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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के रेप केस में दिए फ़ैसले को लोग क्यों कह रहे हैं ‘महिला विरोधी और असंवेदनशील’

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Feb 20, 2026


सोशल एक्टिविस्ट कोलकाता में 16 जनवरी 2025 को एक डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार और हत्या की निंदा करते हुए नारे लगाते हैं

इमेज स्रोत, DIBYANGSHU SARKAR/AFP via Getty Images

इमेज कैप्शन, सांकेतिक तस्वीर

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के रेप के एक केस में दिए गए फ़ैसले पर विवाद छिड़ गया है और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है.

अदालत ने फ़ैसले में कहा है, “बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेशन बलात्कार नहीं है.”

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2004 में हुई यौन हिंसा की घटना पर सुनवाई करते हुए कहा कि इसे रेप नहीं माना जाएगा.

यह मामला वासुदेव गोंड बनाम छत्तीसगढ़ राज्य का है जो धमतरी ज़िले में हुई 21 मई 2004 की घटना पर आधारित है.

जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल जज बेंच ने 16 फ़रवरी 2026 को धमतरी की अतिरिक्त सत्र अदालत के फैसले के ख़िलाफ़ दायर इस अपील पर फ़ैसला सुनाते हुए अभियुक्त को बलात्कार का दोषी न मानते हुए बलात्कार के प्रयास का दोषी माना और सज़ा कम कर दी.

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