पीटीआई, नई दिल्ली। गर्भावस्था के दौरान पैरासिटामोल लेने से बच्चे में ऑटिज्म, एडीएचडी या बौद्धिक अक्षमता का खतरा बढ़ता है- इस धारणा को एक नए व्यापक अध्ययन ने खारिज कर दिया है।
प्रतिष्ठित जर्नल द लैंसेट आब्स्टेट्रिक्स, गायनाकोलाजी एंड वुमेंस हेल्थ में प्रकाशित इस विश्लेषण में कहा गया है कि सख्त वैज्ञानिक पद्धतियों वाले अध्ययनों से ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता।
ब्रिटेन के लिवरपूल विश्वविद्यालय और यूरोप के अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं ने 43 अध्ययनों की समीक्षा की और विशेष रूप से उन शोधों पर ध्यान दिया जिनमें भाई-बहनों की तुलना जैसी मजबूत पद्धतियां अपनाई गई थीं।
निष्कर्ष में कहा गया, “मौजूदा साक्ष्य यह नहीं दर्शाते कि निर्देशानुसार पैरासिटामोल लेने वाली गर्भवती महिलाओं के बच्चों में आटिज्म, एडीएचडी या बौद्धिक अक्षमता की संभावना चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण स्तर तक बढ़ती है।”
शोधकर्ताओं के अनुसार पहले जिन अध्ययनों में मामूली संबंध बताया गया था, वे अक्सर पक्षपात से प्रभावित थे। गर्भावस्था के दौरान बुखार, दर्द, संक्रमण या आनुवंशिक प्रवृत्तियां जैसे मातृ कारक इन जोखिमों के वास्तविक कारण हो सकते हैं, न कि स्वयं पैरासिटामोल।
ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक रुद्ररूप भट्टाचार्जी ने कहा कि यह अध्ययन महत्वपूर्ण है क्योंकि पूर्व चिंताएं ऐसे शोधों पर आधारित थीं जो दवा के प्रभाव और उसे लेने के मूल कारणों को अलग नहीं कर पाए थे।
लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रापिकल मेडिसिन के विशेषज्ञों ने भी टिप्पणी में कहा कि यह विश्लेषण पुष्टि करता है कि आवश्यकता पड़ने पर पैरासिटामोल गर्भावस्था में बुखार और दर्द के प्रबंधन का सुरक्षित व प्रमाण-समर्थित विकल्प बना हुआ है, खासकर तब जब अनुपचारित संक्रमण भ्रूण के लिए अधिक जोखिमपूर्ण हो सकता है।