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एनसीईआरटी की क‍िताब पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला: क्‍या अदालत की आलोचना करना अब मुश्‍क‍िल होगा?

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Mar 19, 2026


सुप्रीम कोर्ट की इमारत

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर अध्याय को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेकर दो आदेश द‍िए हैं

राष्‍ट्रीय शैक्ष‍िक अनुसंधान एवं प्रश‍िक्षण पर‍िषद (एनसीईआरटी) की आठवीं कक्षा की सामाज‍िक व‍िज्ञान की किताब पर सुप्रीम कोर्ट ने दो सख़्त आदेश जारी किए हैं.

इस किताब (एक्‍सप्‍लोर‍िंग सोसाइटी: इंड‍िया एंड ब‍ियोंड) में न्‍यायपालि‍का के बारे में एक अध्याय था. इसमें एक ह‍िस्‍से का शीर्षक था- ‘करप्शन इन द ज्यूडिशियरी’ यानी न्यायपालिका में भ्रष्टाचार. इसमें लिखा था कि लोगों को न्यायपालिका में अलग-अलग स्तरों पर भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है.

इस किताब के बारे में एक ख़बर अंग्रेज़ी अख़बार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में छपी. इसके बाद कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे वरिष्ठ वकीलों ने मुख्‍य न्‍यायाधीश जस्‍ट‍िस सूर्यकांत, न्‍यायमूर्त‍ि जॉयमाल्‍या बागची और न्‍यायमूर्त‍ि व‍िपुल एम पंचोली की पीठ के सामने इस अध्याय का मुद्दा उठाया था. कप‍िल सिब्बल ने कहा था, “हम काफ़ी परेशान हैं. आठवीं कक्षा के बच्‍चे-बच्‍च‍ियों को पढ़ाया जा रहा है कि न्यायपालिका भ्रष्ट है…”

इसके तुरंत बाद, सुप्रीम कोर्ट ने ख़ुद से मामले का संज्ञान लिया और कुछ द‍िनों के अंदर दो आदेश द‍िए. 26 फ़रवरी को अपने पहले आदेश में ही कोर्ट ने इस किताब पर पाबंदी लगा दी और तब तक छपी सभी किताबों को वापस लेने को कहा.

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