चीन और भारत, किसको किसकी ज़्यादा ज़रूरत- द लेंस
पीएम नरेंद्र मोदी जापान का दौरा पूरा कर एससीओ की बैठक के लिए चीन जा रहे हैं. उनके इस फ़ैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीति में काफ़ी दिलचस्पी पैदा कर दी है.
वैसे पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स की बैठक के दौरान रूस में पिछले साल अक्तूबर में मिले थे, मगर मोदी 2018 के बाद से चीन की यात्रा पर नहीं गए हैं. यानी सात साल बाद वो चीन की यात्रा पर जा रहे हैं.
2020 में गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद जो रिश्ते बिगड़े थे, अधिकारियों के बीच हुई मुलाक़ातों ने उनमें भी सुधार के संकेत दिए हैं.
वहीं ये मुलाक़ात ऐसे वक्त पर हो रही है, जब अमेरिका ने भारत पर 50 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाया है. ऐसे में कई सवाल उठ रहे हैं.
क्या भारत और चीन वास्तव में क़रीब आ सकते हैं? क्या भारत चीन पर भरोसा कर सकता है? चीन में इस यात्रा को कैसे देखा जा रहा है?
क्या आर्थिक ज़रूरतों के कारण भारत सुरक्षा से जुड़े विषयों पर नरम रुख़ अपना रहा है? क्या चीन इस स्थिति का किसी तरह फ़ायदा उठा सकता है?
द लेंस के आज के एपिसोड में इन सभी मुद्दों पर चर्चा की गई.
इस चर्चा में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा के साथ शामिल हुईं ओपी जिंदल विश्वविद्यालय में चाइना स्टडीज़ की प्रोफ़ेसर श्रीपर्णा पाठक, चीन में रह चुके और वहां के विषयों को समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार सैबल दासगुप्ता और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ रिटायर्ड कर्नल अजय शुक्ला.
प्रोड्यूसरः सईदुज़्जमान
गेस्ट कोऑर्डिनेटरः संगीता यादव
वीडियो एडिटिंगः जमशेद अली ख़ान
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित