयर 8 प्रतिशत और टेस्ला के शेयर क़रीब 11 प्रतिशत गिर गए. इससे इन कंपनियों की कुल बाज़ार क़ीमत में 300 अरब डॉलर से ज़्यादा की कमी आई.
नैस्डैक में भारी गिरावट के कारण बाज़ार में इसकी कुल क़ीमत क़रीब 2.5 ट्रिलियन डॉलर कम हो गई.
अब यह इंडेक्स उस स्थिति में पहुंच गया है, जिसे शेयर बाज़ार के जानकार ‘करेक्शन’ कहते हैं.
इसका मतलब है कि किसी इंडेक्स या कंपनी की क़ीमत अपने हाल के सबसे ऊंचे स्तर से कम से कम दस प्रतिशत गिर गई है.
हालांकि, पिछले कुछ समय में एआई को लेकर बढ़े उत्साह के कारण टेक कंपनियों के शेयरों में काफ़ी तेज़ी आई थी.
इसलिए गुरुवार की गिरावट के बाद भी नैस्डैक की स्थिति एक साल पहले के मुक़ाबले बेहतर है. इस साल की शुरुआत से अब तक इसमें क़रीब 4.6 प्रतिशत की बढ़त बनी हुई है.
एशिया और यूरोप तक दिख रहा असर
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शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाज़ार में गिरावट का असर एशिया तक पहुंच गया. जापान का निक्केई शेयर इंडेक्स छह प्रतिशत गिरकर बंद हुआ.
मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनियों किओक्सिया और टोक्यो इलेक्ट्रॉन के शेयरों में भी भारी गिरावट आई.
दक्षिण कोरिया के कोस्पी इंडेक्स में एक समय आठ प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई.
इसके बाद वहां शेयर बाज़ार में ‘सर्किट ब्रेकर’ लागू करना पड़ा. यह एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें घबराहट में होने वाली बिकवाली को रोकने के लिए कुछ समय के लिए शेयरों की ख़रीद-बिक्री रोक दी जाती है.
आख़िरकार कोस्पी इंडेक्स छह प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ. चिप बनाने वाली कंपनी एसके हाइनिक्स के शेयर 10 प्रतिशत से ज़्यादा गिर गए.
शुक्रवार को यूरोप के शेयर बाज़ार भी गिरावट के साथ खुले. हालांकि, वहां गिरावट उतनी ज़्यादा नहीं थी, क्योंकि इन बाज़ारों में टेक कंपनियों के शेयरों की संख्या कम है. ब्रिटेन का एफ़टीएसई 100 इंडेक्स 1.6 प्रतिशथ गिरा, जबकि जर्मनी का डेक्स इंडेक्स 1.3 प्रतिशत नीचे रहा.
एजे बेल में बाज़ार से जुड़े मामलों के प्रमुख डैन कोट्सवर्थ ने कहा कि निवेशकों को एआई पर ख़र्च किए जा रहे भारी पैसे को लेकर चिंता है, क्योंकि अभी यह साफ़ नहीं है कि इस ख़र्च से कब और कितना फ़ायदा मिलेगा.
उन्होंने आगे कहा, “मिडटर्म के नतीजों ने स्थिति को और उलझा दिया है. अब डेमोक्रेट्स का प्रभाव बढ़ गया है. वे डेटा सेंटरों के निर्माण की रफ़्तार धीमी कर सकते हैं और इस क्षेत्र के लिए नए नियम बनाने पर विचार कर सकते हैं.”
उन्होंने कहा, “एआई की पूरी कहानी अब तक तेज़ी से आगे बढ़ने पर आधारित रही है. लेकिन अब इसकी रफ़्तार धीमी पड़ने और इस पूरी व्यवस्था में कुछ चीज़ें बिगड़ने का ख़तरा है.”
डेटा सेंटरों पर दबाव
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अमेरिका के अलग-अलग इलाक़ों में चुनाव लड़ रहे डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों ने डेटा सेंटरों और एआई के बढ़ते विस्तार को धीमा करने की बात कही थी.
देशभर में मतदान के दौरान ऐसे दर्जनों प्रस्ताव भी रखे गए थे, जिनका मक़सद इन सेंटर्स के निर्माण पर रोक लगाना या उन्हें सीमित करना था. ये सेंटर्स एआई तकनीक को चलाने के लिए बेहद ज़रूरी हैं.
मंगलवार को हुए मिडटर्म इलेक्शन में डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स, दोनों में जीत हासिल की. इस तरह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के बाकी समय के लिए संसद के दोनों सदनों का नियंत्रण डेमोक्रेटिक पार्टी के पास चला गया.
डेमोक्रेट सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “अमेरिकी नहीं चाहते कि बड़ी टेक कंपनियों के ताक़तवर मालिक पर्यावरण को नुक़सान पहुंचाएं, नौकरियां ख़त्म करें और इंसानियत के भविष्य को ख़तरे में डालें. देशभर में डेटा सेंटरों के निर्माण पर तुरंत रोक लगाई जाए.”
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में शेयर बाज़ार में आई गिरावट के लिए अपने राजनीतिक विरोधियों को ज़िम्मेदार ठहराया.
उन्होंने कहा, “चुनाव के नतीजों के आधार पर शेयर बाज़ार के इतिहास के सबसे बुरे दिनों में से एक रहा.”
उन्होंने आगे लिखा, “याद रखिए, यह रिपब्लिकन पार्टी की वजह से नहीं हुआ, बल्कि डेमोक्रेट्स की वजह से हुआ. हालांकि, चिंता मत कीजिए, हम जल्द ही किसी न किसी तरह पहले से कहीं ज़्यादा बड़े और मज़बूत बनेंगे. अमेरिका को फिर से महान बनाएं!”
एक सोशल पोस्ट से तो ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने वोटरों पर भी निशाना साधा.
उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “आज शेयर बाज़ार इसलिए गिरा क्योंकि मंगलवार को डेमोक्रेट्स को बड़ी जीत मिली. यह देखकर दुख होता है. इसके लिए आप ख़ुद ही ज़िम्मेदार हैं!”
टेक कंपनियों के कुछ लीडर्स ने कहा है कि मिडटर्म इलेक्शन में डेटा सेंटरों के ख़िलाफ़ लोगों की नाराज़गी देखकर वे हैरान रह गए थे.
ओपनएआई के प्रेसीडेंट और कॉ-फ़ाउंडर ग्रेग ब्रॉकमैन ने का मानना है कि डेटा सेंटरों को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया से हर कोई हैरान था.
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए और काम करने की ज़रूरत है कि स्थानीय लोग भी इन परियोजनाओं का समर्थन करें.
कैलिफ़ोर्निया के नापा में आयोजित डब्ल्यूएसजे टेक कॉन्फ़्रेंस में ब्रॉकमैन ने बुधवार शाम को कहा, “इस साल हमने बहुत कुछ सीखा है. सैन फ़्रांसिस्को से टेक्सास, जॉर्जिया और दूसरी जगहों पर डेटा सेंटर बनाने के लिए सिर्फ़ सोशल मीडिया पर पोस्ट करके यह कहना काफ़ी नहीं है कि इससे फ़ायदा होगा. आपको वहां के लोगों के बीच जाना होगा और उन्हें अपनी बात समझानी होगी.”
लिली जमाली की अतिरिक्त रिपोर्टिंग के साथ.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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