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चांद से सैंपल लाएगा चंद्रयान-4, चंद्रयान-5 में होगा 350 kg का रोवर; कब तक तैयार होगा भारत का अपना स्पेस स्टेशन?

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Mar 12, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इसरो के चेयरमैन वी नारायणन ने बुधवार को स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी अवेयरनेस ट्रेनिंग (START 2026) प्रोग्राम के चौथे एडिशन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने चांद, मंगल और शुक्र से जुड़े प्रोजेक्ट्स सहित कई भविष्य के मिशनों के बारे में बताया, जो विचाराधीन हैं।

चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 मिशन

इसरो चीफ ने कहा कि भारत चंद्रयान-4 मिशन के तहत चांद से सैंपल इकट्ठा करके उन्हें धरती पर वापस लाने की योजना बना रहा है, जबकि चंद्रयान-5 में एक भारी लैंडर होने की उम्मीद है, जिसकी ऑपरेशनल लाइफ काफी लंबी होगी।

उन्होंने कहा, “अब हम चंद्रयान प्रोग्राम को जारी रखने पर काम कर रहे हैं। चंद्रयान-4 में, हम सैंपल इकट्ठा करके उन्हें वापस लाने की योजना बना रहे हैं। चंद्रयान-5 में एक भारी लैंडर होगा जिसकी मिशन लाइफ लंबी होगी।”

‘अब 350 kg का रोवर होगा’

नारायणन ने बताया कि चंद्रयान-3 का लैंडर चांद की सतह पर सिर्फ 14 दिनों तक चला था। उन्होंने कहा, “भविष्य के मिशन में, हम लगभग 100 दिनों की लाइफ की बात कर रहे हैं। रोवर भी भारी होगा। चंद्रयान-3 में लगभग 25 kg का रोवर था, जबकि भविष्य के मिशन में लगभग 350 kg का रोवर होगा।”

दूसरे प्रोग्राम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसरो मार्स लैंडिंग मिशन और वीनस ऑर्बिटर मिशन पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “हमने पहले ही मार्स ऑर्बिटर मिशन पूरा कर लिया है, और अब हम मार्स लैंडिंग मिशन पर काम कर रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स पर सरकारी मंजूरी के लिए बातचीत चल रही है।”

भारत का स्पेस स्टेशन कब बनेगा?

नारायणन ने भारत के बड़े स्पेस प्लान के बारे में भी बताया, जिसमें गगनयान ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम भी शामिल है। उन्होंने कहा, “हम अभी गगनयान प्रोग्राम पर काम कर रहे हैं और अपने एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस में भेजने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने की प्लानिंग कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन बनाने का प्लान बना रहा है और उसका मकसद 2040 तक भारतीय एस्ट्रोनॉट्स को चांद पर उतारकर सुरक्षित वापस लाना है।

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