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ग़्यासुद्दीन बलबन: एक ग़ुलाम के दिल्ली का सुल्तान बनने की कहानी – विवेचना

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Mar 4, 2026


ग़्यासुद्दीन बलबन

इमेज स्रोत, NCERT

इमेज कैप्शन, ग़्यासुद्दीन बलबन ने 1246 से लेकर 1287 तक चालीस सालों तक अपनी ताक़त का भरपूर इस्तेमाल किया

इल्तुतमिश के सबसे छोटे बेटे नासिरुद्दीन महमूद के दिल्ली की गद्दी संभालते ही दिल्ली सल्तनत में राजनीतिक स्थिरता बहाल होनी शुरू हो गई थी, लेकिन इसमें सुल्तान महमूद की कोई ख़ास भूमिका नहीं थी.

यह काम किया था उसके सबसे ख़ास मंत्री ग़्यासुद्दीन बलबन ने जिसको महमूद के शासनकाल में सबसे अधिक ताक़त मिली हुई थी.

बलबन ने 1246 से लेकर 1287 तक चालीस सालों तक इस ताक़त का भरपूर इस्तेमाल किया, पहले दो दशक सुल्तान के प्रतिनिधि के तौर पर और अगले दो दशक दिल्ली के सुल्तान के तौर पर.

इस बीच सत्ता हासिल करने के उसके सफ़र में दो साल का व्यवधान पड़ा, जब वह अपने राजनीतिक विरोधियों की चालों के कारण क़रीब दो वर्षों तक सत्ता से बाहर रहा.

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