चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक़, नए नियमों के तहत कारों की बिक्री की अनुमति तभी दी जाएगी जब उनके दरवाज़ों के अंदर और बाहर, दोनों तरफ़ मैकेनिकल रिलीज़ सिस्टम मौजूद हो. ये नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले हैं.
चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के नियमों के अनुसार, बूट को छोड़कर हर पैसेंजर दरवाजे़ के बाहरी हिस्से में छह से.मी. x दो से.मी. x ढाई से.मी. से कम माप का एक धंसा हुआ स्थान होना आवश्यक होगा ताकि हैंडल तक पहुंच आसान हो सके.
कार के अंदर कम से कम 1 से.मी. x 0.7 से.मी. आकार के संकेत होने चाहिए जो यह दर्शाते हों कि दरवाज़ा कैसे खोला जाए. जिन कारों को अधिकारियों ने पहले ही मंज़ूरी दे दी है और जो चीनी बाज़ार में प्रवेश करने के अंतिम चरण में हैं, उन्हें अपने डिज़ाइन को अपडेट करने के लिए दो साल का और समय मिलेगा.
अमेरिका में भी जांच
नवंबर में अमेरिकी राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात सुरक्षा प्रशासन (एनएचटीएसए) ने टेस्ला के इलेक्ट्रिक-संचालित डोर हैंडल पर केंद्रित एक जांच शुरू की.
एनएचटीएसए ने ये जांच उन रिपोर्टों के जवाब में शुरू की, जिनमें बताया गया था कि हैंडल अचानक काम करना बंद कर देते हैं, जिससे बच्चे कारों में फंस जाते हैं.
एनएचटीएसए ने कहा कि उसे टेस्ला की 2021 ‘मॉडल वाई’ कारों में लगे हैंडलों के बारे में नौ शिकायतें मिली हैं. मॉडल वाई टेस्ला कंपनी का प्रमुख मॉडल है. मॉडल वाई के बारे में मिली शिकायत के चार मामलों में, कार मालिकों ने समस्या का समाधान करने के लिए खिड़की तोड़ने का सहारा लिया.
भारत में कुछ कंपनियां छिपे हुए डोर हैंडल वाली गाड़ियां बेच रही हैं. टाटा मोटर्स की कुछ कारों में ऐसे ही डोर हैंडल लगे हुए हैं.
दक्षिण कोरियाई कार निर्माता किआ भी भारत में अपनी कुछ कारों में फ्लश-फिटेड डोर हैंडल देती है. महिंद्रा एंड महिंद्रा (एमएंडएम) की कुछ गाड़ियों में ऐसे ही छिपे हुए डोर हैंडल हैं.
एसएंडपी ग्लोबल मोबिलिटी में इंडिया और आसियान ऑटोमोटिव मार्केट के डायरेक्टर पुनीत गुप्ता ने बिज़नेसटूडे को बताया, “दुनिया के सबसे बड़े कार निर्माता चीन ने इस मुद्दे को उठाया है. अगर वहां हालात फ्लश डोर हैंडल पर प्रतिबंध लगाने तक पहुँच गए हैं, तो इसका मतलब है कि उन्हें कोई व्यावहारिक समाधान नहीं मिला. अगर वे फ्लश हैंडल हटाने जैसा कड़ा कदम उठा रहे हैं, तो भारत को भी हिडन डोर हैंडल से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए.”
वह कहते हैं, “इलेक्ट्रॉनिक तरीके़ से काम करने वाले हैंडल हादसों के समय काम न करें, ऐसा मुमकिन है. हाई-एंड कारों में ज़्यादा फीचर्स के कारण बैटरी पर लोड ज़्यादा होता है. इससे बैटरी खत्म होने का खतरा रहता है. ऐसी स्थिति में दुर्घटना के बाद राहत और बचाव में लगे लोग दरवाज़े नहीं खोल पाते. इलेक्ट्रिक वाहनों में यह जोखिम और भी ज़्यादा गंभीर है.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.