• Wed. Sep 23rd, 2026

24×7 Live News

Apdin News

चुनाव आयोग के भीतर के ऐसे चार मामले, जब उसकी विश्वसनीयता पर उठे गंभीर सवाल

Byadmin

Sep 23, 2026


ज्ञानेश कुमार

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर विपक्षी पार्टियां सवाल उठाती रही हैं

प्रकाशित

पढ़ने का समय: 11 मिनट

भारत में जब भी चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और उसकी स्वतंत्रता की बात की जाती है तो पूर्व चुनाव आयुक्त टीएन शेषन को याद किया जाता है.

शेषन दिसंबर 1990 से दिसंबर 1996 तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे. शेषन ने कहा था कि चुनाव आयोग भारत का होता है, न कि भारत सरकार का. भारत में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर जब भी सवाल उठता है तो शेषन की यह टिप्पणी चर्चा में आ जाती है.

पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव से ही चुनाव आयोग विवादों के घेरे में है. चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव से एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न की शुरुआत की थी.

चुनाव आयोग ने इसे रूटीन प्रक्रिया बताया था. लेकिन बिहार से शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत अब तक वोटर लिस्ट से 13 करोड़ से ज़्यादा नाम हटाए जा चुके हैं. ऐसे में चुनाव आयोग की भूमिका पर तीखी बहस हो रही है कि वह भारतीयों की नागरिकता तय कर रहा है.

एसआईआर को लेकर भारत की विपक्षी पार्टियों का भी आरोप है कि मोदी सरकार चुनाव आयोग के ज़रिए अपने मन मुताबिक़ वोटर लिस्ट तैयार करवा रही है. केंद्र की मोदी सरकार इन आरोपों को ख़ारिज करती रही है लेकिन अब इस मामले में चुनाव आयोग के भीतर के कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आई है.

By admin