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पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की एक अप्रकाशित किताब को लेकर शुरू हुआ विवाद ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार इस किताब को लेकर सरकार पर हमलावर हैं, वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एफ़आईआर भी दर्ज कर ली है.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी ने दिल्ली पुलिस से इस एफ़आईआर के बारे में कई बार बात करने की कोशिश की लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला.
नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी’ की प्रकाशक कंपनी पेंगुइन इंडिया ने सफ़ाई भी जारी कर दी है.
पेंगुइन ने कहा है कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है. अब खुद नरवणे ने भी पेंगुइन के इस दावे पर अपनी मुहर लगा दी है, लेकिन इसके बावजूद यह मामला शांत होता नहीं नज़र आता.
बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि नरवणे के स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि राहुल गांधी के दावे महज़ कोरी कल्पना थी.
वह कहते हैं, ”राहुल गांधी ने जिस मनोहर कहानी को सुनाने का प्रयास सदन के पटल पर किया था, वो उनकी उस तथाकथित प्रकाशित बुक के प्रकाशक और लेखक दोनों के द्वारा स्पष्ट रूप से ध्वस्त हो गया है. राहुल गांधी कल पूछ रहे थे कि प्रकाशक झूठ बोल रहे हैं या फिर जनरल नरवणे, लेकिन अब तो दोनों के ही बयान सामने हैं, जिससे साफ़ है कि असल झूठ बोल कौन रहा है. ”
दरअसल, राहुल गांधी ने मीडिया चैनलों से बात करते हुए नरवणे की अप्रकाशित किताब से जुड़ी दिल्ली पुलिस की एफ़आईआर पर सवाल उठाए थे.
उन्होंने जनरल नरवणे के साल 2023 के एक ट्वीट को पढ़ते हुए कहा, ”मैं यह कहना चाहता हूं कि या तो जनरल नरवणे सच नहीं बोल रहे या फिर पेंगुइन. मुझे नहीं लगता कि एक पूर्व सेना प्रमुख झूठ बोलेंगे. पेंगुइन का कहना है कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, लेकिन वह किताब अमेज़न पर उपलब्ध है. जनरल नरवणे ने ट्वीट किया है… ‘कृपया मेरी किताब 2023 में खरीदें.”
“मैं पेंगुइन की बजाय नरवणे जी की बात पर भरोसा करता हूं. मेरा मानना है कि नरवणे जी ने अपनी किताब में सरकार और प्रधानमंत्री के लिए कुछ असहज बातें लिखी हैं. इसलिए अब आपको तय करना है कि सच कौन बोल रहा है… पेंगुइन या देश के पूर्व सेना प्रमुख.”
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पेंगुइन इंडिया ने इसे लेकर क्या सफ़ाई दी है, नरवणे ने खुद क्या कहा है ये जानने से पहले नरवणे के उस ट्वीट में क्या लिखा है, जिसका ज़िक्र राहुल गांधी कर रहे हैं, ये जान लेते हैं.
तो नरवणे का यह ट्वीट 15 दिसंबर, साल 2023 का है. इसमें वह लिखते हैं, ”हैलो दोस्तों. मेरी किताब अब उपलब्ध है. बस लिंक को फॉलो कीजिए. हैपी रीडिंग. जय हिंद.”
राहुल गांधी ने इसी पोस्ट को लेकर सवाल उठाए थे. उनका कहना था कि जब नरवणे कह रहे हैं कि किताब उपलब्ध है तो प्रकाशक कंपनी झूठ क्यों बोल रही है.
लेकिन अब नरवणे ने ख़ुद पेंगुइन के दावे को सही बताया है.
पेंगुइन का दावा
बीते दो दिनों में इस पूरे विवाद को लेकर पेंगुइन इंडिया ने दो बार अपनी सफ़ाई जारी की है.
पहली सफ़ाई नौ फ़रवरी को आई, जिसमें कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा, ”हाल की चर्चा और मीडिया रिपोर्ट्स को देखते हुए पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया स्पष्ट करना चाहता है कि ‘फोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी’ को प्रकाशित करने का एक मात्र अधिकार हमारे पास है.”
“यह किताब पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने लिखी है. हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है. किताब की कोई भी कॉपी – प्रिंट में या डिजिटल फॉर्म में…अभी तक प्रकाशित, वितरित, बेची या पब्लिक के लिए हमारे द्वारा उपलब्ध नहीं कराई गई है.”
“जो भी कॉपी अभी सर्कुलेशन में हैं…चाहे वह पूरी किताब हो या उसके अंश, चाहे प्रिंट में, डिजिटल में, पीडीएफ़ में, किसी भी फॉर्मेट में, ऑनलाइन या ऑफलाइन, किसी भी प्लेटफॉर्म पर… वो पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के कॉपीराइट का उल्लंघन है और इसे तुरंत रोकना होगा. पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ग़लत माध्यम से किताब की प्रतियां सर्कुलेट करने वालों के ख़िलाफ़ क़ानूनी रास्ता अपनाएगा.”
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दूसरी सफ़ाई राहुल गांधी के उस सवाल के बाद जारी की गई जिसमें उन्होंने नरवणे के द्वीट का हवाला देते हुए किताब के प्रकाशित होने का दावा किया था.
अपनी दूसरी सफ़ाई में पेंगुइन इंडिया ने यह स्पष्ट किया है कि भारत में किताबों के प्रकाशन से जुड़ी उसकी प्रक्रिया क्या है.
पेंगुइन इंडिया के अनुसार, ”किसी किताब की घोषणा होना, उसका प्री-ऑर्डर पर उपलब्ध होना और उसका वास्तव में प्रकाशित होना …ये तीनों अलग-अलग चीज़ें और स्टेज हैं. किसी किताब का अमेज़न जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर प्री-ऑर्डर के लिए दिखना या उसकी भविष्य की रिलीज़ तारीख़ तय होना, यह नहीं दर्शाता कि वह किताब प्रकाशित हो चुकी है. पेंगुइन का कहना है कि किताब को तभी प्रकाशित माना जाता है जब वह रिटेल प्लेटफ़ॉर्म पर सीधे खरीदने के लिए उपलब्ध हो.”
मंगलवार को ही इस मामले में जनरल नरवणे का भी एक पोस्ट सामने आया है. नरवणे ने किताब के स्टेटस को लेकर सफ़ाई दी है और लिखा है कि पेंगुइन जो कह रहा है, किताब का स्टेटस भी वही है.
इसके बावजूद किताब की उपलब्धता को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं.
जैसे आरजेडी सांसद मनोज झा ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए दावा किया कि उन्होंने यह किताब पढ़ी है.
वह कहते हैं, ”मैंने वो किताब पढ़ी है. किताब उपलब्ध है. डिजिटल दुनिया में हर चीज़ उपलब्ध है. कहां रोकेंगे आप सूचना के इस युग में. यह हमारी सल्तनत की असुरक्षा दिखाता है. दिल्ली पुलिस को आप बिना वजह बदनाम कर रहे हैं. एफ़आईआर तो किसी के इशारे पर हुआ है, किसी के इरादे पर हुआ है. मैंने पेंगुइन रैंडमहाउस का वो सर्कुलर भी सोशल मीडिया पर देखा, मुझे दुख हुआ. ”
‘दिल्ली पुलिस की एफ़आईआर’
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, बीते नौ फ़रवरी को दिल्ली पुलिस ने नरवणे की अप्रकाशित किताब के सर्कुलेशन को लेकर एक एफ़आईआर दर्ज की है. रिपोर्ट्स के ही मुताबिक़, इस मामले में दिल्ली पुलिस जांच करेगी कि किताब के अप्रकाशित अंश बिना अनुमति के सार्वजनिक कैसे किए गए और इसके पीछे किसकी भूमिका है.
लेकिन सवाल ये भी उठता है कि इस पूरे विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
तो बीते तीन फ़रवरी को लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कारवां मैगज़ीन में अप्रकाशित किताब (फ़ॉर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी) पर छपे लेख के अंश पढ़ने की कोशिश की थी.
उन्होंने कहा था, “इस पत्रिका में नरवणे जी ने कहा है कि यह उनका संस्मरण है. जो सरकार प्रकाशित नहीं होने दे रही है. मैं इसमें से सिर्फ़ पांच लाइन पढ़ना चाहता हूं.”
भाजपा नेताओं ने आपत्ति जताई और कहा कि अप्रकाशित किताब के अंश कैसे पढ़े जा सकते हैं. इस पर राहुल गांधी ने सत्ता पक्ष पर डरने और घबराने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए, पर उन्हें पढ़ने की इजाज़त नहीं दी गई.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, नरवणे की यह किताब जनवरी 2024 में बाज़ार में आने वाली थी लेकिन फ़िलहाल इसे रक्षा मंत्रालय की अनुमति नहीं मिली है.
अंग्रेज़ी अख़बार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने जनवरी 2024 में ख़बर प्रकाशित की थी कि प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस को कहा गया था कि जांच पूरी होने तक किताब के हिस्से या सॉफ़्ट कॉपी किसी को न दें.
किताब के ये हिस्से 2023 में ही बाहर आए थे
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में में दावा किया गया था, “यह किताब 2020 में चीन के साथ पूर्वी लद्दाख़ में हुए सैन्य विवाद के बारे में बताती है. इसमें गलवान घाटी की झड़प और अग्निपथ योजना का भी ज़िक्र है. इस किताब में 31 अगस्त 2020 की रात को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से हुई बातचीत का ज़िक्र है.”
एक्सप्रेस की रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि दिसंबर 2023 में, न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने जनरल नरवणे की किताब से कुछ हिस्से छापे थे.
इसमें भी 31 अगस्त की शाम की घटना का विस्तार से ज़िक्र था. इसी घटना और नरवणे की किताब पर कारवां मैगज़ीन ने भी एक आर्टिकल प्रकाशित किया है.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इसी आर्टिकल में छपे अंश को संसद में पढ़ना चाहते थे.
कौन हैं मनोज मुकुंद नरवणे?
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जनरल मनोज मुकुंद नरवणे दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक भारतीय सेना के 28वें सेना प्रमुख (चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टाफ़) रहे हैं.
जनरल नरवणे के सैन्य करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 2020 का लद्दाख गतिरोध था.
उन्होंने भारतीय सेना का उस वक़्त नेतृत्व किया, जब पूरी दुनिया में कोरोना महामारी फैली हुई थी और गलवान घाटी में चीन के साथ भारत का तनाव चल रहा था.
मनोज नरवणे ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पुणे के ज्ञान प्रबोधिनी स्कूल से प्राप्त की. वे नेशनल डिफ़ेंस एकेडमी खड़कवासला (पुणे) और इंडियन मिलिट्री एकेडमी के रास्ते भारतीय सेना में ऑफ़िसर बने थे.
युद्ध के मैदान से इतर उनकी पढ़ने-लिखने में भी ख़ूब रुचि रही है. नरवणे ने इंदौर की देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से कंज़र्वेशन एंड मैनेजमेंट स्टडीज़ में एम.फिल. किया है.
मनोज नरवणे के पिता मुकुंद नरवणे वायु सेना में अधिकारी थे. मनोज नरवणे की पत्नी शिक्षिका हैं. नरवणे दंपति की दो बेटियां हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.