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पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने दावा किया है कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया को श्रद्धांजलि देने पहुंचे भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ख़ुद आगे बढ़कर उसके स्पीकर सरदार अयाज़ सादिक़ को अपना परिचय दिया और उनसे हाथ मिलाया.
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर दोनों की हाथ मिलाती तस्वीर पोस्ट कर लिखा है कि मई 2025 के संघर्ष के बाद भारत की ओर से ‘उच्च स्तरीय संपर्क’ की यह पहली कोशिश थी.
बांग्लादेश के प्रमुख अख़बार ‘प्रथम आलो’ ने भी लिखा है कि ख़ालिदा ज़िया के अंतिम संस्कार से पहले कुछ अंतरराष्ट्रीय नेताओं के बीच मुलाक़ात के दौरान भारत के विदेश मंत्री ने आगे बढ़े और पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर से हाथ मिलाया.
हालांकि एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर ख़ालिदा ज़िया के बेटे तारिक़ रहमान से मुलाक़ात की तस्वीरें ही शेयर की हैं लेकिन अयाज़ सादिक़ से मुलाक़ात का कोई ज़िक्र नहीं किया है.
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को 80 साल साल की उम्र में निधन हो गया था.
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इन तस्वीरों के साथ इस पोस्ट में लिखा है, ”पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज़ सादिक़ ने बुधवार को ढाका में पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया के अंतिम संस्कार कार्यक्रम से पहले भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से अभिवादन का आदान-प्रदान किया.”
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने क्या कहा
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पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर जयशंकर और सरदार अयाज़ सादिक़ की हाथ मिलाती तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा है, ”बांग्लादेश संसद की यात्रा के दौरान, दिवंगत बेगम ख़ालिदा ज़िया के लिए रखी गई शोक पुस्तिका में अपनी टिप्पणी दर्ज करने पहुंचे नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज़ सादिक से भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मुलाक़ात की और उनसे हाथ मिलाया.”
इसमें लिखा है, ”यह बातचीत विभिन्न देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुई. इस दौरान डॉ. एस. जयशंकर ने स्पीकर को अपना परिचय दिया और कहा कि उन्होंने उन्हें पहचान लिया है.”
नेशनल असेंबली ने लिखा है, ”यह भी उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान लगातार संवाद, संयम और सहयोग के क़दमों पर ज़ोर देता रहा है.”
हाथ मिलाने की चर्चा पाकिस्तानी मीडिया में
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पाकिस्तानी अख़बारों ने जयशंकर और सादिक़ की इस ‘मुलाक़ात’ को प्रमुखता से कवर किया है.
पाकिस्तान के अख़बार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने लिखा है, ”भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को ढाका में पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज़ सादिक़ से संक्षिप्त मुलाकात की. मई में हुए सैन्य संघर्ष के बाद दोनों प्रतिद्वंद्वियों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच यह पहली ऐसी मुलाक़ात थी.”
इसने लिखा है, ”भारत और पाकिस्तान सहित कई देशों के नेता और वरिष्ठ अधिकारी अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए ढाका गए थे.”
अख़बार लिखता है, ”वहां मौजूद अधिकारियों के मुताबिक़, जयशंकर सादिक़ की सीट के पास गए और उनसे हाथ मिलाकर अभिवादन किया, जिसका ज़वाब पाकिस्तानी स्पीकर ने मुस्कुराकर दिया. दोनों ने संक्षिप्त बातचीत की और एक-दूसरे का हालचाल पूछा. किसी औपचारिक बातचीत की कोई ख़बर नहीं है.”
‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने लिखा है, ”मई 2025 में परमाणु हथियारों से लैस दोनों पड़ोसी देशों के बीच चार दिन के संघर्ष के बाद से शीर्ष भारतीय और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच पहली सीधी मुलाकात थी.”
अख़बार लिखता है, ” दोनों देशों के बीच संबंध स्थिर बने हुए हैं और कोई सार्थक बातचीत नहीं हुई है. बुधवार को ढाका में हुई संक्षिप्त और अनौपचारिक बातचीत ने औपचारिक जुड़ाव की निरंतर कमी को रेखांकित किया है जबकि दोनों पक्ष अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय कार्यक्रमों में एक साथ दिखाई देते हैं.”
प्रमुख पाकिस्तानी अख़बार ‘द न्यूज़’ ने नेशनल असेंबली की ओर से जारी जयशंकर-सादिक़ की तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा है, ” नेशनल असेंबली के स्पीकर सादिक़ ने बुधवार को बांग्लादेश की राजकीय यात्रा के दौरान भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाक़ात की. मई में परमाणु हथियारों से लैस इन दोनों पड़ोसी देशों के बीच 87 घंटे तक चले युद्ध के बाद यह पहली उच्च स्तरीय मुलाक़ात थी.”
अख़बार लिखता है, ”इस साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच संक्षिप्त सैन्य संघर्ष के बाद तनाव बना हुआ है. दोनों पड़ोसी देशों के बीच राजनीतिक तनाव एशिया कप 2025 के दौरान क्रिकेट के मैदान पर भी देखने को मिला, जब भारतीय खिलाड़ियों ने कथित तौर पर अपने पाकिस्तानी समकक्षों से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया.”
पाकिस्तान के एक और प्रमुख अख़बार ‘डॉन’ ने भी इस मुलाक़ात को कवर किया है.
अख़बार ने लिखा है, ”नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक़ और भारतीय विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने बुधवार को ढाका में हाथ मिलाया, जो इस साल मई में हुए सैन्य संघर्ष के बाद पाकिस्तानी और भारतीय अधिकारियों के बीच पहला उच्च स्तरीय संपर्क था.”
बांग्लादेश के अख़बारों में भी चर्चा
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अख़बार ने लिखा है, ”दक्षिण एशिया के दो प्रतिद्वंद्वी देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधियों ने पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी अध्यक्ष ख़ालिदा ज़िया को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए ढाका में मुलाक़ात की. भारतीय और पाकिस्तानी प्रतिनिधियों ने एक दूसरे का हालचाल लिया. ”
”पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक़ और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर दोनों पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए ढाका आए थे.”
अख़बार लिखता है, ”बुधवार को ज़िया के अंतिम संस्कार की नमाज़ से पहले, सार्क देशों के छह प्रतिनिधि जातीय संसद भवन के दक्षिणी ब्लॉक में एक विशेष कक्ष में श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए जमा हुए. इस कमरे में नेपाल के विदेश मंत्री बाला नंदा शर्मा, भूटान के विदेश मंत्री डीएन धुंग्येल, मालदीव के राष्ट्रपति के विशेष दूत और उच्च शिक्षा मंत्री अली हैदर अहमद और श्रीलंका की विदेश मंत्री विजिता हेरथ भी मौजूद थे.”
प्रथम आलो ने लिखा है, ”एक समय ऐसा आया जब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर आगे बढ़े और उन्होंने सरदार अयाज सादिक़ से हाथ मिलाया. उस दौरान दोनों ने एक-दूसरे का अभिवादन किया.”
बांग्लादेश के अंग्रेज़ी अख़बार न्यू एज ने भी जयशंकर और अयाज़ सादिक़ के हाथ मिलाने पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है.
‘न्यू एज’ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”सरदार अयाज़ सादिक़ ने मणिक मिया एवेन्यू में होने वाले अंतिम संस्कार से पहले जातीय संसद परिसर में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाक़ात कर एक दूसरे को अभिवादन किया. इसकी पुष्टि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के कार्यालय ने भी की है.”
न्यू एज ने लिखा है, ”एक आधिकारिक तस्वीर में अयाज़ सादिक और जयशंकर को हाथ मिलाते हुए देखा जा सकता है, जिसे इस वर्ष मई में दोनों पड़ोसी देशों के बीच हुए सैन्य संघर्ष के बाद पाकिस्तान और भारत के बीच पहला उच्च-स्तरीय संपर्क माना जा रहा है. नमाज़-ए-जनाज़ा से पहले, सादिक और जयशंकर ने तीन बार की प्रधानमंत्री रहीं खालिदा ज़िया के निधन पर बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक़ रहमान के प्रति शोक संदेश व्यक्त किए.”
न्यू एज ने लिखा है, ”पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज़ सादिक़ जब दिवंगत ख़ालिदा ज़िया के लिए रखी गई शोक पुस्तिका में अपनी टिप्पणियां दर्ज करने के लिए बांग्लादेश की संसद पहुँचे, उस समय कई देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधियों की उपस्थिति में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नेशनल असेंबली के स्पीकर से संपर्क किया और उनसे हाथ मिलाया. यह जानकारी पाकिस्तान नेशनल असेंबली के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर साझा की गई.”
भारत की पहल?
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एस. जयशंकर का ख़ालिदा ज़िया को श्रद्धांजलि देने ढाका पहुंचने को काफ़ी अहम माना जा रहा है.
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तारिक़ रहमान को पीएम मोदी का एक पत्र भी सौंपा था. इस पत्र में पीएम मोदी ने ख़ालिदा ज़िया के निधन पर शोक जताते हुए संवेदना व्यक्त की है.
पीएम मोदी के इस ख़त पर दक्षिण एशिया की जियोपॉलिटिक्स पर गहरी नज़र रखने वाले विश्लेषक माइकल कुगलमैन ने अपनी प्रतिक्रिया में एक्स पर लिखा है, ”मोदी का शोक-संदेश पत्र केवल ज़िया के निधन पर सम्मान व्यक्त करने के एक औपचारिक कदम के रूप में ही नहीं बल्कि इस संकेत के तौर पर भी पढ़ा जाना चाहिए कि नई दिल्ली चुनाव के बाद बीएनपी के नेतृत्व वाली सरकार (जिसमें रहमान के प्रधानमंत्री होने की संभावना है) जो कि सबसे संभावित चुनावी परिणाम माना जा रहा है, से संवाद और जुड़ाव के लिए तैयार है.”
बांग्लादेश में इसी साल 12 फ़रवरी को चुनाव हैं. इस बार के चुनाव में बांग्लादेश जमात-ए इस्लामी एक ताक़त के रूप में दिख रही है. जमात ने शेख़ हसीना के विरोध में बनी नेशनल सिटिज़न पार्टी (एनसीपी) से गठबंधन किया है.
एनसीपी और जमात दोनों का रुख़ भारत को लेकर बहुत सकारात्मक नहीं रहा है. कहा जा रहा है कि अगर यह गठबंधन सत्ता में आता है तो भारत के लिए तालमेल बैठाना आसान नहीं होगा.
इस बीच बांग्लादेश जमात-ए इस्लामी के प्रमुख शफ़ीक़ुर रहमान ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में कहा है, ”ढाका से भागने के बाद हसीना का भारत में लगातार बने रहना चिंता का विषय है, क्योंकि दोनों देशों के संबंध दशकों में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए हैं.”
रॉयटर्स ने लिखा है, ”रहमान ने पुष्टि की कि पिछले साल की शुरुआत में उनकी बायपास सर्जरी के बाद उन्होंने एक भारतीय राजनयिक से मुलाक़ात की थी. रहमान के अनुसार, अन्य देशों के राजनयिकों ने उनसे खुले तौर पर शिष्टाचार मुलाक़ातें कीं लेकिन भारतीय अधिकारी ने इस बैठक को गोपनीय रखने का अनुरोध किया था. रहमान ने पूछा, “क्यों? कई राजनयिक मुझसे मिलने आए और यह सार्वजनिक किया गया. समस्या कहाँ है? इसलिए हमें सभी के लिए और एक-दूसरे के प्रति खुले रहना चाहिए.”
रॉयटर्स ने लिखा है, ”रहमान के इस बयान या बैठक को गोपनीय रखने के किसी अनुरोध पर भारत के विदेश मंत्रालय ने तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.”
जमात के पाकिस्तान के साथ ऐतिहासिक निकट संबंधों के बारे में पूछे जाने पर रहमान ने कहा, “हम सभी के साथ संतुलित ढंग से संबंध बनाए रखते हैं. हम कभी किसी एक देश की ओर झुकने में रुचि नहीं रखते बल्कि, हम सभी का सम्मान करते हैं और देशों के बीच संतुलित संबंध चाहते हैं.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.