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जन्म से लेकर मौत तक नावों पर ही रहने वाले इन लोगों की दास्तां

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Jan 22, 2026


वेंकटेश्वरलू और सिम्हाद्री नाव पर खाना बना रहे हैं
इमेज कैप्शन, वेंकटेश्वरलू और सिम्हाद्री नाव पर खाना बना रहे हैं

इस नदी पर एक गांव बसा है. गांव में घर तैरते हुए दिखाई देते हैं, लेकिन उन घरों में न दीवारें हैं, न दरवाज़े. यहां कोई तय पता भी नहीं है, फिर भी यहां जीवन है.

दरअसल ये गांव आंध्र प्रदेश के पोलावरम ज़िले के चिंतूरू में सबरी नदी पर है. यहां कुछ परिवार नाव पर रह रहे हैं.

दशकों पहले कुछ लोगों ने चिंतूरू में सबरी नदी के तट तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी नाव से तय की थी.

ये कहानी है 11 मछुआरे परिवारों की, जो आंध्र प्रदेश के मारेडुमिल्ली वन क्षेत्र को पार करने के बाद, चिंतूरू में एक पुल के नीचे नावों पर अपना जीवनयापन करते हैं.

सबरी नदी पर बने पुल से कुछ नावें देखी जा सकती हैं. नावों के बीच से धुआं उठ रहा था. यहां काफी ठंड है. सुबह के पांच बजकर 45 मिनट हुए हैं. मुर्गे की आवाज़ नाव से आ रही है और लोग धीरे-धीरे जाग रहे हैं.

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