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क्या ईरान का साथ देंगे हिज़्बुल्लाह, हूती और इराक़ी शिया गुट?

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Mar 3, 2026


बेरूत में प्रदर्शन

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के मारे जाने के बाद लेबनान की राजधानी बेरूत में प्रदर्शन हुए हैं

पिछले कई दशकों से ईरान ने अपनी रक्षा रणनीति को केवल मिसाइलों, हवाई रक्षा प्रणाली और आंतरिक क्षमताओं तक सीमित रखने के बजाय इसे क्षेत्र में अपने प्रभाव से जोड़ने की कोशिश की है.

इसी रणनीति के तहत ईरान ने लेबनान, इराक़, सीरिया और यमन में सशस्त्र ग़ैर-राज्य समूहों के नेटवर्क (यानी सशस्त्र ताक़तों का ‘ग्रे ज़ोन’) में निवेश किया है.

ईरान की यह रणनीति न तो पूरी तरह से पारंपरिक युद्ध पर आधारित थी और न ही स्थायी शांति पर. यह रणनीति दबाव, धमकियों और सीमित मगर अस्पष्ट हमलों के सिलसिले पर आधारित है, जो दुश्मन को व्यस्त तो रखती है लेकिन दूसरी ओर ईरान को किसी भी वैश्विक शक्ति के साथ बड़े पैमाने पर टकराव की तरफ़ नहीं ले जाती.

हालांकि 7 अक्तूबर 2023 के बाद से इसराइल ने ईरान के इस नेटवर्क में शामिल विभिन्न तत्वों को निशाना बनाया है.

शुरुआत में इसराइल की ओर से ईरान से जुड़े समूहों को लक्ष्य बनाया गया और बाद में क्षेत्र में ईरानी ठिकानों और यहां तक कि ईरान के भीतर भी हमले किए गए.

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