आधुनिक काल (2000 से अब तक)
सबसे अहम खदान की बंदी: 2001 आर्थिक और पर्यावरणीय कारणों से कोलार गोल्ड फील्ड्स को बंद कर दिया गया, जिससे भारत के सोने के उत्पादन में गिरावट आई।
पहुंच में आसानी: 2002 से बैंकों ने और 2008 से डाकघरों ने सोने के सिक्कों की बिक्री शुरू की।
डिजिटल सोना: 2007 में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) की शुरुआत हुई, जिससे सोने में निवेश करना और उसे सुरक्षित रखना आसान हो गया।
रिकॉर्ड मांग: 2010 तक भारत में सोने की मांग अपने ऐतिहासिक स्तर 1001.7 टन तक पहुंच गई थी।
भारतीय स्वर्ण सिक्का (IGC): 2015 के करीब राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में ‘इंडियन गोल्ड कॉइन’ लॉन्च किया गया।
नई खोज: भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में लगभग 700 टन स्वर्ण अयस्क के भंडार की खोज की, हालांकि इसका अनुसंधान अभी बाकी है।
सोने की एक खदान सक्रिय: मौजूदा समय में कर्नाटक की हट्टी खदान भारत की एकमात्र सक्रिय सोने की खदान है, जो प्रति वर्ष लगभग 1.8 टन सोना पैदा करती है। इस खदान का इतिहास 2,000 साल से भी अधिक पुराना है (पूर्व-अशोक काल), जहां प्राचीन खनिक 2300 फीट की गहराई तक काम करते थे।