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गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के लिए ट्रंप ने भारत को दिया न्योता, किन-किन देशों को मिला निमंत्रण?

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Jan 18, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गाजा में संघर्ष को खत्म करने और दूसरे चरण के शांति समझौते को लागू करने के लिए गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 60 देशों को आमंत्रित किया है। हालांकि, इसका उद्देश्य गाजा के पुनर्निर्माण से कहीं आगे का माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आगे चलकर यह वैश्विक संघर्षों का समाधान करेगा।

इसे देखते हुए विभिन्न देशों की सरकारों ने सतर्कतापूर्वक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। राजनयिकों का कहना है कि यह योजना संयुक्त राष्ट्र के कार्यों को नुकसान पहुंचा सकती है। केवल हंगरी के नेता ने इस निमंत्रण को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है। एएनआई के मुताबिक, ट्रंप ने इसके लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए भारत को भी न्योता दिया है।

एक अरब डॉलर का करना होगा भुगतान

मसौदा चार्टर की प्रति के अनुसार, बोर्ड की अध्यक्षता आजीवन ट्रंप करेंगे और इसकी शुरुआत गाजा संघर्ष के समाधान से होगी और फिर इसका विस्तार अन्य संघर्षों से निपटने के लिए किया जाएगा। ब्लूमबर्ग न्यूज ने बताया कि ट्रंप प्रशासन चाहता है कि राष्ट्र ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में बने रहने के लिए एक अरब डॉलर का भुगतान करें।

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रत्येक सदस्य देश इस चार्टर के लागू होने की तारीख से अधिकतम तीन साल के लिए सदस्य रहेगा, जिसे अध्यक्ष द्वारा नवीनीकृत किया जा सकता है। व्हाइट हाउस ने रिपोर्ट को ‘भ्रामक’ बताया और कहा कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए कोई न्यूनतम सदस्यता शुल्क नहीं है।

किन-किन देशों को निमंत्रण?

इसमें कूटनीति, विकास, बुनियादी ढांचे और आर्थिक रणनीति में अनुभव रखने वाले नेता शामिल हैं और भारत, तुर्किये, मिस्त्र, अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, इटली, मोरक्को, ब्रिटेन, जर्मनी, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया सहित 60 देशों के प्रमुखों को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।

पाकिस्तान ने कहा कि पीएम शहबाज शरीफ को इसके लिए निमंत्रण मिला है। यूएई ने ट्रंप के कदम का स्वागत किया है। कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने भी ट्रंप के बोर्ड के गठन पर सैद्धांतिक रूप से सहमति व्यक्त की है।

इजरायल ने उम्मीदवारों के चयन पर जताई आपत्ति

एएनआई के अनुसार, इजरायल ने ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के लिए उम्मीदवारों के चयन पर आपत्ति जताई है, यह कहते हुए कि नियुक्तियां इजरायल के साथ समन्वय में नहीं की गईं और ‘उसकी नीति के विपरीत हैं।’

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