इमेज कैप्शन, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री ख़ालिद बिन सलमान से मुलाक़ात करते हुए पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर
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ईरान पर इसराइल और अमेरिका के हमलों के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने सऊदी अरब के रक्षा मंत्री ख़ालिद बिन सलमान से मुलाक़ात की है.
ये मुलाक़ात सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको की रिफ़ाइनरी पर ईरानी हमले के चंद दिनों के बाद हुई है.
सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौता है. इसके तहत किसी एक देश पर हमला दूसरे देश पर भी हमला माना जाएगा.
वहीं पाकिस्तान के ईरान से भी अच्छे संबंध हैं. बीबीसी उर्दू के मुताबिक़ पाकिस्तान ने ईरान पर इसराइल के हमले की निंदा की है. उसने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई को मारने की भी निंदा की है. लेकिन ईरान के जवाबी हमलों के बाद उसने सऊदी अरब के समर्थन में खड़े रहने का वादा किया है.
ईरान ने इसराइल और अमेरिका के हमलों के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई करते हुए सऊदी अरब, कुवैत, क़तर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं.
बीबीसी उर्दू ने पाकिस्तान सेना के जनसंपर्क विभाग (आईएसपीआर) की सूचना का हवाला देते हुए लिखा है कि दोनों ने (मुनीर और सऊदी रक्षा मंत्री) सऊदी अरब पर ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों से पैदा हालात की गंभीरता और उन्हें रोकने के उपायों पर चर्चा की.
ये चर्चा दोनों के बीच रक्षा समझौते के दायरे में हुई.
पिछले साल दोनों देशों ने ‘स्ट्रैटिजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट’ किया था.
आईएसपीआर के मुताबिक़ आसिम मुनीर और ख़ालिद बिन सलमान ने उम्मीद जताई कि ईरान जैसा मित्र देश किसी भी तरह की ग़लतफहमी से बचेगा और संकट के शांतिपूर्ण समाधान के लिए मित्र देशों के साथ सहयोग करेगा.
पाकिस्तान सिर्फ़ चेतावनी देगा या फिर मैदान में उतरेगा
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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान ने ईरान पर इसराइल के हमलों की निंदा की है. उसने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या पर भी ऐतराज़ जताया था.
विशेषज्ञों के मुताबिक़ अगर ईरान युद्ध लंबा खिंचता है तो पाकिस्तान की एनर्जी सिक्योरिटी ख़तरे में पड़ सकती है.
पाकिस्तान की पत्रकार और एंकर अस्मा शिराजी कहती हैं कि पाकिस्तान की ख़राब अर्थव्यवस्था उसे किसी एक पक्ष की ओर झुकने को मजबूर कर सकती है.
हालांकि वो कोशिश करेगा कि ईरान और सऊदी अरब के बीच संतुलन बना कर चले.
पाकिस्तान के सऊदी अरब के साथ घनिष्ठ संबंध हैं, जबकि ईरान एक पड़ोसी देश है जिस पर गहरी सांस्कृतिक छाप है.
जनरल आसिम मुनीर और ख़ालिद बिन सलमान की इस मुलाक़ात को रणनीतिक लिहाज से काफ़ी अहम माना जा रहा है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ कुछ महीनों पहले तुर्की ने भी पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ शामिल होने की ख़्वाहिश जताई थी.
इसे ‘इस्लामिक नेटो’ की तरह देखा जा रहा था. नेटो के आर्टिकल 5 के मुताबिक़ इसके एक सदस्य पर कोई हमला सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा.
हालांकि ये सवाल भी उठ रहा है कि पाकिस्तान सिर्फ़ ज़ुबानी चेतावनी देगा या फिर सऊदी अरब के साथ मिलकर ईरान के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगा.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब का रक्षा समझौता है
क़मर चीमा इस विचार से असहमत हैं कि पाकिस्तान दो नावों में सवार है.
वो कहते हैं, “पाकिस्तान ने ईरान के साथ मित्रता बनाए रखी है, लेकिन जब सऊदी अरब की बात आती है, तो हमारा उसके साथ रक्षा समझौता है. पाकिस्तान हर कीमत पर सऊदी अरब के साथ खड़ा रहेगा.”
वो कहते हैं, “अब तक सऊदी अरब में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले हुए हैं. हालांकि, अगर सऊदी अरब के क्षेत्र पर हमला होता है, उसकी संपत्ति और बुनियादी ढांचे पर हमला होता है और इसके ख़िलाफ़ सऊदी सरकार हमला करना चाहेगी तो पाकिस्तान किसी भी परिस्थिति में अपने समझौते से पीछे नहीं हटेगा.”
क़मर चीमा के मुताबिक़, “ईरान समेत पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता है, तो वह पीछे कैसे हट सकता है? यही कारण है कि ईरान ने सऊदी अरब के सैन्य ठिकानों पर बहुत कम हमले किए हैं. ईरान को पहले ही चेतावनी दी गई थी कि यह उसके लिए अच्छा नहीं होगा, क्योंकि सऊदी अरब को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में, समझौते के तहत हमें किसी भी समय युद्ध में उतरना पड़ेगा.”
जबकि अस्मा शिराज़ी कहती हैं, “जहां तक सऊदी अरब रक्षा समझौते का सवाल है, इसके तहत पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने सऊदी अरब और ईरान दोनों से संपर्क किया था. इससे संकेत मिलता है कि किसी समय, जब सऊदी अरब पाकिस्तान से कहेगा कि उसे पाकिस्तान की ज़रूरत है, तो वो पीछे नहीं हटेगा.”
सऊदी अरब और पाकिस्तान का रक्षा समझौता क्या है
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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान सऊदी अरब को रक्षा सहयोग देता रहा है वहीं सऊदी अरब ने पाकिस्तान की कई बार आर्थिक मदद की है
साल 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब ने रक्षा समझौता किया था. सऊदी अरब और पाकिस्तान दोनों ही सुन्नी बहुल देश हैं और दोनों देशों के मज़बूत ऐतिहासिक संबंध रहे हैं.
सऊदी ने कई बार आर्थिक संकट के समय पाकिस्तान की मदद की है और पाकिस्तान भी बदले में सऊदी को सुरक्षा सहयोग का भरोसा देता रहा है.
लेकिन इस समझौते ने सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच अब तक चले आ रहे सहयोग को औपचारिक रूप दे रहा है.
इस समझौते की सबसे अहम बात यह है कि अगर दोनों में से किसी भी देश पर हमला होता है तो उसे दूसरा देश भी ऐसे हमले को ख़ुद पर हमला मानेगा.
यानी अब अगर पाकिस्तान या सऊदी अरब पर कोई हमला होता है तो इसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा.
दोनों देशों की थल, वायु और नौ सेनाएं अब और अधिक सहयोग करेंगी और ख़ुफ़िया जानकारियां साझा करेंगी.
पाकिस्तान एक परमाणु संपन्न देश है. ऐसे में इसे खाड़ी में सऊदी अरब के लिए सुरक्षा सहयोग का भरोसा भी माना जा रहा है.
सऊदी अरब दशकों से पाकिस्तान की आर्थिक मदद करता रहा है. सऊदी अरब आर्थिक सहायता पैकेज, क़र्ज़, तेल ख़रीद पर देरी से भुगतान और आर्थिक संकट के समय भारी निवेश करके पाकिस्तान को आर्थिक मदद देता रहा है.
साल 2025 में सऊदी ने पाकिस्तान को 1.2 अरब डॉलर की तेल ख़रीद पर देरी से भुगतान की सुविधा दी थी. इसी तरह साल 2018 में भी सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर की तेल ख़रीद पर देरी से भुगतान की सुविधा दी थी.
पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को संतुलित करने के लिए भी सऊदी अरब कई बार पाकिस्तान की मदद कर चुका है.
2014 में सऊदी अरब ने 1.5 अरब डॉलर पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक में सीधे जमा कराए थे. इसके बाद 2018 में और फिर 2024 में 3-3 अरब डॉलर पाकिस्तान को सऊदी ने दिए.
सीधी मदद के अलावा सऊदी ने पाकिस्तान को राहत पैकेज भी दिए हैं और भारी निवेश भी किया है.
विश्लेषक मानते हैं कि अब यह रक्षा समझौता होने के बाद पाकिस्तान को सऊदी अरब से और अधिक आर्थिक मदद मिल सकती है.
पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक हुसैन हक्कानी ने एक टिप्पणी में कहा था, “अब पाकिस्तान सऊदी अरब के पैसे से उन अमेरिकी हथियारों को ख़रीद सकता है जिनकी उसे ज़रूरत है. ट्रंप प्रशासन हथियार बेचने का इच्छुक नज़र आता है. “
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.