अरविंद पांडेय, नई दिल्ली। शहरों में जिस तरह से आबादी का दबाव लगातार बढ़ रहा है और 2030 तक देश की करीब 45 प्रतिशत आबादी के शहरी होने का अनुमान लगाया जा रहा है, उसके देखते हुए बजट में केंद्र सरकार ने छोटे, मझोले यानी टियर-2 व टियर-3 शहरों के साथ ही धार्मिक शहरों के कायाकल्प और उसे विस्तार देने को लेकर बड़ी पहल की है। जिसमें ऐसे शहरों की संभावनाओं को देखते हुए उन्हें नए शहरी आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की घोषणा है।
साथ ही इन नए शहरी आर्थिक क्षेत्रों में जरूरी सुविधाओं को जुटाने के लिए अगले पांच सालों में प्रत्येक पर पांच हजार करोड़ रुपए खर्च करने का ऐलान किया है। इस घोषणा के पीछे केंद्र सरकार का फोकस ऐसे शहरों की पहचान कर उन्हें पानी, सीवर, परिवहन जैसी जरूरी सुविधाओं से लैस करना है, जिससे वहां रहने वालों का जीवन आसान बन सके। साथ ही उसके आसपास आर्थिक गतिविधियां भी संचालित की जा सके।
बजट में किन बातों पर फोकस
वैसे भी आर्थिक सर्वेक्षण में शहरों के विकास को सिर्फ अच्छे फुटपाथों से न मापते हुए उन्हें नागरिक केंद्रित विकास को गति देने की राह दिखाई गई थी। जिसमें नागरिक सुविधाओं के साथ उनके लिए अच्छे शैक्षणिक संस्थान और रोजगार के साधन भी होने चाहिए। बजट में शायद इसी दिशा में फोकस करते हुए ऐसे नए शहरी आर्थिक क्षेत्र बनाने की पहल की गई है, जिसमें कई छोटे और मझोले शहरों के साथ ही आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी विकसित किया जा सके।
किन शहरों पर किया गया फोकस
इनमें वाराणसी, उज्जैन व अयोध्या जैसे धार्मिक शहरों पर फोकस किया गया है, जहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उस लिहाज से उन्हें विस्तार देने व सुविधाओं को जुटाने पर फोकस किया जाएगा। मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक राज्यों की मदद से चैलेंज मोड में ऐसे शहरों को चिन्हित किया जाएगा। साथ ही उनके विकास व विस्तार की योजना बनाई जाएगी।
इस योजना के तहत चयनित शहरों को जमीनी स्तर पर पहले बदलाव दिखाना होगा, इसके बाद ही उन्हें वित्तीय मदद दी जाएगी। शहरी विकास मामले के विशेषज्ञ हितेश वैध के मुताबिक यह पहल सोच के स्तर पर अच्छी है लेकिन इस शहरी आर्थिक क्षेत्र का प्रशासनिक ढांचा कैसा होगा। व कैसे काम करेगा।
इसे लेकर बजट में कोई राह नहीं दिखाई है। जबकि शहरी विकास के लिए जो सबसे जरूरी है वह प्रशासनिक ढांचा है, क्योंकि उसके बगैर बात आगे नहीं बढ़ेगी। गौरतलब है कि शहरी आर्थिक क्षेत्र एक ऐसा शहरी क्षेत्र से है जो केवल प्रशासनिक सीमाओं यानी नगर निगम की सीमा तक सीमित न होकर अपने आसपास के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों को भी आर्थिक रूप से जोड़ता हो।
बड़े शहरी निकायों को बांड जारी करने के लिए सरकार करेगी प्रोत्साहित
मूलभूल सुविधाओं को जुटाने के लिए केंद्र सरकार ने बजट में बड़े शहरी निकायों को पूंजी जुटाने के लिए अपने म्युनिसिपल बांड जारी करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इस दौरान एक हजार रुपए के म्युनिसिपल बांड जारी करने वाली निकायों को सौ करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान किया है।